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शिक्षा

INCLUSIVE EDUCATION

May 3, 2024 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

समावेशी शिक्षा

समावेशी शिक्षा से विस्तृत परिक्षेत्र सम्बद्ध है यहाँ अधोलिखित तीन बिन्दुओं पर मुख्यतः विचार करेंगे।

1 – समावेशन की अवधारणा और सिद्धान्त /Concept and principles of inclusion

2 – समावेशन के लाभ / Benefits of inclusion

3 – समावेशी शिक्षा की आवश्यकता / Need of inclusive education

समावेशन की अवधारणा और सिद्धान्त /Concept and principles of inclusion –

जब हम समावेशन की बात करते हैं तो यह जानना परमावश्यक है कि यह किनका करना है। समाज में बहुत से लोग हाशिये पर हैं शिक्षण संस्थाओं में अधिगम करने वाले विविध वर्ग हैं कुछ में शारीरिक, कुछ में मानसिक क्षमताएं, अक्षमताएं  विद्यमान हैं। हमारे विद्यालयों में अध्यापन करने वाला व्यक्ति समस्त अधिगमार्थियों से उनकी क्षमतानुसार अधिगम क्षेत्र उन्नयन हेतु पृथक व्यवहार कर सभी का समावेशन करना चाहता है।

समावेशन वह क्रिया है जो विविधता युक्त व्यक्तित्वों में निर्दिष्ट क्षमता समान रूप से स्थापन करने हेतु की जाती है।

गूगल द्वारा समावेशन सिद्धान्त तलाशने पर ज्ञात हुआ –       

“समावेशी शिक्षण और शिक्षण सभी छात्रों के सीखने के अनुभव के अधिकार को पहचानता है, जो विविधता का सम्मान करता है, भागीदारी को सक्षम बनाता है, बाधाओं को दूर करता है और विभिन्न प्रकार की सीखने की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं पर विचार करता है।“

“Inclusive teaching and learning recognizes the right of all students to a learning experience that respects diversity, enables participation, removes barriers and considers a variety of learning needs and preferences.”

समावेशन का यह प्रयास विविध क्षेत्रों में विविध प्रकार से हो सकता है लेकिन यदि हम केवल शिक्षा के दृष्टिकोण से इस पर विचार करें तो प्रसिद्द शिक्षाविद श्री मदन सिंह जी(आर लाल पब्लिकेशन) का यह विचार भी तर्क सङ्गत है –

“शिक्षा के क्षेत्र में समावेशी शिक्षा का अर्थ है – विद्यालय के पुनर्निर्माण की वह प्रक्रिया जिसका लक्ष्य सभी बच्चों को शैक्षणिक और सामाजिक अवसरों की उपलब्धता से है। ” 

“In the field of education, inclusive education means the process of restructuring of schools aimed at providing educational and social opportunities to all children.”

समावेशी शिक्षा की प्रक्रियाओं  में अधिगमार्थी की उपलब्धि, पाठ्य क्रम पर अधिकार, समूह में प्रतिक्रया, शिक्षण, तकनीक, विविध क्रियाकलाप, खेल, नेतृत्व, सृजनात्मकता आदि को शामिल किया जा सकता है।

समावेशन के लाभ / Benefits of inclusion –

चूँकि हम शैक्षिक परिक्षेत्र में सम्पूर्ण विवेचन कर रहे हैं अतः समावेशी शिक्षा के लाभों पर मुख्यतः विचार करेंगे। इस हेतु बिन्दुओं का क्रम इस प्रकार संजोया जा सकता है।

01- स्वस्थ सामाजिक वातावरण व सम्बन्ध / Healthy social environment and relationships

02- समानता (दिव्याङ्ग व सामान्य) / Equality

03- स्तरोन्नयन / Upgradation

04 – मानसिक व सामाजिक समायोजन / Mental and social adjustment

05- व्यक्तिगत अधिकारों का संरक्षण / Protection of individual rights

06- सामूहिक प्रयास समन्वयन / Coordination of collective efforts

07- समान दृष्टिकोण का विकास / Development of common vision

08- विज्ञजनों के प्रगति आख्यान / Progress stories of experts

09- समानता के सिद्धान्त को प्रश्रय / Support the principle of equality

10- विशिष्टीकरण को प्रश्रय / Support for specialization

11- प्रगतिशीलता से समन्वय / Progressive coordination 

12- चयनित स्थानापन्न / Selective  placement

समावेशी शिक्षा की आवश्यकता / Need for inclusive education –

जब समावेशी शिक्षा की आवश्यकता क्यों ? का जवाब तलाशा जाता है तो निम्न महत्त्वपूर्ण बिन्दु दृष्टिगत होते हैं –

01- सौहाद्रपूर्ण वातावरण का सृजन /  Creation of harmonious environment

02- सहायता हेतु तत्परता / Readiness for help

03- परस्पर आश्रयता की समझ का विकास / Development of understanding of mutual support

04- जैण्डर सुग्राह्यता / Gender sensitivity

05- विविधता में एकता / Unity in diversity

06- सम्यक अभिवृत्ति विकास / Proper attitude development

07- अद्यतन ज्ञान से सामञ्जस्य / Alignment with updated knowledge

08- विश्व बन्धुत्व की भावना को प्रश्रय / Fostering the spirit of world brotherhood

09- हीनता से मुक्ति / Freedom from inferiority

10- मानसिक प्रगति सुनिश्चयन  / Ensuring mental progress

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मनोविज्ञान

Symptoms and Importance of Mental Health

October 12, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

मानसिक स्वास्थय के लक्षण व महत्त्व 

01 – Symptoms of good and poor mental health /अच्छे व खराब मानसिक स्वास्थय के लक्षण

