होली आई है, आई है, होली आई है,
मौसमे -फाग में कैसी मस्ती छाई है,
रँगों ने, आज फिर से ली अँगड़ाई है,
बृजवाली राधा, कृष्णा की परछाई है।
आज जीवन में फिर मस्ती छाई है,
बिछुड़ों की याद फिर से आई है ।01।
होली जीवन में नव-जीवन लाई है,
आई है आई है होली फिर आई है,
संग पापड़, गुझिया, मीठा लाई है,
होली के पकवानों ने धूम मचाई है।
आज जीवन में फिर मस्ती छाई है,
बिछुड़ों की याद फिर से आई है ।02।
नव रँगों ने अद्भुत छटा बिखराई है,
टेसू पलाश फूलों ने कसम निभाई है,
प्रकृति ने पुरातन रीति ही दोहराई है,
कान्हा, देखो जी देखो होली आई है।
आज जीवन में फिर मस्ती छाई है,
बिछुड़ों की याद फिर से आई है ।03।
जोगीरा, सर रर ने धूम मचाई है,
गीता भौजी ने मन से होली गाई है,
आज मस्ती में लोग और लुगाई हैं,
लेकिन नयनों की झील भर आई है।
आज जीवन में फिर मस्ती छाई है,
बिछुड़ों की याद फिर से आई है ।04।
जनगणमन मानस खुशी समाई है,
माँ सीता संग होली खेलें रघुराई है,
सारे तीर्थ राजों ने होली मनाई है ,
रंग से सरोबारों ने ली अँगड़ाई है।
आज जीवन में फिर मस्ती छाई है,
बिछुड़ों की याद फिर से आई है ।05।
अरे पूरब से पुरबा हवा, आई है,
फाग ने फगुआ छटा दिखलाई है,
पिचकारी ने रंगीन फिज़ा दिखाई है,
नन्ही बिटिया गुलाल संग धाई है।
आज जीवन में फिर मस्ती छाई है,
बिछुड़ों की याद फिर से आई है ।06।
होली आई है, आई है, होली आई है
आई है,आई है,आई है,होली आई है,
आज जीवन में फिर मस्ती छाई है,
बिछुड़ों की याद फिर से आई है।

