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मनोविज्ञान

Maladjustment

February 24, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

कुसमायोजन (Maladjustment)

आज की दुनियाँ में यह देखने को मिलता है कि कोई व्यक्ति अपने सामंजस्य पूर्ण व्यवहार से अधिकाँश लोगों के साथ तालमेल बैठा लेता है और कोई नहीं। जब कोई भी व्यक्ति समाज की अपेक्षाओं, विविध परिस्थितियोँ और वातावरण के साथ ताल मेल नहीं बैठा पाता तो उसे  कुसमायोजित व्यक्ति कहा जाता है और इस व्यवहार को  कुसमायोजन कहा जाता है। कुसमायोजन की स्थिति में सन्तुलन बिगड़ जाता है आवश्यकतानुसार व्यवहार दिखाई नहीं पड़ता।

कुसमायोजन (Maladjustment) से आशय –

कुसमायोजन (Maladjustment) एक तरह की व्यवहारिक व मानसिक स्थिति है, जिसमें प्रभावित मानव अपने वातावरण, परिस्थितियों व स्वयं के साथ प्रभावी ढंग से सामन्जस्य  बैठाने में असफल रहता है। इसके सामान्यतः तनाव, अवसाद, चिन्ता, अत्याधिक क्रोध, सामाजिक अलगाव, अल्प आत्मविश्वास व हीन भावना का मानव व्यक्तित्व में प्रभाव बढ़ जाता है।

कुसमायोजन की परिभाषायें–

क्रो एवं क्रो महोदय ने इस सम्बन्ध में कहा –

 “कुसमायोजन (Maladjustment) तब होता है जब व्यक्ति की आवश्यकताओं और उसकी संतुष्टि से संबंधित परिस्थितियों के बीच कोई संबंध नहीं रह जाता है।”

 आंग्ल अनुवाद                                                        

“Maladjustment occurs when there is a disconnect between the individual’s needs and the circumstances that satisfy them.”    -Crow and Crow

Dictionary.com के अनुसार –

 “कुसमायोजन अपने परिवेश की मांगों पर सफलतापूर्वक और संतोषजनक ढंग से प्रतिक्रिया करने में असमर्थता है”।

 आंग्ल अनुवाद –“Maladjustment is the inability to respond successfully and satisfactorily to the demands of one’s environment”.

मनोवैज्ञानिक शब्दकोश (Psychological Dictionary) के अनुसार:

 “कुसमायोजन एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति वातावरण या जीवन की माँगों के साथ तालमेल बिठाने में विफल रहता है।”

“Maladjustment is a condition in which a person fails to cope with the demands of the environment or life.”

विविध मनोवैज्ञानिकों का विचार है कि –

 कुसमायोजन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने व्यवहार को सामाजिक या व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार समायोजित नहीं कर पाता है।

उक्त विवेचन के आधार पर इस व्यावहारिक परिभाषा को स्वीकार किया जा सकता है –

यह वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति की आवश्यकताओं और वातावरण के बीच सामंजस्य नहीं बन पाता, और वह अजीब या संघर्षपूर्ण व्यवहार करने लगता है।

कुसमायोजन के कारण/Causes of maladjustment – 

मानव के कुसमायोजित होने के पीछे बहुत से कारण हैं उनमें से प्रमुख कारणों को इस प्रकार क्रम दिया जा सकता है।

01 – पारिवारिक वातावरण।Family environment.

02 – शारीरिक कारण।/Physical reasons.

03 – मानसिक कारण। /Mental reasons.

04 – सामाजिक कारण।/ Social reasons

05 – आर्थिक कारण ।/ .Economic reasons

06 – निराशाजन्य अनुभव।/Depressing experiences.

07 – व्यक्तिगत कारण/ Personal reasons.

