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शोध

Collection of data

April 21, 2025 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

समंकों का एकत्रीकरण

किसी शोध कार्य को सम्पन्न करने हेतु जब हम उस विषय का परिचय दे चुके होते हैं और तत्सम्बन्धी साहित्य का अध्ययन कर चुके होते हैं और इसके बाद के महत्त्वपूर्ण चरण पर पहुँचते हैं तो समंकों का एकत्रीकरण सबसे अधिक आवश्यक होता है। सारी गणना, विश्लेषण, परिणाम और उसकी व्याख्या को इसके अवलम्बन की आवश्यकता होती है।समंकों का संग्रहण अपने शोध के अनुसार किया जाता है। ये समंक दो प्रकार के होते हैं जिन्हें विविध प्रकार से हम संग्रहीत करते हैं।

प्राथमिक समंक और इनका संग्रहण / Primary data and its collection

द्वित्तीयक समंक और इनका संग्रहण / Secondary data and its collection 

प्राथमिक समंक और इनका संग्रहण / Primary data and its collection – 

            प्राथमिक समंक उन समंकों को कहा जाता है जिन्हे प्रथम बार नवीन सिरे से इकठ्ठा किया जाता है और इसी कारण ये वास्तविक होते हैं। प्राथमिक समंकों के एकत्रीकरण में व्यावहारिक रूप से अधिक श्रम आवश्यक होता है।

द्वित्तीयक समंक और इनका संग्रहण / Secondary data and its collection  –

            द्वित्तीयक समंक उन समंकों को कहा जाता है जिन्हें पहले ही किन्ही अन्य माध्यमों से इकट्ठे किया जा चुका होता हैं विविध सांख्यिकीय प्रक्रियाएं पहले ही से पूर्ण की जा चुकी होती हैं। इनका अपने शोध की आवश्यकतानुसार आधार रूप में प्रयोग किया जाता है और इस स्रोत का स्पष्टीकरण भी कर दिया जाता है।

            उक्त दोनों प्रकार का संग्रहण चयनित शोध के अनुसार निर्धारित किया जाता है प्राथमिक और द्वित्तीयक समंक अलग अलग तरह से इकट्ठे किये जाते हैं प्राथमिक समंकों को मूल रूपेण इकठ्ठा किया जाता है जबकि द्वित्तीयक समंक कोइ इकट्ठे कर चुका होता है। इनका केवल संकलन स्वनुसार करना होता है। आइये इनके संग्रहण की प्रविधियों पर दृष्टिपात करते हैं।

 प्राथमिक समंक संग्रहण प्रविधियाँ  / Primary data collection techniques –

इस हेतु प्रयोग में लाई जाने वाली प्रविधियाँ इस प्रकार हैं –

                                [A]  अवलोकन प्राविधि /Observation technique –

पी ० वी ० यंग (P V Yong ) ने इसे समझाते हुए बताया –

“अवलोकन स्वाभाविक घटना का उसके घटित होने के समय पर आँख के माध्यम से क्रमबद्ध एवम् विचारपूर्वक किया हुआ अध्ययन है। अवलोकन का उद्देश्य जटिल सामाजिक घटना, सांस्कृतिक प्रतिरूप अथवा मानव व्यवहार के अन्तर्गत सार्थक अन्तर्सम्बन्धित तत्वों की प्रकृति एवम् विस्तार को प्रकट करना होता है।”

“Observation is a systematic and deliberate study through the eye of spontaneous occurrence at the time they occur. The purpose of observation is to perceive the nature and extent of significant interrelated elements within complex social phenomena, cultural pattern or human conduct.”

P.V.Young. Scientific social survey and Research. New Delhi. Prentic Hall India (p) limited (1956)  p. 154

(01) – नियन्त्रण आधारित / Control based

(a) – नियन्त्रित अवलोकन /Controlled observation

पी ० वी ० यंग (P V Yong ) के अनुसार –

“नियन्त्रित अवलोकन सुनिश्चित एवम् पूर्व व्यवस्थित योजनाओं के अनुसार सम्पन्न किया जाता है, जिसमें यथेष्ट प्रायोगिक प्रक्रिया सम्मिलित की जा सकती है।”

“Controlled Observation is carried on according to define pre-arranged plans which may include considerable experimental Procedure.”

P.V.Young. op. cit. p. 164

(b) – अनियन्त्रित अवलोकन / Uncontrolled observation

गुडे एवम् हैट (Goode and Hatt) के अनुसार 

“सामाजिक सम्बन्धों के विषय में अधिकांश ज्ञान जो लोगों के पास है, अनियन्त्रित अवलोकन से व्युत्पादित होता है।”

“Most of the knowledge which people have, about social relations is derived from uncontrolled observation whither participant or non-participant .