[A ] – अच्छे मानसिक स्वास्थय के लक्षण / Symptoms of good mental health

[B ] – खराब मानसिक स्वास्थय के लक्षण / Symptoms of poor mental health

02 – मानसिक स्वास्थय का महत्त्व / The Importance of Mental Health

जिस प्रकार शरीर में कोई विकार आने से पहले कुछ संकेत मिलने लगते हैं, अलग अलग विकारों यथा हृदयाघात, क्षय, ज्वर, पथरी आदि के पृथक पृथक लक्षण दिखाई पड़ते हैं। इसी तरह अच्छे व बुरे मानसिक स्वास्थय के भी कुछ लक्षण हैं जिन्हे हम इस प्रकार विवेचित कर सकते हैं।   

01 – Symptoms of good and poor mental health /अच्छे व खराब मानसिक स्वास्थय के लक्षण

अध्ययन की सुविधा के दृष्टिकोण से एक एक करके इनका अध्ययन उचित रहेगा अतः इन दोनों पर अलग अलग शीर्षक के तहत विचार प्रगटन का प्रयास करता हूँ।

[A ] – अच्छे मानसिक स्वास्थय के लक्षण / Symptoms of good mental health

01 – कार्य चयन व सम्पादन / work selection and editing

02 – सामाजिक सामंजस्य / Social Harmony

03 – लोच पूर्णता / Elasticity perfection

04 – स्वतन्त्र व सम्यक चिन्तन / Free and fair thinking

05 – सांवेगिक परिपक्वता / Emotional Maturity

06 – चिन्तन का यथार्थ तार्किक आधार / The Realistic Logical Basis of thinking

07 – दायित्व के प्रति समर्पण / Dedication to Responsibility

08 – विषम स्थिति से सम्यक तालमेल / Proper adjustment to adverse situations

09 – आत्म विश्वास से युक्त / Self-confident

10 – स्वस्थ आदत व रुचियाँ / Healthy habits and interests

11 – सम्यक जीवन आदर्श व जीवन दर्शन / Proper Ideals and Philosophy of Life

12 – आशावादिता व प्रगति शीलता / Optimism and progressiveness

[B ] – खराब मानसिक स्वास्थय के लक्षण / Symptoms of poor mental health

01 – काल्पनिक दुनिया में विचरण / Wandering in a fantasy world

02 – सांवेगिक अपरिपक्वता / Emotional immaturity

03 – आत्म हीनता व नकारात्मक दृष्टिकोण / self inferiority and negative attitude

04 – सामञ्जस्य बिठाने में असफल /  Fail to accommodate

05 – अपराध व हीन भावना से ग्रस्त / Plagued by guilt and a sense of inferiority

06 – शंकालु व असुरक्षा भाव से ग्रस्त / Suspicious and plagued by a sense of insecurity

07 – सभी के प्रति मिथ्या दृष्टिकोण / A distorted view of everyone

 08 – स्वयं पर अविश्वास/ Lack of self-belief

09 – धैर्य व सहनशीलता का अभाव / Lack of patience and tolerance

10 – कुण्ठा,  तनाव, निराशा व अवसाद युक्त / Characterized by frustration, stress, hopelessness, and depression

11 – उद्देश्य हीनता / Aimlessness

02 – मानसिक स्वास्थय का महत्त्व / The Importance of Mental Health

आज कहीं भी मानव अपने आपको सुरक्षित नहीं महसूस करता। कहीं डांस करते हुए, कहीं व्यायाम करते हुए, कहीं भाषण देते समय, कहीं कोई कार्य सम्पन्न करते हुए विविध आयु वर्ग के लोग काल कवलित हो जा रहे हैं। यह शारीरिक स्वास्थय में आए विकार के कारण होता है। मानसिक स्वास्थय में विकार आने पर कभी कभी स्थिति इतनी जटिल हो  जाती है कि शरीर अपनी क्षमता और उस पर विश्वास खो बैठता है। मानव जीवन को सुखमय व आनन्द युक्त करने हेतु मानसिक स्वास्थय परम आवश्यक है। इसके महत्त्व को निम्न बिन्दुओं के आधार पर विवेचित किया जा सकता है।

01 – सांवेगिक विकास में सहायक / Aids in emotional development

02 – व्यक्तित्त्व उन्नयन में सहायक / Aids in personality enhancement

03 – शारीरिक स्वास्थय उन्नयन में सहायक / Aids in improving physical health

04 – सामाजिक विकास उन्नयन / Social Development and Advancement

05 – सम्यक सामाजिक विकास / Proper social development

06 – नैतिक सबलता / Moral strength

07 – कलात्मक विकास / artistic development

08 – सम्यक सामञ्जस्य क्षमता अभिवृद्धि / Enhancement of Capacity for Proper Harmony

09 – जीवन के अभीप्सित की प्राप्ति / Attainment of life’s cherished goals

10 – सकारात्मक वातावरण का सृजन / Creation of a positive environment

11 – ज्ञानात्मक विकास / Cognitive Development

12 – आशातीत प्रगति / Remarkable Progress

वास्तव में मानसिक स्वास्थय वह आधार है जो प्रगति की रूपरेखा को पुष्पित पल्लवित करता है। लक्षण जब खराब मानसिक स्वास्थय के उभरने लगें तो हमें तुरन्त जागरूक व चौकन्ना रहते हुए अपनी भूमिका निर्वाहित करनी ही होगी जब सम्पूर्ण सामाजिक परिवेश में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई पड़ेगा तभी भारत 2047 तक विकसित हो सकेगा। असल में अच्छा मानसिक स्वास्थय और राष्ट्रीय उन्नयन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

