Education Aacharya - एजुकेशन आचार्य
  • शिक्षा
  • दर्शन
  • वाह जिन्दगी !
  • शोध
  • काव्य
  • बाल संसार
  • विविध
  • समाज और संस्कृति
  • About
    • About the Author
    • About Education Aacharya
  • Contact

शिक्षा
दर्शन
वाह जिन्दगी !
शोध
काव्य
बाल संसार
विविध
समाज और संस्कृति
About
    About the Author
    About Education Aacharya
Contact
Education Aacharya - एजुकेशन आचार्य
  • शिक्षा
  • दर्शन
  • वाह जिन्दगी !
  • शोध
  • काव्य
  • बाल संसार
  • विविध
  • समाज और संस्कृति
  • About
    • About the Author
    • About Education Aacharya
  • Contact
काव्य

बिलकुल मतलब नही होता है।

May 4, 2025 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

जब मन, मन से मिल जाता है,

और धन आगम बन जाता है।

तब इस जाति उस जाति का,

बिलकुल मतलब नही होता है।1।

जब घायल होकर कोई तन

लहू के लिए तड़पता है

वह शोणित है किस जाति का

बिलकुल मतलब नही होता है।2।

जब वृद्ध मरे कोई फाके से, 

फिर कोई तेरहवीं करता है। 

तब होने वाली उस दावत का 

बिलकुल मतलब नही होता है।3।

जब घर पर तेरी माता भूखी है,

और तू भण्डारा करता है।

तब जय माता दी कहने का

बिलकुल मतलब नही होता है ।4।

जब घर पर मातम होता है,

घर का बालक नहीं पढ़ता है।  

तब फिर इस तीर्थ यात्रा का, 

बिलकुल मतलब नही होता है ।5।

इस जीवन के संघर्षों से ,

बच कर जब कोई निकलता है।  

तब केवल कर्मकाण्डों का, 

बिलकुल मतलब नही होता है ।6।

घर घोर अभाव में चलता है,

तू दान पूण्य सब करता है।

तब फिर इस आयोजन का

बिलकुल मतलब नही होता है ।7।

तूने खूब कमाया खाया है,

बच्चों को शिक्षा दी ही नहीं ।  

तब फिर बन्धु इस जीवन का, 

बिलकुल मतलब नही होता है ।8।

जब ट्रेन गई स्टेशन से ,

और बाद में वहाँ पहुँचते हो।  

तब क्षमा याचना करने का, 

बिलकुल मतलब नही होता है ।9।

फसल सूख गई बिन जल के, 

तिनका तिनका बन बिखर गई।

तब फिर घनघोर से वर्षण का

बिलकुल मतलब नही होता है ।10।

क्षुधा- पूर्ति करने को यदि ,

सब डिब्बा बन्द ही खाते हो ।  

मानस पर घोर नियन्त्रण का, 

बिलकुल मतलब नही होता है ।11।

व्यायाम कभी गर किया नहीं,

रोगों का घर तन बना लिया।  

तब बाद के प्राणायामों का, 

बिलकुल मतलब नही होता है ।12।

गर जीवन में कुछ करना है,

और काम समय पर किया नहीं।  

तब फिर यूँ किए परिश्रम का, 

बिलकुल मतलब नही होता है ।13।

Share:
Reading time: 1 min
वाह जिन्दगी !

नव उन्नति पथ गढ़ने दो।

September 13, 2020 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

जीवन की संध्या बेला में,

प्रीती का झरना बहने दो,

मन के ये सूने आँगन में,

उत्साह पूर्णतः खिलने दो।

जीवन की आपा धापी में,

जो कार्य रहे हैं करने दो

आभासी सत्य थे जीवन में

यथार्थ रंग अब भरने दो ।

जो रूढ़ियाँ ढोईं जीवन में,

मुक्त बयार अब चलने दो,

जो झूठ बसे घर आँगन में

उन्हें दहन अब करने दो।

जो गीत लिखे थे मधुवन में

उन्मुक्त भाव से पढ़ने दो।

व्यापक मन्तव्य स्थापन में

जीवन का सत जुड़ने दो।    

जो गुजरा है इतिहासों में

वर्तमान में साखें गढ़ने दो,

जञ्जीर न हो कोई पैरों में,

उन्मुक्त भाव से चलने दो।

परम्परा के ताने बाने में

नवसूर्य आज चमकने दो

भारत के कोने – कोने में

नव उन्नति पथ गढ़ने दो ।

Share:
Reading time: 1 min
वाह जिन्दगी !

