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शोध

ज्ञान मीमांसा  [EPISTEMOLOGY]

January 2, 2026 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

ज्ञान से आशय /Meaning of knowledge-ज्ञान (Knowledge) से आशय है किसी विषय या तथ्य का बोध या सत्य जानकारी होना, जो शिक्षा, अनुभव या सूझ से प्राप्त होता है।

ज्ञान की विविध परिभाषाएँ / Various definitions of knowledge –   ज्ञान शब्द संस्कृत की ‘ज्ञा’ धातु से बना है, जिसका अर्थ ‘जानना’ या ‘पहचानना’ है।

प्लेटो महोदय के अनुसार

“विचारों की दिव्य व्यवस्था और आत्मा-परमात्मा के स्वरूप को जानना ज्ञान है।“

“Knowing the divine system of thoughts and the nature of the soul and God is knowledge.”

अल्बर्ट आइंस्टीन महोदय के अनुसार –

 “अनुभव ही ज्ञान है, बाकी सब सिर्फ जानकारी है।”

“Experience is knowledge, everything else is just information.”

मगध विश्व विद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग की  विद्वान प्राचार्य के मत में  –

“नॉलेज और ज्ञान के दार्शनिक विवेचन में सर्वाधिक प्रमुख भेद यही है कि नॉलेज सिर्फ सत्य होता है जबकि ज्ञान सत्य और असत्य दोनों ही रूपों में पाया जाना संभव है।”

“The most important difference in the philosophical discussion of knowledge and wisdom is that knowledge is only true whereas wisdom can be found in both true and false forms.”

उक्त सम्पूर्ण परिभाषाओं के अध्ययन से स्पष्ट है कि यदि ज्ञान को सामान्य अर्थों में लिया जाए तो इसे आंग्ल भाषा में सामान्यतः knowledge कहा जाता है जिसका अर्थ जानना, सीखना, अनुभव लेना, कुशल होना या सत्यता के प्रमाणित होने से है।

ज्ञान मीमांसा से आशय / Meaning of Epistemology –

            अंग्रेजी भाषा का शब्द Epistemology ग्रीक भाषा के दो शब्दों ‘Episteme’ और Logos शब्द से मिलकर बना है। जिनका अर्थ क्रमशः ज्ञान और विज्ञान है। दूसरे शब्दों में एपिस्टेमोलोजी से आशय है ज्ञान का सिद्धान्त जिसे दर्शन की भाषा में ज्ञान मीमांसा कहा जाता है। ज्ञान मीमांसा में मुख्यतः तीन प्रश्न शामिल हैं –

01 – ज्ञान – उद्गम (स्रोत ) व वास्तविक ज्ञान

02 – ज्ञान का स्वरुप – आभास बनाम सत्य

03 – ज्ञान – प्रामाणिक विश्वसनीयता  व वैधता

ज्ञान का क्षेत्र व्यापक है इसे असीम कहना भी तार्किक होगा इसमें ज्ञान स्थापन, विश्लेषण, संश्लेषण सभी शामिल है जो आगमन, निगमन, सूक्ष्म तार्किक विवेचन व ज्ञान की सत्यता की कसौटी पर आधारित समस्याएं को शामिल करता है। उक्त समस्त परिक्षेत्रों के प्रश्नों का विवेचन ज्ञान की जिस शाखा के अन्तर्गत किया जाता है  वह ज्ञान मीमांसा के नाम से जानी जाती है।

ज्ञान मीमांसा के सिद्धान्त / Principles of Epistemology –

किसी भी तथ्य, तर्क, सिद्धान्त को सत्यता की कसौटी पर कसने के क्रम में ज्ञान मीमांसा हेतु बहुत से सिद्धांत प्रचलित हैं उनमें से कतिपय प्रमुख सिद्धांतों को इस प्रकार क्रम दे सकते हैं।

01 – संशय वाद / Scepticism –  संशयवाद इस या उस ज्ञान को संशय की दृष्टि से नहीं देखता बल्कि यह किस्से भी प्रकार की ज्ञान प्राप्ति की संभावना के दावे को ही खारिज कर देता है। टी एच हक्सले महोदय का विचार है कि –

“किसी भी व्यक्ति के लिए यह कहना अनुचित है कि वह किसी भी तर्क वाक्य के वस्तुगत सत्य के बारे में निश्चित है। संशयवादी पूर्ण स्वीकार एवं पूर्ण नकार के मध्य स्थित हैं। “

“It is unreasonable for anyone to say that he is certain of the objective truth of any proposition. The skeptic stands between absolute acceptance and absolute denial.”