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मनोविज्ञान

MENTAL HEALTH

October 11, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

मानसिक स्वास्थय

सामान्य रूप से मानसिक स्वास्थय को मानस के व्यवस्थित रूप से कार्य करने से लिया जाता है। मानसिक स्वास्थय समायोजन की वह प्रक्रिया है जिसमें निरन्तरता, सामंजस्य और समझौता को समाविष्ट कर जीवन को सकारात्मक दिशा की क्षमता विद्यमान है। मानसिक स्वास्थय जहाँ मानस की समग्रता की ओर इंगित करता है वहीं बहुत से विद्वतजन मानसिक स्वास्थय को सुखी, आनन्द पूर्वक जीवनयापन  का आधार मानते हैं।

मानसिक स्वास्थय की परिभाषाएं / Definitions of mental health –

मानसिक स्वास्थय की विशेषताओं के आधार पर इसकी विविध विमाओं के आधार पर इसे विवेचित किया जाता है। मानसिक स्वास्थय को विविध विद्वानों ने इस प्रकार पारिभाषित किया है।

जे ० ए ० हैडफील्ड महोदय का मानना है –

“सामान्य रूप से मानसिक स्वास्थय सम्पूर्ण व्यक्तित्व का सामंजस्य पूर्णता के साथ कार्य करना है।”

“In general, mental health is the harmonious functioning of the whole personality.”

Head Field, J.A , 1952, pp 1 -2   

एक अन्य प्रसिद्द विद्वान् कट्स एवं मोसले महोदय कहते हैं –

“मानसिक स्वास्थय वह योग्यता है जो हमें अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों में समायोजन करने में सहायक होती हैं।”

“Mental Health is the ability which helps us to seek adjustment in the difficult situations of our life.”

– Cuts & Mosale,1941,pp 4

के ० ए ० मिनिगर महोदय का मानना है –

“मानसिक स्वास्थय को मानव मात्र के एक दूसरे तथा दुनिया के साथ अधिक से अधिक प्रभावपूर्ण एवं आनन्द दायक समायोजन के रूप में पारिभाषित किया जा सकता है।”

“Let us define mental health as the adjustment of human beings to the world and to each other with a maximum of effectiveness and happiness.” – Minigar, K.A. 1967, p 46.

उक्त विविध परिभाषाओं से यह स्पष्ट हो जाता है कि मन की स्वस्थ दशा से युक्त व्यक्ति  मानसिक स्वास्थय का धनी कहा जाएगा। ऐसे व्यक्ति का व्यक्तित्व इस प्रकार का विकसित हो जाता है जो विविध जनों और अपने वातावरण के साथ संयमित, सन्तुलित  व सामंजस्य पूर्ण व्यवहार करने में समर्थ होता है।

 मानसिक स्वास्थय अवधारणा की विशेषताएं / Characteristics of the concept of mental health-

01 – शारीरिक स्वास्थय, मानसिक स्वास्थय का आधार / Physical health: the foundation of mental health. 

02 – कार्य कुशलता व मानसिक स्वास्थय / Work Efficiency and Mental Health

03 – नैतिकता और मानसिक स्वास्थय / Ethics and Mental Health

04 – सामाजिक सामन्जस्य और मानसिक स्वास्थय / Social Cohesion and Mental Health

05 – पूर्ण मानसिक स्वास्थ्य मिथ्या / The Myth of Perfect Mental Health

06 – आर्थिक परिक्षेत्र व मानसिक स्वास्थय / Economic sphere and mental health

07 – पारिवारिक जीवन और मानसिक स्वास्थय / Family life and mental health

08 – गतिशील धारणा है मानसिक स्वास्थय / Mental health is a dynamic concept

मानसिक स्वस्थ व्यक्ति की विशेषताएं / Characteristics of a mentally healthy person –

शरीर का स्वास्थय से युक्त होना वात, पित्त, कफ के सन्तुलन पर अवलम्बित होता है इसी प्रकार मानसिक स्वास्थय का प्रमुख आलम्ब है शारीरिक स्वास्थय। सामान्यतः मानसिक रूप से सशक्त व्यक्ति में निम्न विशेषताओं देखने को मिलते हैं।

01 – स्वास्थय के प्रति जागरूकता / Health awareness

02 – आत्म विश्वास व सकारात्मकता / Self-confidence and positivity

03 – लोच पूर्णता व सम्यक जीवन दर्शन / Flexibility and a balanced philosophy of life

04 – सामञ्जस्य क्षमता / Ability to adapt

05 – विवेक आधारित सहनशीलता / Tolerance based on discernment

06 – आत्म सम्मान के प्रति सचेष्ट / Conscious of self-respect

07 – स्वमूल्यांकन क्षमता / Self-assessment ability

08 – वातावरण व यथार्थ का सम्यक तालमेल / Proper coordination of environment and reality

09 – सांवेगिक परिपक्वता / Emotional Maturity

10 – नीर क्षीर विवेक युक्त निर्णयन / Discriminative judgment

मानसिक स्वास्थय वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है व्यक्ति के रूप में समस्त जीवनचर्या व राष्ट्र के रूप में यह प्रगति का प्रमुख कारक है। अतः इस पर ध्यान अपेक्षित है।

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वाह जिन्दगी !

क्या उद्देश्य ही पता नहीं है  ?

October 8, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

दुष्कर पथ है अजब है मौसम

मगर युवा तो उठा नहीं है।

दुरूह जग में चलो तो हरदम,

यह बात उनको पता नहीं है।

कहाँ जा रहे हो मेरे हरदम,

क्या उद्देश्य ही पता नहीं है ।01।

उदास चेहरा, हो क्यों गुमसुम,

क्या जीत का फल चखा नहीं है।

गरीब हो क्या या है हिम्मत कम,

हौसलों का घर, क्या दिखा नहीं है।   

कहाँ जा रहे हो मेरे हरदम,

क्या उद्देश्य ही पता नहीं है।02।  

युवा हो गर तुम क्यों है दिशा भ्रम,

वायु वेग भी क्या पता नहीं है ?

