आई है,आई है शिवरात्रि, स्वप्न हुआ साकार,

निराकार से आज ही प्रगट हुआ साकार।

फागुन कृष्णा चतुर्दशी तिथि को मिला वो वार,

माँ पार्वती से मिलन का, अद्भुत यह त्यौहार।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय ।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय । 1

शिव रात्रि की रात्रि को प्रगटा लिङ्गाकार,

मिलन हुआ शिवशक्ति का छाया हर्ष अपार।

पुरुष – प्रकृति मिलन का, अद्भुत है ये वार,

सब सङ्कीर्ण विचारों को, मिलता कारागार।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय ।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय । 2

अज्ञानता की रात्रि पर, चेतनता का वार,

रात्रि जागरण साधना फल देती हर बार।

भ्रम, संशय सारे मिटें, ज्ञान का होत प्रसार,

ऊँ नमः शिवाय का जप होता बारम्बार।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय ।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय । 3

नटराज के ताण्डव का है प्रसिद्द यह वार,

राहु दोष से मुक्ति का अद्भुत है ये द्वार।

रावण के और राम के प्रेम को मिला प्रसार,

दूध, शहद, बेल-पत्र में छिपा है शिव का प्यार।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय ।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय । 4

आत्म जागरण है सम्भव, शिव कृपा का ये आधार,

आवागमन के बन्धन कटते, मुक्ति का आगार।

धन्य, धन्य सद्भावना, प्रगटे भक्ति अपार,

कृपा मिले शिव शक्ति की आनन्द बारम्बार।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय ।

बोलो ऊँ नमः शिवाय, बोलो ऊँ नमः शिवाय । 5

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