02 – अनुभव वाद / Empiricism –

 यह वह ज्ञान शास्त्रीय सिद्धांत है जो ज्ञान का एक मात्र साधन इन्द्रियानुभूत ज्ञान को स्वीककार करता है। इसके समर्थन में जॉन लॉक महोदय कहते हैं कि –

“ऐसी कोई भी चीज़ हमारी बुद्धि में नहीं होती, जो पहले अनुभव में नहीं होती।”

“There is nothing in our intellect, which was not previously in our senses.”

03 – बुद्धिवाद / Rationalism – सामान्यतः हम स्वीकार करते हैं कि ज्ञान, बुद्धि व अनुभव दोनों की उपज है लेकिन बुद्धिवाद वह सिद्धांत है जो ज्ञान का साधन, उद्गम, स्रोत केवल बुद्धि को ही स्वीकार करते हैं बुद्धिवादियों के अनुसार –

 “सिर्फ विश्लेषणात्मक (Analytic) तथा प्रागनुभविक (Apriori) ज्ञान ही वास्तविक ज्ञान है और ऐसे ज्ञान का स्रोत है बुद्धि।”

“Only analytical and apriori knowledge is real knowledge and the source of such knowledge is intellect.

04 – प्रत्यय वाद/ Idealism

05 – यथार्थ वाद / Realism

06 – व्यवहार वाद / Pragmatism

ज्ञान मीमांसा की प्रकृति एवं क्षेत्र / Nature and Scope of Epistemology –

जब हम मीमांसात्मक विवेचन ज्ञान के आधार पर अनुभव, प्रमाण, बुद्धि, सत्य, व विश्वास का सम्बल लेकर करते हैं तो यह विवेचन ज्ञान मीमांसात्मक विवेचन कहलाता है। यह दर्शन शास्त्र की एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा रही है। ज्ञान विश्वास का आधार लेकर चलता है सत्य की प्राप्ति हेतु प्रमाणों को लेकर सम्यक विवेचन करता है यही ज्ञान मीमांसा की मूल प्रकृति है। ज्ञान मीमांसा का क्षेत्र संकुचित न होकर अत्यन्त व्यापक है। जब तथ्यों, विचारों, सिद्धान्तों को ज्ञान की तार्किक कसौटी पर कसने का प्रयास प्रारम्भ होता है इसके व्यापक परिक्षेत्र के दर्शन प्रारम्भ हो जाते हैं। 

ज्ञान के स्रोत (Sources of Knowledge) –

ज्ञान मीमांसात्मक विवेचन में ज्ञान के प्रमुख स्रोत मुख्यतः निम्न हैं –

01 – इन्द्रियानुभव [Sense experience]

02 – तर्क बुद्धि [Reason]

03 – आप्त वचन [Authority]

04 – अन्तः प्रज्ञा [Intuition]

ज्ञान मीमांसा की प्रमुख अवधारणाएं / Key concepts of epistemology –

01 – प्रागनुभाविक तथा अनुभवाश्रित [A Priory and a Posteriori]

02 – विश्लेषणात्मक तथा संश्लेषणात्मक [Analytic and Synthetic]

03 – साक्षात ज्ञान तथा विवरण ज्ञान [Knowledge by Acquaintance and knowledge by Description]

        (i) ज्ञाता / Knower

        (ii) ज्ञेय / knowable

        (iii) ज्ञान / knowledge

ज्ञान मीमांसा एवं शिक्षा / Epistemology and Education

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