सूचना का प्रभाव

आज सूचनाएं विद्युत की गति से उड़ान भर रही हैं इन सूचनाओं में ज्ञान है, विज्ञान है और अज्ञान भी। सूचनाओं की यह दुनियाँ विविध समाजों पर विविध असर रखती है प्रभावोत्पादकता की दृष्टि से कहा जा सकता है कि सूचनाएं स्वाभाविक हैं, कृत्रिम हैं और रण नीतिक योजना से युक्त भी। गलत सूचनाएँ भ्रमित कर जन आक्रोश को उद्वेलित भी कर देती हैं। मिथ्या सूचनाएं बड़े बड़े घटनाक्रम को उद्भवित करने की क्षमता रखती हैं। सत्य और असत्य में निर्णायक स्तर भी सूचना द्वारा ही स्थापित होता है। सूचनाएं ज्ञान के ही पर्याय के रूप में भूमिका का निर्वहन करती हैं। सूचनाओं की दुनियाँ समस्त विश्व को दिशा देने में सक्षम है। सचमुच अद्भुत दुनियाँ है सूचनाओं की।

भ्रम और यथार्थ / Illusion and Reality –

आज जो भी सूचनाएं सम्प्रेषित हो रही हैं ख़ास कर आधुनिक सञ्चार क्रान्ति के दौर में मानव को दिग्भ्रमित करने वाली हैं क्योंकि उनमें सच और झूठ का सम्मिश्रण है। प्रसारित ज्ञान का स्तर अलग स्तर का है जिसमें सच के साथ झूठ की चाशनी भी है कहीं इसके पीछे आर्थिक लाभ है तो कहीं सामाजिक विघटन के बीज रोपित होते हुए दीख पड़ते हैं। आर्टिफिशियल इन्टेलीजेन्स (A. I)  की व्यवस्था ने और उलझन पैदा कर दी है। सच और झूठ की पहचान और भी दूभर हो गयी है। विविध जिम्मेदार चैनल नीर क्षीर विवेक का प्रयास कर सच को आवाम के सामने रखने का क्षमता भर प्रयास करते हैं फिर भी बहुत सी सूचनाओं की जाँच नहीं हो पाती।

अतः जनमानस को स्वविवेक के आधार पर विश्लेषण करना होगा। उत्तेजना पैदा करने वाले लोग इन भोले भाले लोगों को अपना शिकार बना लेते हैं। डिजिटल अरेस्ट इसी तरह का एक झूठ को आलम्ब देता हुआ प्रयास है।

Role of Information in human life / मानव जीवन में सूचना की भूमिका

अत्याधिक सुख या दुःख की एक सूचना मानव जीवन को समाप्त करने की क्षमता रखती है और फिर हार्ट अटैक जैसी बातों को प्रश्रय मिलता है एक सूचना जीवन में उत्साह का संचरण करने की क्षमता रखती है। इससे समूचा जीवन प्रभावित होता है। प्रेरणा प्रदान करने की ताक़त सूचना सम्प्रेषण से ही विविध सकारात्मक आयाम पाती है। सेना की जीत हो या टीम की विजय, आलम्ब यह सूचना या विचार सम्प्रेषण ही बनता है। जहाँ एक सूचना या विचार किसी को आत्महत्या हेतु प्रेरित करता है वहीं एक विचार या सूचना बहुत से लोगों को आत्म ह्त्या से दूर रहने की संचेतना विकसित करती है। अद्भुत आकाश है सूचनाओं की इस विलक्षण दुनियाँ का।

POSITIVE INFORMATION INTAKE MAKE YOUR PERSONALITY / सकारात्मक सूचना संग्रहण आपका व्यक्तित्व निर्माणक –

हमारा मानस शरीर के प्रत्येक हिस्से की सञ्चेतना रखता है और किसी भी हिस्से पर होने वाले किसी भी प्रभाव के प्रति मस्तिष्क जागरूक रहता है। इसी तरह जो सूचनाएँ आज पटल पर हैं उनमें से जब मानस केवल सकारात्मक सूचनाओं का अवलम्ब लेना सीख जाता है तब व्यक्तित्व के गढ़ने की शुरुआत होती है।

आज अद्भुत समय है हमारे हजारों मित्र हैं विविध सोशल प्लेटफार्म पर बहुत से लोग सभी से जुड़े होते हैं बहुत से रिश्ते बनते हैं लेकिन वो कन्धा मिलना मुश्किल होता है जो अवलम्ब बने। इन परिस्थितियों में सकारात्मक अवलम्ब सूचना के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण से आता है। जिस प्रकार की संवेदनशीलता मष्तिष्क शरीर के प्रत्येक अवयव के प्रति रखता है वैसा संवेदनशील शील व्यक्तित्व सकारात्मक सूचनाओं के संग्रहण से आधारिक अवलम्ब प्राप्त करता है और निम्न बदलाव दृष्टिगत होते हैं। –

01 – व्यापक दृष्टिकोण / Broad Vision

02 – सहृदयता / Kindness

03 – सम्यक व्यवहार / Righteous Behavior

04 – भेदभाव परक चिन्तन का अन्त / End of Discriminatory Thinking

05 – विशिष्ट जागरूकता / Special Awareness

06 – सर्वजन के प्रति संवेदनशीलता / Sensitivity to All

07 –  निर्भयता / Fearlessness

08 – स्वानुशासन / Self-Discipline

09 – स्वास्थय सचेतता/ Health Awareness

सृजनात्मक व विध्वंशक / Creative and Destructive –

सूचनाएं दो धारी तलवार की तरह हैं इनमें सृजन की अपूर्व क्षमता है तो विनाश के बीज भी छिपे हैं। हमारी जागरूकता ही हमारे दृष्टिकोण में सृजन के तत्व उद्भवित कर सकती है सच मानिये -सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। समाज में अलग अलग वैचारिक आधार वाले लोग रहते हैं जिनपर इन सूचनाओं का प्रभाव भी अलग होता है। मिथ्या सूचनाएं या विध्वंशात्मक सूचनाएं जान बूझ कर अराजक तत्वों द्वारा समाज में पहुंचाई जाती हैं जिसका घातक असर कई बार दृष्टिगत हो चुका है। आजकल कई राजनैतिक दल भी इस मिथ्या प्रचार को हवा देकर वातावरण को विषाक्त करने का कार्य कर रहे हैं

अन्ततः सार रूपेण कहा जा सकता है कि इन सूचनाओं के प्रति नीर क्षीर विवेक जाग्रत करने की नितान्त आवश्यकता है। हमारे शिक्षालयों की इसमें महती भूमिका है। ऐसे विषाक्त पाठ्यक्रम को भी हटाने की आवश्यकता है जो समाज की सहृदयता छीनकर उसमें कट्टरता का जहर फैलाने का कार्य करते हैं। सूचनाओं के प्रति सम्यक विश्लेषण व संश्लेषण परमावश्यक है इसलिए तुरन्त किसी प्रकार की प्रतिक्रिया न की जाए। बुद्धिजीवी वर्ग की भी जिम्मेदारी है की वह सत्य स्थापन में अपनी भूमिका का निर्वहन करे। ।

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