W.J.Goodeand P,K.Hatt: p.120

(02) – सहभागिता आधारित / Participation based

(a) – सहभागी अवलोकन / Participant observation –

सहभागी अवलोकन को असंरचित अवलोकन (Unstructured Observation) भी कहते हैं। इसमें अध्ययन से सम्बन्धित समूह का अंग बनकर अवलोकन कर्त्ता तत्सम्बन्धी क्रियाओं में खुद सहभागी बनकर अवलोकन करता है तथा आंकड़े प्राप्त करके अभिलेख तैयार करता है।

(b) – असहभागी अवलोकन / Non-participant observation-

असहभागी अवलोकन को संरचित अवलोकन (Structured Observation) भी कहा जाता है। इसमें खुद सहभागी न बनकर सामान्य परिस्थितियों में सम्बन्धित समूह के व्यक्तियों का अवलोकन किया जाता है।

                                  [B]   साक्षात्कार प्राविधि (Interview Technique) –

जब शोधकर्त्ता तत्सम्बन्धी प्रयोज्य से उसकी मनोवृत्तियों, रुचियों, योग्यताओं, अभिवृत्तियों से सम्बन्धित तथ्यों का सङ्कलन आमने सामने की बातचीत के माध्यम से करता है। तो इसे साक्षात्कार प्राविधि कहा जाता है। इस सम्बन्ध में जॉन डब्लू बेस्ट (John W Best) के अनुसार

“साक्षात्कार एक मौखिक प्रश्नावली है। उत्तर को लिखे बिना विषयी अथवा साक्षात्कार देने वाला आमने सामने आत्मीयता से वांछित सूचना मौखिक रूप से देता है।”

“The interview is an oral questionnaire installed of writing the response, the subject or interviewer gives the needed information verbally in a face to face relationship.”

 John W Best op.cit. p.182

साक्षात्कार से सम्बन्धित तथ्यों के आधार पर सामान्य रूप से चार भागों में विभक्त किया जा सकता है।

1 – उद्देश्य समर्पित साक्षात्कार /Objective dedicated interview –

2 – अन्तः क्रिया आधारित साक्षात्कार / Interaction based interview

3 – संख्या आधारित साक्षात्कार / Number based interview

4 – संरचना आधारित साक्षात्कार / Structure based interview

1 – उद्देश्य समर्पित साक्षात्कार /Objective dedicated interview –

  • a- निदानात्मक साक्षात्कार / diagnostic interview
  • b- उपचारात्मक साक्षात्कार / therapeutic interview
  • c- शोध साक्षात्कार / research interview

2 – अन्तः क्रिया आधारित साक्षात्कार / Interaction based interview

      a- केन्द्रित साक्षात्कार / Focused interview

  • b- अनिर्देशित साक्षात्कार / Unguided interview
  • c- पुनरावृत्त साक्षात्कार / Repeated interview

3 – संख्या आधारित साक्षात्कार / Number based interview

  • a- व्यक्तिगत साक्षात्कार
  • b- सामूहिक साक्षात्कार

4 – संरचना आधारित साक्षात्कार / Structure based interview

  • a- संरचित साक्षात्कार / Structured interview
  • b- असंरचित साक्षात्कार / Unstructured interview(

                                             [C] – समाजमितीय प्राविधि ( Sociometric Technique) –

विविध सामाजिक परिस्थितियों व समूह के सदस्यों के पारस्परिक व्यावहारिक सम्बन्धों व पसन्द नापसन्द का  समाजमिति प्राविधि द्वारा किया जाता है। समाजमितिका अर्थ स्पष्ट करते हुए जॉन डब्लू बेस्ट (John W Best)  महोदय ने लिखा है –

“समाजमिति सामाजिक सम्बन्धों का वर्णन करने के लिए एक प्राविधि है, जो एक समूह में व्यक्तियों के मध्य विद्यमान है।”

“Sociometry is a technique of describing social relationships that exist between individuals in a group.”

 John W Best op.cit. p.191

समाजमितीय तकनीक से प्राप्त आंकड़ों को समाजमितीय मेट्रिक्स , समाज आलेख, समाजमितीय सूचकांक आदि के द्वारा विश्लेषित किया जा सकता है।

द्वित्तीयक समंकों का संग्रहण / Collection of Secondary Data

जब द्वित्तीयक समंकों की बात करते हैं तो इसका सीधा सा आशय है कि वह समंक जो पहले ही उपलब्ध है इसको न केवल एकत्रित किया गया है बल्कि इसका विश्लेषण भी किया जा चुका है। द्वित्तीयक समंकों का प्रयोग करते समय शोधार्थी को विविध स्रोतों पर गौर करना होता है। समझ बूझ कर उनका चयन शोधार्थी पर निर्भर करता है। सामान्यतः ये प्रकाशित होते हैं। यथा :-

1 – विविध आधिकारिक वेव साइट्स से

2 – शासन के विविध प्रकाशनों में

3 – अन्तर्राष्ट्रीय निकायों व उनके सहायक संगठनों का प्रकाशन

4 – तकनीकी व व्यापक पत्रिकाओं द्वारा

5 – पुस्तक,पत्रिकाओं व समाचार पत्रों से

6 – विविध बैंक, स्टॉक एक्सचेंज, संघों की रिपोर्ट से

7 – विश्व विद्यालय व अर्थशास्त्रियों की रिपोर्ट द्वारा

8 – विविध ई पत्रिकाओं से

9 – सार्वजनिक रिकार्ड, आंकड़ों व ऐतिहासिक प्रकाशित दस्तावेजों से  

10 – अन्य विविध स्रोतों से    

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