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काव्य

स्वतन्त्रता दिवस

August 14, 2025 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

स्वतन्त्रता दिवस

स्वतन्त्रता दिवस पर ये मेले चल रहे हैं

तुम भी मचल रहे हो हम भी मचल रहे हैं

हमको बदल दिया है संस्था के बन्धनों ने

जज्बात पूर्वजों के मुख से निकल रहे हैं ।1।

स्वतन्त्रता दिवस है जज्बे उछल रहे हैं ।

स्वतन्त्रता दिवस है जज्बे उछल रहे हैं ।।   

बलिदानियों की गाथा भारतीय सुन रहे हैं

कुछ सुन के गुन रहे हैं कुछ बहस कर रहे हैं

बलि ने बदल दिया है न बदला वन्दनों ने

कृतज्ञ हिन्दुस्तान  स्वर निकल रहे हैं। ।2।

स्वतन्त्रता दिवस है जज्बे उछल रहे हैं ।

स्वतन्त्रता दिवस है जज्बे उछल रहे हैं ।।   

जो दे गए हो लड़के सो दिल धड़क रहे हैं

वन्दन है आप सब का शोले भड़क रहे हैं

हमको व्यथित किया है भटकों ने क्रन्दनों ने

तुम सब समझ रहे हो,हम भी समझ रहे हैं। ।3।

स्वतन्त्रता दिवस है जज्बे उछल रहे हैं ।

स्वतन्त्रता दिवस है जज्बे उछल रहे हैं ।।   

अब सुन लो देश मेरा हर क्षण बदल रहा है

कुछ चल रहे हैं चालें हम हुंकार भर रहे हैं

करना तुम क्रान्ति पूजा जगाया है बंधनों ने

यह शीश है वतन का हम ले के चल रहे हैं।।4।

स्वतन्त्रता दिवस है जज्बे उछल रहे हैं ।   

स्वतन्त्रता दिवस है जज्बे उछल रहे हैं ।।   

हैं चन्द देश – द्रोही, अवरोध बन रहे हैं

जय चन्द जो बने हैं, हम वो मसल रहे हैं

बदलो न अपने तेवर जो दिए अभिनंदनों ने

‘नाथ’ क्रान्ति लौ जलाओ शोले दहक रहे हैं। ।5।

स्वतन्त्रता दिवस है जज्बे उछल रहे हैं ।

स्वतन्त्रता दिवस है जज्बे उछल रहे हैं ।।   

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विविध

रक्षा बन्धन

August 8, 2025 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

रक्षा बन्धन

सन् 2025 में वैदिक पञ्चाङ्ग के अनुसार 09 अगस्त को रक्षा बन्धन पर्व मनाया जाएगा। श्रावण माह की पूर्णिमा 08 अगस्त को दोपहर 12 बजे से शुरू होगी और 09 अगस्त को अपरान्ह एक बजकर चौबीस मिनट पर समाप्त होगी।

रक्षा बन्धन पर्व का प्रारम्भ –

प्राचीन लोकप्रिय कथाओं में वर्णन मिलता है कि द्रोपदी ने भगवान् कृष्ण की घायल हो चुकी अँगुली पर अपनी साड़ी की एक चीयर बाँध दी। मातृ शक्ति द्रौपदी के इस भाव व्यवहार से प्रभावित होकर सोलह कला सम्पूर्ण भगवान् श्री कृष्ण ने उनकी रक्षा का वचन दिया और निर्वहन किया। इसी समय से इस परम्परा का प्रारम्भ हुआ।

दुर्लभ महा संयोग –

इस बार रक्षा बन्धन पर भद्रा का साया नहीं है। और 95 वर्ष के उपरान्त सौभाग्य योग के साथ अन्य कई मङ्गलमई योग बन रहे हैं। इसलिए इसे विशेष शुभ मन जा रहा है। इस बार रक्षा बन्धन को उत्तम मानने का एक कारण यह भी है कि इस दिन श्रवण नक्षत्र होगा चन्द्रमा मकर राशि में होंगे जिसके स्वामी भी शनि हैं अतः त्रियोग (श्रवण + शनिवार + शनि ) अत्यन्त लाभकारी व शुभ बन पड़ेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग व द्वि पुष्कर योग का भी निर्माण हो रहा है। धनिष्ठा नक्षत्र के साथ सौभाग्य योग व शोभन योग का शुभ संयोग भी देखने को मिलेगा। निश्चित समयावधि में राखी बाँधने व लक्ष्मी नारायण की उपासना करने से साधक को विशिष्ट अक्षय फल की प्राप्ति होगी तथा घर में खुशहाली, समृद्धि और सुख की वृद्धि होगी।