छलबल है प्रबल डगमग हैं कदम,

सफलता का कोई शॉर्ट कट नहीं है।        

कहाँ जा रहे हो मेरे हरदम,

क्या उद्देश्य ही पता नहीं है।03।

फलित हैं जो बन. विनत रहे हरदम,

ऐंठे हो जो तुम, विनम्रता पता नहीं है।

गरूर धन का क्यों दिखता हरदम,

सगा नहीं है धन, क्यों पता नहीं है।            

कहाँ जा रहे हो मेरे हरदम,

क्या उद्देश्य ही पता नहीं है ।04।

नशे में रहते तुम, सत्सङ्ग हुआ है कम,

सही गलत का अबतक पता नहीं है।

गर तुम हारोगे, खुद से ही हरदम,

घिरेगा तब तम,  कोई सगा नहीं है।                

कहाँ जा रहे हो मेरे हरदम,

क्या उद्देश्य ही पता नहीं है ।05।

          

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शिक्षा

PERFORMING ARTS IN EDUCATION

October 3, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

शिक्षा में निष्पादन कलाएं

आज यदि हमें प्राकृतिक सौन्दर्य प्रभावित करता है, पसन्द आता है तो इनके प्रतिरूप भी भाते हैं। वर्तमान काल खण्ड दृश्य कला, श्रव्य कला और इनके समन्वित रूप अर्थात श्रव्य दृश्य कला से प्रभावित है। आज अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर बहुत कुछ सकारात्मक व नकारात्मक परोसा जाता है। जो लोग यह अभिव्यक्तियाँ देते हैं उन्हें कलाकार कहा जाता है। गायक, सङ्गीतकार, विदूषक, नायिका, नायक, नर्तक, जादूगर, सर्कस में रिंग मास्टर और नाटक कार सभी अपनी कलाओं का प्रदर्शन करते हैं अर्थात अपनी कलाओं का निष्पादन करते हैं। इस कला को हम निष्पादन कला (Performing Art ) कहते हैं।

निष्पादन कला से आशय व परिभाषाएं / Meaning and Definitions of Performing Arts –

वास्तव में निष्पादन कला उस कला को कहा जाता है जिसमें कलाकार अपने शरीर मुख मंडल आवाज तथा भाव भंगिमाओं का प्रयोग करके दर्शकों के समक्ष सीधे अपनी कला का प्रदर्शन करता है। इसमें पार्श्व में कार्य कर रहे कलाकारों को शामिल किये बिना काम नहीं चल सकता क्यों कि वे भी निष्पादन कर रहे हैं और दिखाई देने वाला कलाकार भी उससे ताल मेल बैठाता है।  सम्बन्ध में विकिपीडिआ का मानना है कि –

” निष्पादन कला में पाँच मूल अवयव शामिल हैं कलाकार की उपस्थिति, समय, स्थान, शरीर और कलाकार और जनता के बीच सम्बन्ध।”

“Performance art comprises five fundamental elements: the artist’s presence, time, space, the body and the relationship between the artist and the audience.”

बिहार के लोक सेवा आयोग हेतु प्रयुक्त दृष्टि IAS की पुस्तक कला एवं संस्कृति के पृष्ठ 8 पर निष्पादन कला के सम्बन्ध में बताया गया –

“कला का वह रूप जो मुख्यतः दृश्य प्रकृति का होता है जैसे वास्तु कला, मूर्ती कला, चित्र कला, फोटो ग्राफी,वीडिओ ग्राफी इत्यादि।”

“That form of art which is primarily visual in nature—such as architecture, sculpture, painting, photography, Videography, etc.”

वर्तमान में हमें इसके विविध रूप परिलक्षित होते हैं।

निष्पादन कला के विविध प्रकार / Various forms of performing arts –

01 – नृत्य / Dance   

02 – रंग मंच / Theatre       

03 – जादू / Magic

04 – कठपुतली का खेल / Puppet Play

05 – गीत – सङ्गीत / Song Music

06 – नाटक / Drama

07 – सर्कस / Circus

08 – भाषण / Speech

09 – पार्श्व प्रस्तुति व प्रस्तुति / Background presentation and presentation

निष्पादन कला प्रबन्धन हेतु प्रमुख तत्व / Key Elements of Performing Arts Management –

01 – आत्मविश्वास व निष्ठा / Self-confidence and Dedication

02 – विद्युत व्यवस्था / Electrical System

03 – टीम की दक्षता / Team Efficiency

04 – व्यवधान निवृत्ति व्यवस्था / System for Handling Disruptions

05 – मेक अप कक्ष व ड्रेसिंग कक्ष की उत्तम व्यवस्था / Excellent arrangements for make-up and dressing rooms

06 – सम्यक परिधान / Appropriate attire

07 – तत्सम्बन्धी विविध कार्यों में सम्यक तालमेल / Proper coordination of related tasks

08 – समय प्रबन्धन / Time management

            सचमुच इस कला में असीम शक्ति छिपी है यह हँसते को रुला सकती है और रोते हुए को हंसा सकती है। प्रेरणा के सारे पायदान इसके माध्यम से चढ़े जा सकते हैं। अध्यापन कला या भाषण भी निष्पादन कला ही है।

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शिक्षा

Factors affecting teaching.

