असफलता से सफलता की ओर / From failure to success
मानव जीवन का विकास क्रम अपने आप में शैशव अवस्था, बाल्य अवस्था, किशोर अवस्था, युवा अवस्था, प्रौढ़ अवस्था,और वृद्ध अवस्था को समेटे हुए है। इस क्रम में शैशव अवस्था, में हम अपने आप कुछ कर पाने की स्थिति नहीं होते लेकिन इसके उपरान्त हम चलना, बोलना, खेलना, पढ़ना, लिखना सभी प्रारम्भ करते हैं। इस समय का एक विशेष गुण होता है कि हम असफलताओं से घबराते नहीं, हारते नहीं हैं और अनवरत प्रयास कर सफलता की सीढ़ी चढ़ते हैं। ज़रा याद करें , चलना सीखने के क्रम में हम कितनी बार गिरे अन्ततः हमने चलना ही नहीं सीखा बल्कि दौड़ना भी सीख लिया। कई विद्वतजनों की धारणा है कि हमारी असफलता से जूझने की क्षमता में अवस्था के अनुसार क्रमिक ह्रास आता है कई इसे भी नहीं भी मानते।
दृष्टिकोण परिवर्तन आवश्यक / Attitude change required –
असल में हमने अपने मानदण्ड, अपने दृष्टिकोण जो असफलता के सम्बन्ध में विकसित किये हैं दिशा भ्रम वहीं से शुरू हो जाता है जबकि प्रत्येक असफलता एक प्रकाश स्तम्भ है इससे हमें अपनी कमी का भान होता है। एक नया अनुभव प्राप्त होता है कार्य को अधिक कारगर तरीके से करने का दृष्टिकोण विकसित होता है। हम और अधिक सशक्त बनकर उभरते हैं। मानसिक रूप से सशक्त होकर कार्य को भली भाँति अन्जाम दे सकते हैं। असफलता को अन्तिम पायदान न समझकर मील का पत्थर और प्रेरक के रूप में स्वीकार करना होगा तभी हम असफलता को पीछे छोड़ और उसका आधार ले आगे बढ़ सकेंगे। यथार्थ में असफलता सच्चा अवलम्बन व सच्चा मार्गदर्शक है।
असफ़लता से मिलने वाली सम्यक दिशाएं / The right directions from failure –
असफलता से हमें दृढ़ आधार प्राप्त होता है कुछ ऐसे भी आधार हैं जो मानस में गहरे बैठ जाते हैं असफलता से हारने की जगह हमें उससे सीखना चाहिए। क्या क्या सीखा जा सकता है उनमें से कुछ को इस प्रकार कर्म दे सकते हैं।
01 – परिपक्वता / Maturity
02 – सम्यक रणनीति / Appropriate Strategy
03 – लचीलापन / Flexibility
04 – सकारात्मकता /Positivity
05 – व्यक्तित्व पुनर्गठन /Personality Restructuring
06 – आत्म शक्ति सञ्चयन व विकास / Self power accumulation and development
राष्ट्र कवी मैथिली शरण गुप्त के भाव देखिये
”नर हो, न निराश करो मन को
कुछ काम करो, कुछ काम करो
जग में रह कर कुछ नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो, न निराश करो मन को”
07 – जोखिम क्षमता वृद्धि / Increased risk appetite
राबर्ट एफ केनेडी ने कहा –
“केवल वे ही जो बड़ी विफलता का जोखिम उठाते हैं वे ही बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं।”
आँग्लअनुवाद
“Only those who risk great failure can achieve great success.”
08 – स्वमूल्याँकन / Self assessment
09 – मानसिक शक्ति का विकास /Development of mental strength
10 – सम्यक धैर्य सम्वर्धन / Proper patience development
हरिवंश राय बच्चन महोदय कहते हैं –
“असफलता एक चुनौती है स्वीकार करो
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम
कुछ किये बिना ही जयजयकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।“
विविध विद्वानों के असफलता सम्बन्धी उद्धरण / Quotes on failure from various scholars –
हेनरी फोर्ड महोदय कहते हैं –
“असफलता केवल फिर से शुरआत करने का एक अवसर है, इस बार अधिक समझदारी से”
आंग्ल अनुवाद
“Failure is simply an opportunity to begin again, this time more intelligently.”
