जब प्रशिक्षण पूरा करके,
अपना मुकाम पा जाओगे।
जब चमकीले सपने तज के,
पथ यथार्थ का धा पाओगे।
तब, तुमको मेरी याद आएगी,
तुमको मेरी याद आएगी ।1।
उच्च शिक्षा का सपना गढ़ के,
जब परिवर्तन तुम लाओगे।
अपने बच्चों के संग मिल के,
दर्शन का पाठ पढ़ा पाओगे।
तब, तुमको मेरी याद आएगी।
तुमको मेरी याद आएगी ।2।
जब सैद्धान्तिक पन्ने पढ़ के,
तुम यथार्थ के घर जाओगे।
नवजीवन के रङ्ग ढंग लख के,
नव परिवर्तन जब लाओगे।
तब, तुमको मेरी याद आएगी।
तुमको मेरी याद आएगी ।3।
मनोविज्ञान में सबकुछ पढ़ के,
मन से जब तुम जुड़ जाओगे।
शिक्षार्थी का नवचिन्तन पढ़ के,
जब स्वयं भी भरमा जाओगे।
तब, तुमको मेरी याद आएगी।
तुमको मेरी याद आएगी ।4।
कौशल तुम कक्षागत पढ़ के,
जब कुछ कहने को जाओगे।
नव परिवर्तन की ध्वनि सुन के,
जब बिल्कुल घबरा जाओगे।
तब, तुमको मेरी याद आएगी।
तुमको मेरी याद आएगी ।5।
शिक्षण सूत्र तुम सारे पढ़ के,
उनका उपयोग न कर पाओगे।
इस दुनियाँ के यथार्थ तल पे,
खुद बदलोगे, बदल पाओगे।
तब, तुमको मेरी याद आएगी।
तुमको मेरी याद आएगी ।6।
शिक्षण तकनीकी से जुड़ करके,
जब युग परिवर्तन ले आओगे।
समय के साथ कदमताल करके,
सब कुछ अधिगम कर पाओगे।
तब, तुमको मेरी याद आएगी।
तुमको मेरी याद आएगी ।7।
जो सीखा था वह ना पा करके,
खुद नव यथार्थ से जुड़ जाओगे।
इस दुनियाँ की परवाह न करके,
सब को सत्पथ पर ले आओगे।
तब, तुमको मेरी याद आएगी।
तुमको मेरी याद आएगी ।8।
अपने मनवा को दृढ़ कर के,
गर विसंगति से बच पाओगे।
सारे जग को दुश्मन कर के,
पथ के प्रदर्शक बन जाओगे।
तब, तुमको मेरी याद आएगी।
तुमको मेरी याद आएगी ।9।
भौतिक दुनियाँ में रह कर के,
जब अध्यात्म से जुड़ जाओगे।
जग की चका चौंध को तज के,
‘नाथ’ अध्यापक बन पाओगे।
तब, तुमको मेरी याद आएगी।
तुमको मेरी याद आएगी ।10।