September 14, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

शिक्षण को प्रभावित करने वाले तथ्य / Factors affecting teaching

यह दुनियाँ है और निरन्तर परिवर्तनशील है। बदलती हुई इस दुनिया के शिक्षण को प्रभावित करने वाले कारक भी परिवर्तनशील हैं। सामान्यतः शिक्षण सूत्र, शिक्षण प्राविधि और शैक्षणिक रणनीति या व्यूह रचना को इसका प्रमुख कारक मन जाता है और ये भी ठीक है लेकिन बहुत से कारक शिक्षण को प्रभावित करते हैं जिन्हे हम इस प्रकार बिन्दुवत विवेचित कर सकते हैं। –

01 – विषय वस्तु का सम्यक ज्ञान / Thorough knowledge of the subject matter

02 – शैक्षणिक योग्यता / Educational qualifications

03 – विविध शैक्षणिक कौशलों का ज्ञान / Knowledge of various pedagogical skills

04 – शिक्षक प्रवृत्ति / Teacher Disposition 

05 – शिक्षण अभिरुचि / Teaching Aptitude

06 – अनुभव व प्रबन्धन / Experience and Management

07 – शिक्षक प्रबन्धन सम्बन्ध / Teacher-Management Relationship

08 – प्रभावशीलता / Effectiveness

09 – आर्थिक कारक / Economic factors

10 – विद्यालय प्रबन्धन / School management

11 – कक्षा-कक्ष स्थिति / Classroom situation

12 – मूल्य / Values

               

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शोध

ICT / सूचना और सम्प्रेषण तकनीकी

July 21, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

ICT

INFORMATION TECHNOLOGY

सूचना और सम्प्रेषण तकनीकी

आज का कालखण्ड अपनी हर सुबह का प्रारम्भ ICT से करता है और रात्रि तक इसके प्रभाव में रहता है। हम सब सूचना क्रान्ति के युग में जी रहे हैं मेल हो या मोबाइल के विविध ऍप सभी सूचना सम्प्रेषण में बखूबी अपना योग दान कर रहे हैं विविध टीवी चैनल प्रभावी ढंग से अपनी जगह बनाये हुए हैं। इस आपा धापी के समय में ICT से परिचित रहना परम आवश्यक है।

सूचना और सम्प्रेषण तकनीकी का अर्थ व परिभाषाएं / Meaning and Definitions of Information and Communication Technology –

वर्तमान समय में सूचनाएं विद्युत् गति से उड़ रही हैं और इस तीव्रता के पीछे काम करने वाली शक्ति है सम्प्रेषण तकनीकी। प्रसिद्द शिक्षाविद डॉ ० एस ० पी ० कुलश्रेष्ठ जी के ये भाव इस सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण हैं उन्होंने अपनी पुस्तक ‘शैक्षिक तकनीकी के मूल आधार’ में पृष्ठ 695 पर कहा –

“सूचना एवं सम्प्रेषण तकनीकी वह तकनीकी है जिसके द्वारा सूचनाओं को शुद्ध एवं प्रभावी रूप से प्राप्त करने, संग्रह करने,  प्रयोग करने, निरूपित करने तथा  स्थानान्तरण में सहायता होती है। इसका उद्देश्य प्रयोगकर्त्ता के ज्ञान, सम्प्रेषण कौशल, निर्णय क्षमता तथा समस्या समाधान क्षमता को बढ़ाना है। इस प्रकार ज्ञान को प्राप्त करने की क्रिया में सूचना एवं सम्प्रेषण दोनों ही आवश्यक हैं।”

इस सम्बन्ध में विविध परिभाषाओं को इस प्रकार क्रम दिया जा सकता है –

यूनेस्को (UNESCO) के अनुसार –

United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization-

“सूचना और संचार प्रौद्योगिकी ICT से तात्पर्य उन विभिन्न उपकरणों और प्लेटफार्मों से है, जो व्यक्तियों और समूहों के बीच सूचनाओं के आदान प्रदान और संचार को सुगम बनाते हैं।” 

“Information and Communication Technology (ICT) refers to the various tools and platforms that facilitate the exchange of information and communication between individuals and groups.”

गार्टनर / Gartner महोदय के अनुसार ICT है –

“जिसमें सभी संचार उपकरण, नेटवर्क, कम्प्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्ट वेयर तथा मिडिलवेयर शामिल होते हैं जो उपयोग कर्त्ताओं को सूचनाओं और ज्ञान के साथ एकीकृत करते हैं।”

“It encompasses all communication devices, networks, computer hardware, software, and middleware that integrate users with information and knowledge.”

प्रोफेसर टॉम डैल /Tom Del के अनुसार –

“ICT हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का वह संयोजन है जो डिजिटल प्रारूप में सूचना तक पहुँचने उसका विश्लेषण करने, उसे बनाने और प्रसारित करने में मदद करता है।”

“ICT is the combination of hardware and software that helps in accessing, analyzing, creating, and disseminating information in digital format.”

सूचना एवं सम्प्रेषण तकनीकी के लाभ व सीमाएं / Benefits and Limitations of Information and Communication Technology – –

आज बाजार वाद के इस युग में हमें विविध साधन इस कार्य में लगे हुए दिखाई पड़ते हैं यथा CD, DVD, पेन ड्राइव, चिप, डिजिटल वीडिओ कैमरा, LCD प्रोजेक्टर, पॉवर पौइंट सिम्युलेशन, ऑडियो वीडिओ कॉन्फ्रेंस, मेल, वर्ल्ड वाइड वेव www, डिजिटल लाइब्रेरी, आभासी कक्षा / वर्चुअल क्लास रूम्स कम्प्यूटर डाटा बेस, टेली विज़न, वीडिओ कार्ड, लैपटॉप, मल्टी मीडिया पर्सनल कम्प्यूटर आदि आदि।   

सूचना एवं सम्प्रेषण तकनीकी के लाभ / Benefits of Information and Communication Technology –

01 – आधुनिक ज्ञान आधारित समाज निर्माण / Building a modern knowledge-based society

