जिसमें हो सुकून वही राह ढूँढते हैं,
जो भी हो पसन्द वो खुशबू सूँघते हैं,
सम्बन्धों की खैर तो छोड़िए ज़नाब,
वो हमें औ हम उन्हें कहाँ पूछते हैं ?
जिसमें हो सुकून वही राह ढूँढते हैं,
जो भी हो पसन्द वो खुशबू सूँघते हैं,
सम्बन्धों की खैर तो छोड़िए ज़नाब,
वो हमें औ हम उन्हें कहाँ पूछते हैं ?
