प्रभाव कारक

काल चक्र परिभ्रमण के साथ पत्रिकाओं का अस्तित्व हमेशा से रहा है और रहेगा। विविध जर्नल में से कोई जर्नल प्रतिष्ठित की श्रेणी में आता है तो उसका आधार बनता है इम्पैक्ट फैक्टर (IMPECT FACTOR) . यह एक तरह से उस जर्नल की प्रभाव और प्रतिष्ठा की माप है। इससे यह ज्ञात होता है कि इसमें उपस्थित लेखों को कितनी बार उद्धृत किया गया है।इम्पैक्ट फैक्टर (IMPACT FACTOR) की गणना/ Calculation of IMPACT FACTOR

 – इसकी गणना के माध्यम से जर्नल की सापेक्षिक गुणवत्ता व महत्त्व को प्रदर्शित किया जाता है इसकी गणना एक निर्धारित वर्ष में जर्नल में प्रकाशित लेखों को पिछले दो वर्षों में उद्धृत किये जाने वाले औसत अंक के रूप में जो संख्या प्राप्त होती है उसे उसका इम्पेक्ट फैक्टर कहा जाता है।

उदाहरण के लिए यदि किसी जर्नल का 2024 का इम्पैक्ट फैक्टर 3.0 है, तो इसका मतलब है 2022 और 2023 में पब्लिश्ड लेखों को 2024 में औसतन 3 बार उद्धृत किया गया। यहाँ यह जानना भी आवश्यक है कि इम्पैक्ट फैक्टर की गणना सामान्यतः जॉर्नल साइटेशन रिपोर्ट (JSR) में प्रकाशित की जाती है।

इम्पैक्ट फैक्टर (IMPACT FACTOR) का महत्त्व/ Importance of IMPACT FACTOR,  –

01 – श्रम साध्य लेखन को दिशा / Direction for laborious writing

02 – जर्नल हेतु उपयुक्त मानक / Appropriate standards for the journal

03 – प्रकाशकों को दिशा बोध / Direction for publishers

04 – जर्नल को प्रसिद्धि / fame to the journal

05 – नए शोध कर्त्ताओं को प्रेरणा / Inspiration to new researchers

06 – लेखकों की मान्यता स्थापन / Establishment of recognition of authors

07 – अभिप्रेरक /Motivator

इम्पैक्ट फैक्टर (IMPACT FACTOR) की सीमाएं/ Limitations of IMPACT FACTOR,  

01 – समग्र प्रभाव का आकलन /Assessment of overall impact

02 – व्यक्तिगत लेखों की गुणवत्ता आकलन में विफल / Fails to assess the quality of individual articles

03 – बेईमानी को प्रश्रय / Encouraging dishonesty

04 – शोध मूल्यांकन हेतु इस पर आश्रय उचित नहीं / It is not appropriate to rely on it for research evaluation

05 – पक्षपात पूर्ण /Biased

अन्ततः यह स्वीकार किया जा सकता है कि यह एक महत्त्वपूर्ण मानक है लेकिन केवल इसी पर निर्भरता उचित नहीं। अतः शोध मूल्यांकन में इसे मात्र मानदण्ड न माना जाए।

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