02 – शिक्षक प्रशिक्षण में सहायक / Helpful in teacher training

03 – छात्र केन्द्रित अधिगम में सहायक / Facilitates student-centered learning

04 – शोध व शैक्षिक प्रशासन में सहायक / Assists in research and educational administration

05 – निर्देशन व परामर्श में सहायक / Helpful in guidance and counseling

06 – व्यक्तिगत क्षमता व ज्ञान वृद्धि में योग / Contributes to enhancing individual capabilities and knowledge

07 – नवीनतम ज्ञान प्राप्ति सम्भव / Enables the acquisition of the latest knowledge

08 – वैश्विक समस्या समाधान व सृजनात्मकता विकास में सहायक / Assists in solving global problems and fostering creativity

सूचना एवं सम्प्रेषण तकनीकी की सीमाएं / Limitations of Information and Communication Technology – –

01 – अनभिज्ञता व अरुचि / Ignorance and lack of interest 

02 – मिथ्या भय उत्पादक / Instills unfounded fear

03 – AI की विविध कमियां / Various limitations of AI

04 – शिक्षण कौशल विकास में असफल / Failure to develop teaching skills

05 – वित्तीय बोझ / Financial burden

06 – साधनों का अभाव / Lack of resources

07 – भारतीय परिस्थितियों में प्रतिकूल / Unsuitable for Indian conditions

08 – निम्न आय स्तर की वजह से पहुँच से बाहर / Out of reach due to low income levels

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काव्य

जेठ और जिन्दगी .

June 15, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

तपे धरा, अम्बर से ज्वाला

जेठ की यह दोपहरी।

हर दिशा में अग्नि सी है,

प्यास भी सिहरी सिहरी।

डोलती है धुल उड़ उड़

राह सूनी सी पड़ी है।

किन्तु संघर्षों के रथ पर

जिन्दगी फिर भी खड़ी है । 1 । 

अम्बर के अँगारों से फेनिल हाला,

आँधी, ताप से ताल तलैय्या बेहाला।

धूप का घूँघट उठाया जेठ ने,

पसीने से तरबतर है साँस आला।

भोर से धरती धधकती जोर से,

दहकते तेवरों से और लू के शोर से।

गलियों में खामोशियाँ बिखरी पड़ी हैं,

कर्मवीरों के समक्ष अद्भुत घड़ी है ।2।

साँस लूँ,साँस लूँ तो आग बरसे,

वो छाँव भी अब तो डरी है।

हारती ये कब प्रकृति है,

कर्म की क्रीड़ा, खरी है।

पुष्प मुरझाते नहीं बस,

धैर्य की पहचान करते।

आँधियों के शोर में भी,

मार्ग का निर्माण करते  । 3 ।          

उत्साह भरती शर्म  कणों की मेखला,

जिससे सुवासित है, ये अविरल धरा।

हौसलों ने बदल दी तसवीर जग की,

और तोड़ा धूल भरे, बदनों ने बन्धा।

तपिश ने पुस्तक में खुश्की बढ़ाई है,

हिम्मत भरे पगों की नव अंगड़ाई है।

मन में धूल से ज्यादा आँखों में गांव हैं,

ख़बरों में जलते ठाँव हैं, उठते पाँव हैं । 4 ।

मेहनत से श्रम कण बरसेगा,

सारी तपन वह हर लेगा।

बरसात भी आएगी एक दिन,

पानी मोती में बदलेगा।

बुलाती मन्जिल दूर से,

अमावस की छँटती रात है।

गरमी ये कह कर भागेगी,

बहुत तेज बरसात है । 5 ।

फिर शीत ऋतु लौट आएगी,

छंटेगी सघन ताप सारा।

सोने सा तपकर निकलेगा,

मानस का मनमीत प्यारा।

सूर्य की इन रश्मियों में,

है छुपी नव क्रान्ति की छवि।

यह तपस्या ही गढ़ेगी,

आगाज़ कर्म का देगा ये रवि । 6 ।

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वाह जिन्दगी !