08 – क्षेत्र विशेष के कारण / Reasons specific to the area

09 – शैक्षणिक कारण / Educational reasons

कुसमायोजन का निदान व उपचार (Diagnosis & Remedies of Maladjustment) /  Diagnosis and treatment of maladjustment –

कुसमायोजित व्यक्ति को स्वस्थ जीवन में वापस लाने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

01 – सम्यक प्रेरणा व निर्देशन /Proper motivation and guidance

02 – प्रेमपूर्ण और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार / Loving and compassionate behavior

03 – सकारात्मक वातावरण / Positive environment

04 – परामर्श (Counseling)

05 – स्वस्थ वातावरण / Healthy environment

06 – रुचि के अनुसार कार्य / Work according to interests

07 – मानसिक चिकित्सा / Psychiatric therapy

08 – शारीरिक चिकित्सा / Physical therapy

09 – सामंजस्य शक्ति विकास कार्यक्रम / Cohesion development program

10 – सामाजिक कौशल विकास / Social skills development

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विविध

DIGITAL ARREST

February 22, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

डिजिटल अरेस्ट  

आज की भागम भाग की जिन्दगी में ढेरों बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आदमी मशीन होता जा रहा है। जेब में बिना पैसे रखे भी सीधे अपने खाते से भारी भरकम  रकम खर्च की जा सकती है। जहाँ लम्बी लम्बी लाइनों के जञ्जाल से मुक्ति मिली है लेन देन सरल हुआ है। वही कंगाल होने के भी खतरे बढ़ गए हैं। बिना आपके घर में साक्षात् घुसे भी आपको  लूटा  सकता है उसी का  एक तरीका है – डिजिटल अरेस्ट

डिजिटल अरेस्ट क्या है ?-

यह एक साइबर क्राइम है दूसरे शब्दों में यह एक अत्यन्त घातक धोखा धड़ी है जिसे ऑन लाइन अंजाम दिया जाता है, डिजिटल अरेस्ट स्कैम आपके डर जाने को कैश करके लूटने का आधुनिकतम तरीका है। कई अर्थों में यह हमारी नासमझी का परिणाम है जिन कार्यों को बैंक, शासन  बार बार मैसेज भेजकर हमें करने से मना करता है वही जब हम किसी भी कारणवश कर बैठते हैं तब हम डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार बनते हैं। जब केवल डराकर आपको मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग की तस्करी, अन्तर्राष्ट्रीय अपराध, किसी परिवारीजन, मित्र, सम्बन्धी झूठी बात का आपको विश्वास दिलाकर अपने इशारों पर दूर से नचाया जाता है तो इस सायबर क्राइम की भूमिका गढ़ी जाती है। वीडियो कॉल पर अनजाना चेहरा आपके बारे में कुछ तथ्य बताकर अपने को किसी तरह का अफसर बताकर डर का माहौल बनाकर आपको बाध्य करता है तब जो आप वीडियो कॉल पर बन्धक हो जाते हो इसे ही डिजिटल अरेस्ट होना कहा जाता है।

डिजिटल अरेस्ट के कतिपय उदाहरण –

            आजकल लगभग रोज ही इस तरह की खबर सुननने को मिल जाती है कि आज डिजिटल अरेस्ट कर इसे लूट लिया उसे लूट लिया और यह  ठगी भी करोड़ों में होती है कुछ उदाहरण जो मष्तिष्क में हैं उनमें से कुछ आपके साथ बांटने का प्रयास करता हूँ। वर्धमान ग्रुप के CMD श्री एस पी ओसवाल जी को डिजिटल अरेस्ट करके लगभग 7 करोड़ की ठगी हुई। मेरी एम  एड में गुरु रहीं श्रद्धेय डॉ वीना शाह जी इसका शिकार बनी. एक महिला शिक्षक को जब उसकी बेटी के सेक्स स्कैंडल में फंसने का झूठा कॉल आया तो डर के कारण उसकी मौत हो गयी। इतनी बड़ी आबादी वाले देश में साइबर क्राइम करने वालों को शिकार खोजने में अधिक दिक्कत नहीं होती।

डिजिटल अरेस्ट होने के कारण –

01 – कानून और व्यवस्था का सम्मान

02 –  नियम कायदे, सरकारी दस्तावेज व विविध शासकीय संस्थाओं पर अगाध विश्वास

03 – निजी डाटा सुरक्षा सम्बन्धी सरल क़ानून 

04 – डिजिटल अरेस्ट, ट्रेडिंग घोटाला, निवेश में घोटाला वाली मानसिकता

05 –  रोमांस, डेटिंग व स्वाभाविक ओछापन 

06 – प्रबल विवेक शक्ति का अभाव

07 – अवैध सामान, नकली पासपोर्ट, ड्रग्स या नियम विरुद्ध कार्य सम्बन्धी सूचना पर विश्वास  