नेपोलियन हिल
“हर असफलता, हर दिल टूटना, हर हार अपने साथ एक समान या उससे बड़े लाभ का बीज लेकर आती है।”
आंग्ल अनुवाद
“Every failure, every heartbreak, every defeat carries with it the seed of an equal or greater gain.”
जिम रोहन महोदय के अनुसार –
“सफलता कीसबसे बड़ी कुंजी यह है कि आप असफलता से न डरें।”
आंग्ल अनुवाद
“The biggest key to success is not to be afraid of failure.”
स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा –
“इन छोटी मोटी असफलताओं की परवाह मत करो; आदर्श को याद रखो, और अगर हज़ार बार भी असफल हो जाओ, तो एक बार फिर कोशिश करो।”
“Don’t worry about these small failures; remember the ideal, and even if you fail a thousand times, try again.”
असफलता से सफलता की ओर बढाए जाने वाले कदम / Steps from failure to success –
01 – स्वस्थ आदतों का विकास / Developing Healthy Habits
02 – स्पष्ट लक्ष्य चयन / Clear Goal Selection
03 – उद्देश्य के प्रति पूर्ण समर्पण / Complete Dedication to the Objective
04 – अनवरत परिश्रम / Continuous Hard Work
05 – कठोर स्व अनुशासन / Strict Self-Discipline
06 – सकारात्मक सोच / Positive thinking
07 – अनवरत क्षमता व कौशल विकास / Continuous capacity and skill development
08 – आशावादिता / Optimism
रामानंद ‘दोषी’ जी के शब्द हमें हमारे स्वर्णिम इतिहास से प्रेरणा देते हुए हमारा आवाहन करते हुए कहते हैं –
आँधियों ने गोद में हमको खिलाया है न भूलो,
कंटकों ने सिर हमें सादर झुकाया है न भूलो,
सिन्धु का मथकर कलेजा हम सुधा भी शोध लाए,
औ‘ हमारे तेज से सूरज लजाया है न भूलो।
वे हमीं तो हैं कि इक हुंकार से यह भूमि कांपी,
वे हमीं तो हैं जिन्होंने तीन डग में सृष्टि नापी,
और वे भी हम कि जिनकी सभ्यता के विजय रथ की
धूल उड़ कर छोड़ आई छाप अपनी विश्वव्यापी।
वक्र हो आई भृकुटी तो ये अचल नागराज डोले,
दश दिशाओं के सकल दिक्पाल ये गजराज डोले,
डोल उट्ठी है धरा, अम्बर, भुवन, नक्षत्र-मंडल,
ढीठ अत्याचारियों के अहंकारी ताज डोले।
सुयश की प्रस्तर-शिला पर चिह्न गहरे हैं हमारे,
ज्ञान-शिखरों पर धवल ध्वज-चिन्ह हैं लहरे हमारे,
वेग जिनका यों कि जैसे काल की अंगड़ाइयाँ हों,
उन तरंगों में निडर जलयान ठहरे हैं हमारे।
मस्त योगी हैं कि हम सुख देखकर सबका सुखी हैं,
कुछ अजब मन है कि हम दुख देखकर सबका दुखी हैं,
तुम हमारी चोटियों की बर्फ़ को यो मत कुरेदो,
दहकता लावा हृदय में है कि हम ज्वालामुखी हैं।
लास्य भी हमने किए हैं और तांडव भी किए हैं,
वंश मीरा और शिव के, विष पिया है औ‘ जिए हैं,
दूध माँ का, या कि चन्दन, या कि केसर जो समझ लो,
यह हमारे देश की रज है कि हम इसके लिए हैं।
आशा ही नहीं विश्वास है कि असफलता को हम सब एक चुनौती की तरह लेंगे और कभी हार न मानने का खुद में जज्बा पैदा करेंगे और दूसरों में भी उत्साह का संचरण करेंगे। तभी हम बढ़ पाएंगे – ‘असफलता से सफलता की ओर’

