प्रचलन

विविध विचारकों और विविध क्षेत्र के विद्वानों ने इसे अपने परिक्षेत्र से जोड़ कर विवेचित किया है। असल में फैशन एक व्यापक शब्द है हिन्दी में इसका अर्थ बताने वाले शब्द पूरा चित्र खींचने में कुछ कम समर्थ दीखते हैं। अपने व्यावहारिक जीवन में इसका प्रयोग अक्सर देखने को मिलता है। पहनावा को फैशन का एक अंग माना जा सकता है पर्याय नहीं।

फैशन की परिभाषाएं / Definitions of Fashion –

फैशन को व्यावहारिक जीवन में गहने, वस्त्र, घर, पुल, होटल सभी हेतु अलग अलग अन्दाज़ से अभिव्यक्त किया जाता है विविध विचारकों ने इसे जिस प्रकार पारिभाषित किया है उसे इस प्रकार विवेचित कर सकते हैं –

कोको शनेल महोदय जो कि एक प्रसिद्ध डिजाइनर व लेखिका हैं कहती हैं –

“फैशन केवल कपड़ों में नहीं होता है, फैशन आसमान में है, सडकों पर है, फैशन का सम्बन्ध हमारे विचारों से है हमारे जीने के तरीके से है और जो कुछ भी घटित हो रहा है उससे है।”

“Fashion is not limited to clothing; it exists in the sky and on the streets. It is connected to our thoughts, our way of life, and everything that is happening around us.”

रॉस महोदय इस सम्बन्ध में कहते हैं –

“फैशन का तात्पर्य जनसमूह की पसन्दों में पुनरावर्तक परिवर्तनों के अनुक्रम से है, जिनमें उपयोगिता निहित हो सकती है, किन्तु वे उपयोगिता द्वारा निर्धारित नहीं होते हैं ।”

“Fashion is a series recurring in the choices of a group of people which, though may be accompanied by utility, are not determined by it.” 

मैकाइवर महोदय फैशन के सम्बन्ध में कहते हैं –

“फैशन किसी प्रथागत विषय या ढर्रे पर सामाजिक रूप से स्वीकृत विविधताओं का एक क्रम है।”

“Fashion is a sequence of socially accepted variations upon a conventional subject or pattern.”

हर्बर्ट स्पेंसर महोदय फैशन के सम्बन्ध में कहते हैं –

“फैशन प्रथाओं का एक समान स्तर बनाने वाला साधन है। “

Fashion is a means of establishing a common level of practices. 

उक्त परिभाषाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि फैशन किसी विशेष कालखण्ड में समाज के द्वारा अपनाया गया व्यवहार या सलीका होता है जो अल्प  कालखण्ड में तो अत्याधिक लोकप्रिय होता है लेकिन दीर्घकाल में परिवर्तित हो जाता है।

फैशन की प्रकृति या फैशन की विशेषताएं / The nature of fashion or the characteristics of fashion –      पहनावा, वास्तु कला, भोजन, साहित्य, कला, बदलाव के रुझान सभी फैशन से प्रभावित होता है। संस्कृति व रीति रिवाज का प्रभाव भी इसकी प्रकृति व विशेषताओं को प्रभावित करता है। इसकी प्रकृति व विशेषताओं को समझने हेतु कुछ बिन्दुओं का आधार लेना उचित रहेगा।

01 – नवाचार है फैशन का आधार / Innovation is the foundation of fashion.

02 – फैशन सामाजिक स्वाभाविक पसन्द / Fashion: A natural social preference

03 – फैशन जन समूह की पसन्द / Fashion group of people favorite.

04 – फैशन सन्तुष्टि का आधार / Fashion as a Basis for Satisfaction

05 – फैशन अस्थाई है / Fashion is temporary

06 – नवीनता, फैशनका आधार / Novelty, the foundation of fashion

07 – फैशन विस्तृत होता है। / Fashion is broad.

08 – फैशन अनुकरणीय / Exemplary fashion

09 – फैशन उपयोगी हो जरूरी नहीं / Fashion does not necessarily have to be functional.

10 – कभी कभी फैशन अन्धानुकरण / Sometimes, fashion is blind imitation.

फैशन के विकास के कारण / Reasons for the development of fashion –

फैशन के निर्धारक तत्वों का यदि विश्लेषण किया जाए तो मानव फैशन सम्बन्ध व  फैशन के मनोविज्ञान का पता चलता है। वास्तव में इसके बीज मानव मष्तिष्क में निहित हैं। इसका निर्धारक कारण कोइ एक नहीं है बल्कि विविध कारक  फैशन के विकास का मार्ग बनाते हैं। श्रृंगार और पहनावे पर कटाक्ष उचित मानसिकता नहीं है और फैशन यहीं तक सीमित नहीं है।  फैशन के विकास के कुछ कारण इस प्रकार दिए जा सकते हैं –

01 – परिवर्तन की प्रवृत्ति / Inclination towards change

02 – नवाचार से जुड़ाव / Engagement with innovation

03 – प्रगति आकांक्षा व दिखावा / Progress, aspiration, and ostentation

04 – भौतिक चकाचौंध / Material dazzle

05 – नवीनता के प्रति आकर्षण / Attraction towards novelty

06 – व्यक्तिगत छाप की इच्छा /  Desire for a personal imprint

07 – हीन भावना का निवारण / Overcoming feelings of inferiority

08 – अहम् की सन्तुष्टि / Ego satisfaction

09 – समूह दवाब का प्रभाव / The impact of group pressure

10 – जिज्ञासा / Curiosity

11 – सम्यक समायोजन / proper adjustment

यह सारे बिन्दु यह स्पष्ट करते हैं कि यह अलग अलग मानव में भिन्न हो सकता है सामान्यतः ये कारण नज़र आते हैं लेकिन इनकी इससे बहुत अधिक संख्या से इंकार नहीं किया जा सकता। किम्बल यंग महोदय के ये शब्द आज इतने वर्षों बाद भी प्रासंगिक हैं जिसमें उन्होंने कहा –

“फैशन की परिभाषा दी जा सकती है कि फैशन वह प्रचलित व्यवहार या रिवाज, ढंग, रीति या अभिव्यक्ति की विशेषता, उन विशेष सांस्कृतिक शीलगुणों का प्रस्तुतीकरण या अवधारणा है, जिन्हें बदलने की अनुमति स्वयं प्रथा द्वारा मिलाती है। ”    

“Fashion may be defined as the current or prevailing usage, mode, manner or characteristic of expression, presentation of conception of those particular cultural traits which custom itself allows to change.” – K, Young 1953

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