राखी बाँधने के परम्परागत नियम –

हर साल श्रावण माह की पूर्णिमा को यह भाई बहन का पावस पर्व रक्षा बंधन मनाया जाता है तिथि का प्रारम्भ होने पर जिस दिन सूर्योदय होता है उस दिन उड़ाया तिथि के अनुसार यह पर्व भी मनायेंगे। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान ध्यान व भगवान् को राखी अर्पित करने के बाद इसे परम्परागत रूप से मनाने के लिए कुछ नियमों का परिपालन करना शुभ स्वीकार किया जाता है।

01 – बहिन भाई की दाहिनी कलाई पर पावस कच्चे धागे को बाँधती है और सामान्यतः इसमें तीन गाँठें लगाना शुभ माना जाता है प्रथम गाँठ लगाते समय भाई की लम्बी उम्र ,द्वित्तीय गाँठ लगाते समय स्वयं अपनी लम्बी उम्र व तृतीय गाँठ लगाते समय रिश्तों में दीर्घकालिक मिठास की कामना की जाती है।

02 – तिलक लगाने  के सम्बन्ध में नियम यह है कि अनामिका अँगुली से ललाट पर शुभ तिलक लगाने के उपरान्त उसे अंगूठे से ऊँचा किया जाता है तत्पश्चात अक्षत लगाकर भाई की दीर्घायु की कामना बहिन करती है जीवन में मिठास घुली रहे यह मानकर मिष्ठान्न से भाई का मुँह मीठा कराती है इसके बाद भाई अपनी क्षमतानुसार बहिन को उपहार प्रदान करते हैं। 

03 – दिशा के सम्बन्ध में कहा जाता है कि रक्षा सूत्र बांधते समय बहिन का मुख पश्चिम की और होना शुभ स्वीकार किया जाता है जबकि भाई का मुख यदि उत्तरपूर्व की और रहे तो यह सम्यक व शुभ स्वीकार किया जाता है। बहुत से घरों में दिशा सम्बन्धी नियमों को दृढ़ता से परिपालन सुनिश्चित किया जाता है।

04 – देशी घी के दीपक से भ्राता की आरती का भी विधान है अन्त में छोटी बहने बड़े भाई से आशीष की कामना करती हैं और छोटे भाइयों को बड़ी बहनों से आशीष लेना चाहिए।

(कुछ स्थानों पर क्रिया विधि व विश्वासों में अंतर भी होता है )

ब्राह्मण देवता द्वारा अपने यजमानों को रक्षा सूत्र बांधते समय इस मन्त्र का उच्चारण सामान्यतः किया जाता है –

ऊँ  “येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल।।”

 इसका आशय है कि जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवों के राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुम्हें बांधता हूं, हे रक्षे! तुम चलायमान न हो, चलायमान न हो।

आप सभी को रक्षा बंधन का पावन पर्व शुभ हो जीवन में मङ्गल ही मङ्गल हो। यही पावस शुभेक्षा है।

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विविध

तुलसी लौट आएंगी।

August 3, 2025 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

Tulsi will return.

भारत अपने आध्यात्मिक धरातल पर खड़ा है यहाँ जिससे भी हमें कुछ प्राप्त होता है उसके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना परमावश्यक मानते हैं। इसी क्रम में भारतीय संस्कृति तुलसी को पावन मानती है और इसका वन्दन करती है यह जहाँ हम भारतीयों द्वारा पूजित होती है वहीं भारतीय इसके आध्यात्मिक महत्त्व व औषधीय गुणों से भी परिचित हैं। इसे दन्त रोग, खाँसी, जुकाम, सर्दी,श्वाँस सम्बन्धी रोग व आन्तरिक ऊर्जा वृद्धि हेतु उपयोगी माना जाता है।

तुलसी की विविध प्रजातियाँ / Various varieties of basil – हमारे यहाँ मुख्य रूप से रामा तुलसी और श्यामा तुलसी को लोग अच्छी तरह जानते हैं, रामा तुलसी को ही श्री तुलसी भी कहा जाता है इसकी पत्तियां हरी होती हैं जबकि श्यामा तुलसी की पत्तियाँ श्याम वर्ण की जिसमें बैंगनी रंग की आभा दीखती है। वास्तव में ये दोनों ही ऑसीमम सैक्टम के अन्तर्गत आती हैं इसे भारत में पावस स्वीकारते हैं। कुछ सामान्य प्रजातियों को इस प्रकार क्रम दिया जा सकता है –

01 – ऑसीमम ग्रेटिसिकम ( वन तुलसी या अरण्य तुलसी )

02 – ऑसीमम अमेरिकम ( काली तुलसी )

