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काव्य

गुरुओं से फक़त एक डपट चाहिए।

May 26, 2024 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

कर्ज ये  जो लिया है, चुकेगा  नहीं,

गुरुओं से फक़त एक डपट चाहिए।

मैं तो कोरा था मुझ पास अक्षर नहीं,

अक्षरों को समझना तो गुरु चाहिए।

बिना अक्षर मिले, शब्द बनते नहीं,

पंक्ति सृजन को समूची लड़ी चाहिए।1।

कर्ज ये  जो लिया है, चुकेगा  नहीं,

गुरुओं से फक़त एक डपट चाहिए।

शब्द कोष खँगालूं, ये क्षमता नहीं,

करने क्षमता ये अर्जित गुरु चाहिए।

बिन शब्दों के पंक्ति तो बनती नहीं,

पैरा पूरे को तो पँक्तियां चाहिए।2।

कर्ज ये  जो लिया है, चुकेगा  नहीं,

गुरुओं से फक़त एक डपट चाहिए।

समझ पंक्तियों की तो विकसित नहीं,

मोल पँक्ति का समझूँ,  गुरु चाहिए।

पंक्ति पैरा के बिन पाठ, बनता नहीं,

ग्रन्थ अधिगम पाठ वन सघन चाहिए।3।

कर्ज ये  जो लिया है, चुकेगा  नहीं,

गुरुओं