वास्तव में कुछ चीजें होती हैं और कुछ उस आधार पर बनती हैं जैसे नदी होती है और नहरें बनती हैं। इसी तरह हमारे पास हमारा शरीर होता है लेकिन हमारी सोच बनाने से बनती है। हम जो आज हैं यह अपनी पूर्ववर्ती सोच के कारण हैं। जो हम कल होंगे वह आज की सोच का परिणाम होगा। सृजनकर्त्ता के व्यक्तित्त्व को समझना आसान नहीं होता उसके मस्तिष्क में विस्तृत आकाश होता है उसमें छिपे सृजन के बीज दिखाई तो नहीं पड़ते लेकिन परिणाम सामान्यजन को उसका बोध अवश्य करा जाते हैं।

विगत दो सहस्त्राब्दि अर्थात 2000 वर्षों की पूर्णता के पश्चात नई शताब्दी के एक चौथाई वर्ष यानि कि 25 वर्ष बीतते हुए हममें से कई लोगों ने देखे होंगे और कई नवजवानों ने नहीं। विगत वर्ष 2025 अलग अलग लोगों को अलग अनुभूति कराने वाला रहा है और यह नववर्ष 2026 भी विविध परिणाम प्रदाता की भूमिका का निर्वहन करेगा। मानव मात्र का स्वभाव प्रगति उन्मुख रहा है इस लिए वह बेहतर, सुखद सकारात्मक परिणामों की कामना करता है लेकिन केवल कामना या सोचने से कार्य सिद्धि नहीं होगी उसके लिए सकारात्मक प्रयास अवश्यम्भावी होंगे। आपने सुना भी होगा।   

“उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः ।

 न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः।।

2026 को 2025 से इन 10 आधारों पर बेहतर बनाया जा सकता है –

01 – सफलता का समग्र कार्यक्रम / A holistic program for success

02 – उद्देश्य को छोटे छोटे हिस्से में समयबद्ध लक्ष्य पूर्ति / Break down your goals into small, timely goals

03 – स्वानुसाशन / Self-discipline

04 – स्वप्रेरणा /Self-motivation

05 – नियमित स्वस्थ दिनचर्या /Regular, healthy routine

06 – सम्यक कृत्य निरीक्षण व परिमार्जन /Inspection and refinement of proper actions

07 – जोखिम लेने की क्षमता वृद्धि /By Increasing risk-taking ability

08 – तर्क सङ्गत व्यय / Reasonable spending

09 – स्वयं पर विश्वास / Self-confidence

10 – सकारात्मक दृष्टिकोण / Positive attitude     

यह १० तथ्य एक मजबूत आधार बनाने हेतु हैं जब हमारा लक्ष्य हमारे जेहन में स्पष्ट होगा तो हमें अपने आप उस दिशा में प्रगति के विविध आलम्ब दिखाई देंगे। जब आपने ठान लिया तो निश्चित रूप से वर्ष 2026, विगत वर्ष 2025 से अवश्य अच्छा होगा क्योंकि सच्चे कर्मयोगी लक्ष्य प्राप्ति हेतु ही पृथ्वी पर आये हैं। 

  

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