बोलो भाई अब क्या होगा, क्या होगा हाँ क्या होगा ?
अब दुश्मन से रण होगा, औ सुनो महा भीषण होगा ।
कब तक भारत माता का, यूँ लहू बहाया जाएगा ।
निर्दोष मासूम नागरिक को, आखिर कब तक वो खायेगा।
कब तक जन गण के मन को, गुमराह कराया जाएगा।
जो लहू गिरा इस धरती पर, उसका हिसाब कब आएगा।
मारने वालों का क्या होगा, क्या न्यायिक पक्ष सबल होगा।
देखें खल-बल कितना होगा। घात, प्रतिघात प्रबल होगा ।
बोलो भाई अब क्या होगा, क्या होगा हाँ क्या होगा ?
अब दुश्मन से रण होगा, औ सुनो महा भीषण होगा ।01।
कब तक बुद्ध के भारत को,छद्म रण से लड़ दहलायेगा।
कब तक जाँबाज़ के सीने पर, छल ज़ख्म लगाया जाएगा।
कब तक भारतीय जनमानस को यूँ ही फुसलाया जाएगा।
मेरे भारत के दुश्मन को, कब धरती से मिटाया जाएगा
ज़ख्मों में ध्यान से देखोगे, कितना लावा उबला होगा।
जब पिघला ये लावा बरसेगा, खल सोचे तब क्या होगा।
बोलो भाई अब क्या होगा, क्या होगा हाँ क्या होगा ?
अब दुश्मन से रण होगा, औ सुनो महा भीषण होगा ।02।
कायरता उसने समझा है, बार बार समझाने को,
श्वान दुम है जग – जाहिर, हरगिज न सीधा होगा।
जब दुनियाँ के नक़्शे से, बदनुमां दाग मिट जाएगा,
दुनियाँ देखेगी उसको, वो दिन कितना सुन्दर होगा।
जब वतन के इन गद्दारों का, टुकड़ा टुकड़ा मिट जाएगा।
भारत का मुकद्दर चमकेगा और यहां अमन आ जाएगा।
बोलो भाई अब क्या होगा, क्या होगा हाँ क्या होगा ?
अब दुश्मन से रण होगा, औ सुनो महा भीषण होगा ।03।
दिल्ली में धमाका कर उसने शायद ये सोचा होगा,
पुनः डोज़ियर आएगा, दुनियाँ को फिर धोखा होगा।
अब की रण में सारे छल का, हिसाब चुकता हो जाएगा।
छल के बल पर मानवता को, कब तक वो मिटाता जाएगा।
धर्म की आड़ में अधर्म का, नाटक यह महँगा होगा।
दामन पे दाग जो लगा दिए ,सारा हिसाब देना होगा।
बोलो भाई अब क्या होगा, क्या होगा हाँ क्या होगा ?
अब दुश्मन से रण होगा, औ सुनो महा भीषण होगा ।04।