तुमको मेरी याद आएगी।

June 8, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

जब प्रशिक्षण पूरा करके,

अपना मुकाम पा जाओगे।

जब चमकीले सपने तज के,

पथ यथार्थ का धा पाओगे।

तब, तुमको मेरी याद आएगी,

तुमको मेरी याद आएगी ।1।

उच्च शिक्षा का सपना गढ़ के,

जब परिवर्तन तुम लाओगे।

अपने बच्चों के संग मिल के,

दर्शन का पाठ पढ़ा पाओगे।

तब, तुमको मेरी याद आएगी।

तुमको मेरी याद आएगी ।2।

जब सैद्धान्तिक पन्ने पढ़ के,

तुम यथार्थ के घर जाओगे।

नवजीवन के रङ्ग ढंग लख के,

नव परिवर्तन जब लाओगे।

तब, तुमको मेरी याद आएगी।

तुमको मेरी याद आएगी ।3। 

मनोविज्ञान में सबकुछ पढ़ के,

मन से जब तुम जुड़ जाओगे।

शिक्षार्थी का नवचिन्तन पढ़ के,

जब स्वयं भी भरमा जाओगे।

तब, तुमको मेरी याद आएगी।

तुमको मेरी याद आएगी ।4।

कौशल तुम कक्षागत पढ़ के,

जब कुछ कहने को जाओगे।

नव परिवर्तन की ध्वनि सुन के,

जब बिल्कुल घबरा जाओगे। 

तब, तुमको मेरी याद आएगी।

तुमको मेरी याद आएगी ।5।

शिक्षण सूत्र तुम सारे पढ़ के,

उनका उपयोग न कर पाओगे।

इस दुनियाँ के यथार्थ तल पे,

खुद बदलोगे, बदल पाओगे।

तब, तुमको मेरी याद आएगी।

तुमको मेरी याद आएगी ।6।

शिक्षण तकनीकी से जुड़ करके,

जब युग परिवर्तन ले आओगे।      

समय के साथ कदमताल करके,

सब कुछ अधिगम कर पाओगे।

तब, तुमको मेरी याद आएगी।

तुमको मेरी याद आएगी ।7।

जो सीखा था वह ना पा करके,

खुद नव यथार्थ से जुड़ जाओगे।

इस दुनियाँ की परवाह न करके,

सब को सत्पथ पर ले आओगे।

तब, तुमको मेरी याद आएगी।

तुमको मेरी याद आएगी ।8।

अपने मनवा को दृढ़ कर के,

गर विसंगति से बच पाओगे।

सारे जग को दुश्मन कर के,

पथ के प्रदर्शक बन जाओगे।

तब, तुमको मेरी याद आएगी।

तुमको मेरी याद आएगी ।9।

भौतिक दुनियाँ में रह कर के,

जब अध्यात्म से जुड़ जाओगे।

जग की चका चौंध को तज के,

‘नाथ’ अध्यापक बन पाओगे।

तब, तुमको मेरी याद आएगी।

तुमको मेरी याद आएगी ।10।      

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काव्य

बलिदानों की अमिट कहानी। 

May 6, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

वक़्त की प्रस्तर शिला पर

हम लिखेंगे इक कहानी।

लोकतन्त्रीय देश भारत

न कोई राजा न कोई रानी।

भूखण्ड नहीं चेतन है भारत

बलिदानों की अमिट कहानी ।1।

पुष्प सा कोमल ह्रदय पर

फौलाद सी अपनी रवानी।

मन करे प्रभु की इबादत

जीवन हो मगर बलिदानी।

भूखण्ड नहीं चेतन है भारत

बलिदानों की अमिट कहानी ।2।

हे ईश्वर रक्षा करना पर

ऐसी ही है अपनी वानी।

कितनी भी करें खिलाफत

मरे नहीं आँखों का पानी। 

भूखण्ड नहीं चेतन है भारत

बलिदानों की अमिट कहानी ।3।

विश्वशान्ति की लौ मुखरित पर

आँधी अन्धड़ मन तूफानी।

बलिदानों की अपनी रवायत  

रक्त से गाढ़ा देश का पानी।                

भूखण्ड नहीं चेतन है भारत

बलिदानों की अमिट कहानी ।4।  

ज्वालामुखी मन में रहता पर

अधरों पर धीरज रघु वानी।

मर्यादा पर गर आई आफत       

धरा रूप मदमस्त तूफानी।

भूखण्ड नहीं चेतन है भारत

बलिदानों की अमिट कहानी ।5।

साक्ष्य हमारा सागर दिनकर

व्यर्थ नहीं अब तक कुर्बानी।

जो देश हित से करे बगावत

समझो नाथ वह ख़तम कहानी।

भूखण्ड नहीं चेतन है भारत

बलिदानों की अमिट कहानी  ।6।

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विविध

असफलता से सफलता की ओर

April 15, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

असफलता से सफलता की ओर / From failure to success

मानव जीवन का विकास क्रम अपने आप में शैशव अवस्था, बाल्य अवस्था, किशोर अवस्था, युवा अवस्था, प्रौढ़ अवस्था,और वृद्ध अवस्था को समेटे हुए है। इस क्रम में शैशव अवस्था, में हम अपने आप कुछ कर पाने की स्थिति नहीं होते लेकिन इसके उपरान्त हम चलना, बोलना, खेलना, पढ़ना, लिखना सभी प्रारम्भ करते हैं। इस समय का एक विशेष गुण होता है कि हम असफलताओं से घबराते नहीं, हारते नहीं हैं और अनवरत प्रयास कर सफलता की सीढ़ी चढ़ते हैं। ज़रा याद करें , चलना सीखने के क्रम में हम कितनी बार गिरे अन्ततः हमने चलना ही नहीं सीखा बल्कि दौड़ना भी सीख लिया। कई विद्वतजनों की धारणा है कि हमारी असफलता से जूझने की क्षमता में अवस्था के अनुसार क्रमिक ह्रास आता है कई इसे भी नहीं भी मानते। 

दृष्टिकोण परिवर्तन आवश्यक / Attitude change required –

असल में हमने अपने मानदण्ड, अपने दृष्टिकोण जो असफलता के सम्बन्ध में विकसित किये हैं दिशा भ्रम वहीं से शुरू हो जाता है जबकि प्रत्येक असफलता एक प्रकाश स्तम्भ है इससे हमें अपनी कमी का भान होता है। एक नया अनुभव प्राप्त होता है कार्य को अधिक कारगर तरीके से करने का दृष्टिकोण विकसित होता है। हम और अधिक सशक्त बनकर उभरते हैं। मानसिक रूप से सशक्त होकर कार्य को भली भाँति अन्जाम दे सकते हैं। असफलता को अन्तिम पायदान न समझकर मील का पत्थर और प्रेरक के रूप में स्वीकार करना होगा तभी हम असफलता को पीछे छोड़ और उसका आधार ले आगे बढ़ सकेंगे। यथार्थ में असफलता सच्चा अवलम्बन व सच्चा मार्गदर्शक है।

असफ़लता से मिलने वाली सम्यक दिशाएं / The right directions from failure –

असफलता से हमें दृढ़ आधार प्राप्त होता है कुछ ऐसे भी आधार हैं जो मानस में गहरे बैठ जाते हैं असफलता से हारने की जगह हमें उससे सीखना चाहिए। क्या क्या सीखा जा सकता है उनमें से कुछ को इस प्रकार कर्म दे सकते हैं।   