03 – ऑसीमम किलिमण्डचेरिकम ( कपूर तुलसी)

04 – ऑसीमम वैसिलिकम (मरुआ तुलसी)

05 – ऑसीमम वेसिलिकम मिनिमम

06 – ऑसीमम विरिडी

07 – ऑसीमम सैक्टम  

विकीपीडिया के अनुसार –

ऑसीमम सैक्टम  एक द्विबीजपत्रीय तथा शाकीय औषधीय पौधा है। तुलसी का पौधा हिन्दू धर्म में पवित्र माना जाता है और लोग इसे अपने घर के आँगन या दरवाजे पर या बाग़ में लगाते हैं।

तुलसी का महत्त्व या लाभ / Importance or benefits of Tulsi –

कुछ वनस्पतियाँ ऐसी हैं जिनका वर्णन प्रकृति की अनूठी क्षमता व ममता को व्ययाख्यायित करता मालूम होता है। ऐसी ही दिव्य कीर्ति से युक्त है तुलसी।

इससे मानव को मिलने वाले कुछ लाभों को यहाँ एक ख़ास क्रम में वर्णित करने का प्रयास कर रहा हूँ  –

01 – रोग प्रति रोधक क्षमता वृद्धि / Increases immunity

02 – चोट लगने पर / In case of injury

03 – जलन से निजात हेतु / For relief from irritation

04 – तनाव में कमी हेतु / For reduction in stress

05 – सर्दी जुकाम में / In case of cold and cough

06 – बुखार हेतु / For fever

07 – ध्यान संकेन्द्रण में /For meditation concentration

08 – चरणामृत या प्रसाद हेतु / For charanamrit or prasad

09 – ऊर्जा हेतु हर्बल चाय हेतु / For herbal tea for energy

10 – मोबाइल विकिरण रोकथाम / Mobile radiation prevention

11 – एलोपैथी, यूनानी, होम्योपैथी में विविध औषधि निर्माण /   

         Manufacture of various medicines in Allopathy, Unani and Homeopathy –

12 – मृत्यु के समय / At the time of death

            असल में तुलसी में खनिज और विटामिन की प्रचुर मात्रा है इसमें कैल्शियम, जिंक, विटामिन C , क्लोरोफिल और आयरन मिलता है इसके अतिरिक्त इसमें सिट्रिक एसिड, टारटरिक व मैलिक एसिड भी मिलता है। जो विविध रोगों के निवारण हेतु उपयोगी है।

स्थापन स्थल / Installation site –

सामान्यतः यह घर के आँगन में विराजित होता था लेकिन आजकल घरों का स्वरुप बदलने से इसे बालकनी या उसकी खिड़की पर भी लगाया जा सकता है घर के दरवाजे पर भी इसे लगाते हैं। इसे पर्याप्त धुप हवा मिले इसलिए इसे पूर्वाभिमुख करना अच्छा रहता है। इसे नियमित जल व स्वच्छता की आवश्यकता होती है इसे दक्षिण दिशा, अँधेरे स्थल या बेसमेन्ट में नहीं लगाना चाहिए। जहाँ इसे पूर्व में शुभ मानते हैं वहीं ईशान कोण भी स्थापन हेतु शुभ है उत्तर दिशा इस हेतु धन व समृद्धि की दिशा के रूप में स्वीकारी जाती है। इसे एक या विषम संख्यात्मक मान में लगाएं।

उपहार स्वरुप प्रदत्तीकरण / presentation as a gift –

इसको दूसरों को लगाने हेतु देना भी शुभ लक्षण है। रविवार और एकादशी को इसे देना उचित नहीं माना जाता। घर की तुलसी नहीं देनी चाहिए नया पौधा सम्यक व्यक्ति को देना उचित माना जाता है। आपके द्वारा किसी को तुलसी देना उसके प्रति आपके सम्मान व स्नेह का सूचक है। यह ऊर्जा का वाहक है और लेने वाले के यहॉँ समृद्धि लाता है।

सीमित समय में अति विशिष्ट तुलसी चर्चा दुष्कर है फिर भी यह कहना समीचीन होगा कि भगवान् विष्णु को प्रिय यह पौधा माँ लक्ष्मी का ही एक स्वरुप है जिस घर में यह हरा भरा रहता है यह उनके सौभाग्य व समृद्धि का सूचक है। माँ लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहे अतः सही स्थल पर सम्यक रूप से अपने यहां इसका स्थापन कर लाभ उठायें। यदि आप सम्यक रूप से गमले में इसे लगाएंगे व इनका यथेष्ट ध्यान रखेंगे तो तुलसी लौट आएंगी।

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