08 – भय

09 – स्वयं को कमजोर मानने की प्रवृत्ति

10 – साइबर सुरक्षा की खराब व्यवस्था  

11 – निजता संरक्षण सम्बन्धी जागरूकता का अभाव

डिजिटल अरेस्ट से बचाव के उपाय –

01 – आरोपों की सम्यक पड़ताल।

02 – तथ्यों, सबूतों की सम्यक समझ। 

03 – डिजिटल अरेस्ट या वर्चुअल हिरासत शब्द पर तुरन्त जागरूक।

04 – लगातार कॉल पर रहने की बात आते ही विशेष जागरूक ;

05 – अनजाने लोगों से वीडिओ कॉल पर बात नहीं।

06 – अकाउंट फ्रीज की सूचना पर सचेत

07 – बिना मँगाया पार्सल वापस करें तुरन्त।

08 – आपसे सौदेबाजी की बात आने पर सचेत

09 – जागरुक रहें। जागरुक करें।

10 – वित्तीय लेन देन पर राज़ी न हों।

11 – अपराधों के आरोप पर सचेत   

12 – तुरन्त पेमेन्ट मतलब ख़तरा

13 – कॉल काटने से न डरें। 

14 – तथ्य वेरिफाई अवश्य करें।

15 – तत्सम्बन्धी सुरक्षा एजेंसी से तुरन्त सम्पर्क।

16 – बैंक डिटेल्स, जन्म तिथि, आधार व पैन नंबर, OTP शेयर न करें।

अगर कभी फँस भी जाएँ तो तुरन्त स्थानीय पुलिस, साइबरक्राइम पोर्टल (जैसे, भारत में cybercrime.gov.in) या 1930 जैसी राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें.

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समाज और संस्कृति

दिखावे का छल।

February 18, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

दिखावे का छल। / The deception of appearances

आज की दुनियाँ हर क्षण बदल रही है और इसमें मेहनतकश को छलने के तमाम नए अवसर सृजित किये जा रहे हैं। इसमें एक ऐसा वर्ग पैदा हो गया है जो मध्यम वर्गको लड़ाने के नित नए पैंतरे खोजता रहता है। मध्यम वर्ग बिना किसी चिन्तन के नए भ्रम का शिकार होता रहता है क्योंकि शिकारी रोज नए जाल का प्रयोग कर रहा है। रोज नए कांटे लगाकर मध्यम वर्ग को रिझाने की साजिशें रची जा रही हैं। चूँकि मध्यम वर्ग संगठित वर्ग नहीं है इस लिए उस मकड़ जाल में फंसता चला जाता है। कहीं कोई तथा कथित चिकित्सक के रूप में अनावश्यक सलाह से जबरदस्ती के ऑपरेशन करके लूटने की साजिश करता है कहीं कोर्ट कचहरी के चक्कर में वह अनायास फंस जाता है। लोग दूर से उसे लड़ाकर अपना उल्लू साधते हैं। एक बहुत बड़ा चक्कर उसे जाति के खानों में डालकर लड़वाने का है। बहुत पुरानी पुस्तक के बारे में भ्रम फैलाकर लड़वाने की साजिश होती है और कहीं भाषा के नाम पर। हर हालत में मरना या शिकार आम आदमी को ही होना है।

मध्यम वर्ग को दिखावे के जञ्जाल में फँसाने के लिए कतिपयएक्टर, कतिपय खिलाड़ी, कतिपय यू ट्यूबर, नेतृत्वकारी शक्ति, तथाकथित अभिजात्य वर्ग, नवोदित रईस सभी लगे हैं। बाज़ारवाद हावी हो चला है छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक को फँसाने की भयङ्कर साजिश है और अधिकाँश मध्यम वर्ग बेखबर है। यहाँ कुछ दिखावे की ओर ध्यान आकृष्ट कर सचाई परोसने का प्रयास कुछ बिन्दुओं के आधार पर करने जा रहा हूँ। बाकी आप जानते हैं समझदारी हटी, दुर्घटना घटी।

