डिजिटल अरेस्ट  

आज की भागम भाग की जिन्दगी में ढेरों बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आदमी मशीन होता जा रहा है। जेब में बिना पैसे रखे भी सीधे अपने खाते से भारी भरकम  रकम खर्च की जा सकती है। जहाँ लम्बी लम्बी लाइनों के जञ्जाल से मुक्ति मिली है लेन देन सरल हुआ है। वही कंगाल होने के भी खतरे बढ़ गए हैं। बिना आपके घर में साक्षात् घुसे भी आपको  लूटा  सकता है उसी का  एक तरीका है – डिजिटल अरेस्ट

डिजिटल अरेस्ट क्या है ?-

यह एक साइबर क्राइम है दूसरे शब्दों में यह एक अत्यन्त घातक धोखा धड़ी है जिसे ऑन लाइन अंजाम दिया जाता है, डिजिटल अरेस्ट स्कैम आपके डर जाने को कैश करके लूटने का आधुनिकतम तरीका है। कई अर्थों में यह हमारी नासमझी का परिणाम है जिन कार्यों को बैंक, शासन  बार बार मैसेज भेजकर हमें करने से मना करता है वही जब हम किसी भी कारणवश कर बैठते हैं तब हम डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार बनते हैं। जब केवल डराकर आपको मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग की तस्करी, अन्तर्राष्ट्रीय अपराध, किसी परिवारीजन, मित्र, सम्बन्धी झूठी बात का आपको विश्वास दिलाकर अपने इशारों पर दूर से नचाया जाता है तो इस सायबर क्राइम की भूमिका गढ़ी जाती है। वीडियो कॉल पर अनजाना चेहरा आपके बारे में कुछ तथ्य बताकर अपने को किसी तरह का अफसर बताकर डर का माहौल बनाकर आपको बाध्य करता है तब जो आप वीडियो कॉल पर बन्धक हो जाते हो इसे ही डिजिटल अरेस्ट होना कहा जाता है।

डिजिटल अरेस्ट के कतिपय उदाहरण –

            आजकल लगभग रोज ही इस तरह की खबर सुननने को मिल जाती है कि आज डिजिटल अरेस्ट कर इसे लूट लिया उसे लूट लिया और यह  ठगी भी करोड़ों में होती है कुछ उदाहरण जो मष्तिष्क में हैं उनमें से कुछ आपके साथ बांटने का प्रयास करता हूँ। वर्धमान ग्रुप के CMD श्री एस पी ओसवाल जी को डिजिटल अरेस्ट करके लगभग 7 करोड़ की ठगी हुई। मेरी एम  एड में गुरु रहीं श्रद्धेय डॉ वीना शाह जी इसका शिकार बनी. एक महिला शिक्षक को जब उसकी बेटी के सेक्स स्कैंडल में फंसने का झूठा कॉल आया तो डर के कारण उसकी मौत हो गयी। इतनी बड़ी आबादी वाले देश में साइबर क्राइम करने वालों को शिकार खोजने में अधिक दिक्कत नहीं होती।

डिजिटल अरेस्ट होने के कारण –

01 – कानून और व्यवस्था का सम्मान

02 –  नियम कायदे, सरकारी दस्तावेज व विविध शासकीय संस्थाओं पर अगाध विश्वास

03 – निजी डाटा सुरक्षा सम्बन्धी सरल क़ानून 

04 – डिजिटल अरेस्ट, ट्रेडिंग घोटाला, निवेश में घोटाला वाली मानसिकता

05 –  रोमांस, डेटिंग व स्वाभाविक ओछापन 

06 – प्रबल विवेक शक्ति का अभाव

07 – अवैध सामान, नकली पासपोर्ट, ड्रग्स या नियम विरुद्ध कार्य सम्बन्धी सूचना पर विश्वास  

08 – भय

09 – स्वयं को कमजोर मानने की प्रवृत्ति

10 – साइबर सुरक्षा की खराब व्यवस्था  

11 – निजता संरक्षण सम्बन्धी जागरूकता का अभाव

डिजिटल अरेस्ट से बचाव के उपाय –

01 – आरोपों की सम्यक पड़ताल।

02 – तथ्यों, सबूतों की सम्यक समझ। 

03 – डिजिटल अरेस्ट या वर्चुअल हिरासत शब्द पर तुरन्त जागरूक।

04 – लगातार कॉल पर रहने की बात आते ही विशेष जागरूक ;

05 – अनजाने लोगों से वीडिओ कॉल पर बात नहीं।

06 – अकाउंट फ्रीज की सूचना पर सचेत

07 – बिना मँगाया पार्सल वापस करें तुरन्त।

08 – आपसे सौदेबाजी की बात आने पर सचेत

09 – जागरुक रहें। जागरुक करें।

10 – वित्तीय लेन देन पर राज़ी न हों।

11 – अपराधों के आरोप पर सचेत   

12 – तुरन्त पेमेन्ट मतलब ख़तरा

13 – कॉल काटने से न डरें। 

14 – तथ्य वेरिफाई अवश्य करें।

15 – तत्सम्बन्धी सुरक्षा एजेंसी से तुरन्त सम्पर्क।

16 – बैंक डिटेल्स, जन्म तिथि, आधार व पैन नंबर, OTP शेयर न करें।

अगर कभी फँस भी जाएँ तो तुरन्त स्थानीय पुलिस, साइबरक्राइम पोर्टल (जैसे, भारत में cybercrime.gov.in) या 1930 जैसी राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें.

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