परिवारों,व्यक्तियों,और अन्य स्तर के लोग जब समाज के एक वर्ग से दूसरे वर्ग में गति करते हैं तो इसे सामाजिक गतिशीलता कहते हैं इससे उसकी सामाजिक स्थिति में बदलाव हो जाता है। अर्थात एक सामाजिक स्थिति से दूसरी सामाजिक स्थिति को प्राप्त करना सामाजिक गतिशीलता कही जाती है।

मिलर और वूक के शब्दों में –

“व्यक्तियों अथवा समूह का एक सामाजिक  दूसरे  संचलन होना ही सामाजिक गतिशीलता है।”

“Social mobility is a movement of individuals or group from one social class stratum to another.”

पी ०सोरोकिन महोदय के अनुसार –

“समाजिक गतिशीलता का अर्थ समाजिक समूहों एवं सामाजिक स्तरों में किसी व्यक्ति का एक सामाजिक स्थिति से दूसरी सामाजिक स्थिति में पहुँच जाना है।

By social mobility is meant any transition of an individual from one social position to another in constellation of social group and strata.”

कार्टर वी गुड के अनुसार –

सामाजिक गतिशीलता का अर्थ है -व्यक्ति या मूल्य का एक समाजीक स्थिति से दूसरी समाजिक स्थिति में परिवर्तन।

“Social mobility is the change of person or value from one social position to another.”

समाजिक गतिशीलता, शैक्षिक विकास के सम्बन्ध में  Social mobility in reference to educational development-

सामाजिक गतिशीलता और शैक्षिक विकास आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए पहलू हैं जहां शिक्षा सामाजिक गतिशीलता में प्रभावी वृद्धि करती है वहीं सामाजिक गतिशीलता के फलस्वरूप यह ज्ञात होता है की शिक्षा में इस हेतु कौन से सुधार आवश्यक हैं यह अन्योनाश्रित गुण इनकी वर्तमान में उपादेयता परिलक्षित करता है। शैक्षिक विकास द्वारा सामाजिक गतिशीलता की वृद्धि इन बिंदुओं द्वारा दर्शाई जा सकती है। –

1 – विद्यालय की प्रभावी भूमिका –

वस्तुतः जिस शिक्षा के आधार पर सामाजिक स्थिति में परिवर्तन होता है वह विद्यालयों की देन है कार्ल वीनवर्ग के शब्दों में –

“विद्यालय का प्रमुख कार्य, नवीन मार्ग प्रशस्त करना तथा इनमें सभी को स्थान देना है जिससे वह सामाजिक गतिशीलता के बदलते हुए ढाँचे के साथ कदम मिला सके। विद्यालय इस कार्य को तभी पूरा कर सकता है जब वह सभी प्रकार के आर्थिक स्तरों के बालकों को अपनी उन्नति के लिए व्यापक अवसर प्रदान करेगा।”

“The function of the school in keeping pace with the changing structure of social mobility has been to open channels and keep them open. This is accomplished by providing widespread opportunities to children of all economic statutes to advance their position.”

2 – औपचारिक शिक्षा, सामाजिक गतिशीलता का अधिक प्रभावी साधन –

यह निर्विवाद सत्य है की बहुत से शैक्षिक संवर्धन के साधन अस्तित्व में हैं लेकिन औपचारिक शिक्षा इस गतिशीलता का सशक्त साधन है  मिलर और वूक लिखते हैं –

“औपचारिक शिक्षा, सामाजिक गतिशीलता से प्रत्यक्ष रूप में तथा कारणतः सम्बन्धित है। इस सम्बन्ध को सामान्यतः इस रूप में समझा जाता है की शिक्षा स्वयं शीर्षात्मक सामाजिक गतिशीलता का एक प्रमुख कारण है। ”

“Formal education is directly and causally related to social mobility. Than relationship is generally understood to be one in which formal education itself is a cause or one of the causes of vertical social mobility.”

3 – सार्वभौम अनिवार्य शिक्षा दृष्टिकोण –

शासन का यह दृष्टिकोण भी गतिशीलता की वृद्धि में सहायक है क्योंकि एक स्तर तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद शिक्षा के सम्बन्ध में परिपक़्व दृष्टिकोण विकसित हो जाता है। भारत जैसे देश में जहां बेटे और बेटियों के प्रति दृष्टिकोण में भिन्नता देखने को मिल जाती है वहां इस व्यवस्था से बेटे और बेटियां दोनों लाभान्वित हो रहे हैं और पारिवारिक प्रगति का आधार बन रहे हैं।

4 – विविध पाठ्यक्रम

5 – प्रशिक्षण व व्यावसायिक पाठ्यक्रम

6 – वैज्ञानिक, तकनीकी व शोधपरक शिक्षा

7 – शैक्षिक अवसरों की यथार्थ समानता

8 – शिक्षक और सामाजिक गतिशीलता

            अन्ततः यह कहा जा सकता है कि किसी भी देश की प्रगति उसके यहाँ होने वाले सामाजिक उन्नयन या सामाजिक गतिशीलता पर निर्भर है और निः सन्देह शिक्षा का इस क्षेत्र में महत्त्व पूर्ण योगदान है और रहेगा लेकिन इसका अभाव पतन की कहानी लिखेगा नयी शिक्षा नीति भी अध्यापकों के साथ यदि न्याय हेतु अपने को तैयार नहीं कर पाई तो वांछित परिणाम नहीं मिलेंगे।

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