दिखावे के कतिपय महत्त्वपूर्ण बिन्दु / Some important points of appearance –

01- जन्म, जन्मदिन और केक / Births, Birthdays, and Cakes

02 – दुष्प्रचार और यथार्थ / Misinformation and Reality

03 – पाँच सितारा विद्यालय / Five-Star Schools

04 – पहनावा / Clothing

05 – अनावश्यक गैजेट्स / Unnecessary Gadgets

06 – बाजार वादी संस्कृति / Market-driven culture

07 – अध्यात्म से दूरी / Disconnection from spirituality

08 – अनावश्यक डर / Unnecessary fear

09 – स्वास्थ्य उपेक्षा /Neglect of health

10 – शीतल पेय, डब्बा बन्द अखाद्य पदार्थ / Soft drinks, canned and inedible items

11 – वैचारिक भटकाव / Ideological distraction

 12 – पारवारिक विघटन / Family disintegration                            

13 – समाज और सामाजिक रिश्ते / Society and social relationships

14 – मूल्य अवमूल्यन / Price Depreciation

15 –  तुलना / Comparison                                     

 

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वाह जिन्दगी !

ऊँ नमः शिवाय

February 15, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

आई है,आई है शिवरात्रि, स्वप्न हुआ साकार,

निराकार से आज ही प्रगट हुआ साकार।

फागुन कृष्णा चतुर्दशी तिथि को मिला वो वार,

माँ पार्वती से मिलन का, अद्भुत यह त्यौहार।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय ।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय । 1

शिव रात्रि की रात्रि को प्रगटा लिङ्गाकार,

मिलन हुआ शिवशक्ति का छाया हर्ष अपार।

पुरुष – प्रकृति मिलन का, अद्भुत है ये वार,

सब सङ्कीर्ण विचारों को, मिलता कारागार।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय ।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय । 2

अज्ञानता की रात्रि पर, चेतनता का वार,

रात्रि जागरण साधना फल देती हर बार।

भ्रम, संशय सारे मिटें, ज्ञान का होत प्रसार,

ऊँ नमः शिवाय का जप होता बारम्बार।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय ।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय । 3

नटराज के ताण्डव का है प्रसिद्द यह वार,

राहु दोष से मुक्ति का अद्भुत है ये द्वार।

रावण के और राम के प्रेम को मिला प्रसार,

दूध, शहद, बेल-पत्र में छिपा है शिव का प्यार।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय ।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय । 4

आत्म जागरण है सम्भव, शिव कृपा का ये आधार,

आवागमन के बन्धन कटते, मुक्ति का आगार।

धन्य, धन्य सद्भावना, प्रगटे भक्ति अपार,

कृपा मिले शिव शक्ति की आनन्द बारम्बार।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय ।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय । 5

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विविध

PUBLISHED BOOK, UNPUBLISHED BOOK

February 5, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

पब्लिश्ड बुक और अनपब्लिश्ड बुक

आजकल आप एक शोर लगातार पब्लिश्ड बुक और अनपब्लिश्ड बुक के बारे में सुन रहे होंगे। राहुल गांधी के साथ अनपब्लिशड बुक (अप्रकाशित पुस्तक ) व निशिकान्त दुबे की पब्लिश्ड बुक  (प्रकाशित पुस्तक ) के चक्कर में जो भी हंगामा हुआ। वह हर समाचार सुनने वाले के कान में गूँजता ही होगा। आज हम इस विषय वस्तु पर ही अपने को केन्द्रित करते हैं। आज का विषय पब्लिश्ड बुक और अनपब्लिश्ड बुक के बारे में विवेचन करना है ।

अन पब्लिश्ड बुक (अप्रकाशित पुस्तक) की विशेषताएं

01 – मूल पाण्डुलिपि स्तर / Original Manuscript Levels

02 – विश्वसनीयता सन्दिग्ध / Questionable Authenticity

03 – प्रक्रियाधीन व आंशिक पूर्णता / In Process and Partially Completed

04 – गोपनीय / Confidential

05 – स्वीकृत व अस्वीकृत स्तर प्रकाशक पर निर्भर / Accepted or Rejected (Dependent on Publisher)