01 – परिपक्वता / Maturity

02 – सम्यक रणनीति / Appropriate Strategy

03 – लचीलापन / Flexibility

04 – सकारात्मकता /Positivity

05 – व्यक्तित्व पुनर्गठन /Personality Restructuring

06 – आत्म शक्ति सञ्चयन व विकास / Self power accumulation and development

राष्ट्र कवी मैथिली शरण गुप्त के भाव देखिये 

”नर हो, न निराश करो मन को

कुछ काम करो, कुछ काम करो

जग में रह कर कुछ नाम करो

यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो

समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो

कुछ तो उपयुक्त करो तन को

नर हो, न निराश करो मन को”

07 – जोखिम क्षमता वृद्धि / Increased risk appetite

राबर्ट एफ केनेडी ने कहा –

“केवल वे ही जो बड़ी विफलता का जोखिम उठाते हैं वे ही बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं।”

आँग्लअनुवाद

“Only those who risk great failure can achieve great success.”

08 – स्वमूल्याँकन / Self assessment

09 – मानसिक शक्ति का विकास /Development of mental strength

10 – सम्यक धैर्य सम्वर्धन / Proper patience development

हरिवंश राय बच्चन महोदय कहते हैं –

“असफलता एक चुनौती है स्वीकार करो

क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो

जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम

संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम

कुछ किये बिना ही जयजयकार नहीं होती

कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।“

विविध विद्वानों के असफलता सम्बन्धी उद्धरण / Quotes on failure from various scholars –

हेनरी फोर्ड महोदय कहते हैं –

“असफलता केवल फिर से शुरआत करने का एक अवसर है, इस बार अधिक समझदारी से”

आंग्ल अनुवाद

“Failure is simply an opportunity to begin again, this time more intelligently.”

नेपोलियन हिल

“हर असफलता, हर दिल टूटना, हर हार अपने साथ एक समान या उससे बड़े लाभ का बीज लेकर आती है।”

आंग्ल अनुवाद

“Every failure, every heartbreak, every defeat carries with it the seed of an equal or greater gain.”

जिम रोहन महोदय के अनुसार –

“सफलता कीसबसे बड़ी कुंजी यह है कि आप असफलता से न डरें।”

आंग्ल अनुवाद

“The biggest key to success is not to be afraid of failure.”

स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा –

“इन छोटी मोटी असफलताओं की परवाह मत करो; आदर्श को याद रखो, और अगर हज़ार बार भी असफल हो जाओ, तो एक बार फिर कोशिश करो।”

“Don’t worry about these small failures; remember the ideal, and even if you fail a thousand times, try again.” 

असफलता से सफलता की ओर बढाए जाने वाले कदम / Steps from failure to success –

01 – स्वस्थ आदतों का विकास / Developing Healthy Habits

02 – स्पष्ट लक्ष्य चयन / Clear Goal Selection

 03 – उद्देश्य के प्रति पूर्ण समर्पण / Complete Dedication to the Objective

04 – अनवरत परिश्रम / Continuous Hard Work

05 – कठोर स्व अनुशासन / Strict Self-Discipline

06 – सकारात्मक सोच / Positive thinking

07 – अनवरत क्षमता व कौशल विकास / Continuous capacity and skill development

08 – आशावादिता / Optimism

            रामानंद ‘दोषी’ जी के शब्द हमें हमारे स्वर्णिम इतिहास से प्रेरणा देते हुए हमारा आवाहन करते हुए कहते हैं –

आँधियों ने गोद में हमको खिलाया है न भूलो,

कंटकों ने सिर हमें सादर झुकाया है न भूलो,

सिन्धु का मथकर कलेजा हम सुधा भी शोध लाए,

औ‘ हमारे तेज से सूरज लजाया है न भूलो।

वे हमीं तो हैं कि इक हुंकार से यह भूमि कांपी,

वे हमीं तो हैं जिन्होंने तीन डग में सृष्टि नापी,

और वे भी हम कि जिनकी सभ्यता के विजय रथ की

धूल उड़ कर छोड़ आई छाप अपनी विश्वव्यापी।

वक्र हो आई भृकुटी तो ये अचल नागराज डोले,

दश दिशाओं के सकल दिक्पाल ये गजराज डोले,

डोल उट्ठी है धरा, अम्बर, भुवन, नक्षत्र-मंडल,

ढीठ अत्याचारियों के अहंकारी ताज डोले।

सुयश की प्रस्तर-शिला पर चिह्न गहरे हैं हमारे,

ज्ञान-शिखरों पर धवल ध्वज-चिन्ह हैं लहरे हमारे,

वेग जिनका यों कि जैसे काल की अंगड़ाइयाँ हों,

उन तरंगों में निडर जलयान ठहरे हैं हमारे।

मस्त योगी हैं कि हम सुख देखकर सबका सुखी हैं,

कुछ अजब मन है कि हम दुख देखकर सबका दुखी हैं,

तुम हमारी चोटियों की बर्फ़ को यो मत कुरेदो,

दहकता लावा हृदय में है कि हम ज्वालामुखी हैं।

लास्य भी हमने किए हैं और तांडव भी किए हैं,

वंश मीरा और शिव के, विष पिया है औ‘ जिए हैं,

दूध माँ का, या कि चन्दन, या कि केसर जो समझ लो,

यह हमारे देश की रज है कि हम इसके लिए हैं।

आशा ही नहीं विश्वास है कि असफलता को हम सब एक चुनौती की तरह लेंगे और कभी हार न मानने का खुद में जज्बा पैदा करेंगे और दूसरों में भी उत्साह का संचरण करेंगे। तभी हम बढ़ पाएंगे – ‘असफलता से सफलता की ओर’

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