06 – सीमित दायरा /limited scope

07 – शब्दों की कच्ची मूर्ति / Raw sculpture of words

08 – परिवर्तन की बहुत सम्भावना / Great possibility of change

09 – कल्पना प्राबल्य / Imagination prevails

10 – प्रकाशन की चाहत / Desire to publish

पब्लिश्ड बुक (प्रकाशित पुस्तक) की विशेषताएं –

01 – अन्तर्राष्ट्र्रीय मानक पुस्तक संख्या / ISBN (INTERNATIONAL STANDERD BOOK NUMBER)

02 – बौद्धिक सम्पदा व कॉपी राइट / Intellectual Property and Copyright

03 – विशेषज्ञों द्वारा प्रूफ रीडिंग / Proofreading by Experts

04 – भाषा शैली का गहन निरीक्षण / In-depth Inspection of Language Style

05 – व्यवस्थित व्यस्थापन / Systematic Arrangement

06 – सम्यक मिश्रण (मार्जिन, फुटर, हैडर, सम्यक फॉण्ट) / Proper mix (margins, footers, headers, appropriate fonts)

07 – व्यापक परिक्षेत्र / Broad Scope

08 –  क्रमबद्धता / Serialization

09 – कवर डिजाइनिंग / Cover Designing

10 – बिकाऊ उत्पाद / Merchandise

उक्त सम्पूर्ण विवेचन यह स्पष्ट करता है कि अप्रकाशन से प्रकाशन का सफर एक लेखक की जिन्दगी में बहुत ऊहापोह से भरा होता है। ऐसा लगता है जैसी कल्पना यथार्थ के धरातल पर उतर आई हो। यथार्थ अवलम्बित रचनाएं कुछ मसाला लपेटकर पाठकों को अलग आनन्द प्रदान करती हैं। कुछ रचनाएं बाजार को ध्यान में रखकर लिखी जाती हैं और कुछ लेखक के मन की झांकी हुआ करती हैं।

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विविध

What to do?, what not to do?

February 3, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

क्या करें ?, क्या न करें ? What to do?, what not to do?

आज का भारतीय युवा उस दोराहे पर खड़ा है जहाँ उसका चिन्तन दिग्भ्रमित हो गया है। जहाँ हमारे कुछ बच्चे क्रिस्टल क्लियर सोच रखते हैं तो कई तरह तरह के विकल्प का अध्ययन कर्व ऊहापोह की स्थिति में हैं। इस स्थिति में यह जानना भी परम आवश्यक है के वे क्या करें और क्या न करें ?

क्या करें ? / What to do ?

01 – डिजिटल ज्ञान के साथ शिक्षा / Education with Digital Knowledge

02 – स्वयं में कौशल विकास / Self-Skill Development

03 – बाजार की मांग अनुरूप तकनीकी ज्ञान -रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेन्स, मशीन लर्निंग  

Technical knowledge relevant to market demand – Robotics, Artificial Intelligence, Machine Learning

04 – स्वास्थ्य विकास /Health Development

05 – सामाजिक दायित्व निर्वहन / Social Responsibility

06 – मौलिक शोध कार्य / Original Research Work

07 – रचनात्मक कार्य / Creative Work

08 – उद्द्यम शीलता विकास Entrepreneurship Development

09 – नवाचार / Innovation

10 – राष्ट्रहित के सृजनात्मक कार्य / Creative work for the national benefit

क्या न करें ? / What not to do?

01 – गलत सङ्गत / wrong association

02 – नशा / Addiction

03 – अपर्याप्त निद्रा /Insufficient sleep

04 – तात्कालिक लाभ प्रयास /Immediate Profit Effort

05 – अधैर्य / Impatience

06 – समय की बरबादी / Wasting time

07 – लक्ष्य हीनता / Aimlessness

08 – गलत आहार /Bad diet

09 – अन्धानुकरण / Blind imitation

10 – आत्महीनता /Self-deprecation

                आशा ही नहीं विश्वास है कि उक्त तथ्य दिशा निर्धारण में सहायक सिद्ध होंगे। 

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