कहो कैसे हो मन कैसा है ?

August 20, 2020 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

लोग पूछते हमसे अब, कहो कैसे हो मन कैसा है।

उत्तर बनते पुनः प्रश्न सत्य समय सापेक्ष है जैसा है।।

मेरी साँसों की सरगम में, अनहद नाद ये कैसा है,

क्या अब मैं कर रहा प्रयाण यहाँ अवसाद कैसा है,

मैं कौन हूँ, कहाँ से हूँ, कहाँ अब  मुझको जाना है,

है काल चक्र का परिवर्तन, मगर ये काल कैसा है।

लोग पूछते हमसे अब, कहो कैसे हो मन कैसा है।

उत्तर बनते पुनः प्रश्न सत्य समय सापेक्ष है जैसा है।।

सम्बन्धों का ताना बाना ये नूतन भ्रम जाल कैसा है

जन्मने और मरने का यह अजब क्रमजाल कैसा है,

आवागमन का चक्कर क्या क्यों यह आना जाना है,

कैसी लीला किसकी लीला सारा ये चक्कर कैसा है।

लोग पूछते हमसे अब, कहो कैसे हो मन कैसा है।

उत्तर बनते पुनः प्रश्न सत्य समय सापेक्ष है जैसा है।।

यह तेरा, मेरा उसका है सारा यह चक्कर कैसा है,

जन्ममरण क्यूँ कर होते ये सब घनचक्कर कैसा है,

कभी दीखता शुभ, शुभ कभी अशुभों का आना है,

ये धरती और जगत है क्या ये मौसम कैसा कैसा है।

लोग पूछते हमसे अब, कहो कैसे हो मन कैसा है।

उत्तर बनते पुनः प्रश्न सत्य समय सापेक्ष है जैसा है।।

सृजन है क्यों? प्रलय है क्या? ये विश्वमेला कैसा है,

कौन इसको चलाता क्यों कौन कहता सब पैसा है,

हम सब यूँ ही झगड़ते हैं, यह खेल सारा बेगाना है,

यह ऐसा है, वह वैसा है, हम ना जाने सब कैसा है।

लोग पूछते हमसे अब, कहो कैसे हो मन कैसा है।

उत्तर बनते पुनः प्रश्न सत्य समय सापेक्ष है जैसा है।।

जो है, जैसा है, वैसा है बस यह प्रश्न रहेगा कैसा है,

बुद्धि में बल नहीं जो सुलझाए कि कब क्यों ऐसा है,

झड़ी प्रश्नों की लगी मन में व्यथित मन अकुलाना है,

प्रश्न भी मेरे उत्तर भी मेरे हम क्या बतलायें कैसा है।

Share:
Reading time: 1 min
वाह जिन्दगी !

मुझसे कितना दूर भागता मेरा मन ? 

June 1, 2020 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

मेरा बिलकुल कहा न करता मेरा मन,

क्या यह सम्भव है दोनों में अन बन पन ?

बहु बन्धन में बस बँध जाता मेरा तन,

पर बिल्कुल, स्वच्छन्द घूमता मेरा मन।

मुझसे कितना दूर .. .. .. ..

अन्तर्मुखता से जुड़ता जाता है यह तन,

पर बहिर्मुखी बनता जाता है, मेरा मन।

कर्त्तव्यपथ पर बढ़ने को तत्पर यह तन,

पर केवल अधिकार चाहता है ये मन।

मुझसे कितना दूर .. .. .. ..           

गुत्थम – गुत्था होता रहता है तन मन,

ऐसा लगता नहीं किसी से कोई कम।

जीवन यापन को प्रस्तुत होता है तन,

कल्पना जगत में रह जाता बेचारा मन।

मुझसे कितना दूर .. .. .. ..

समझ समस्या सुलझाने को तत्पर तन,

पर मन उड़ता लेने को आकाश कुसुम।

आवारागर्दी से मन की, तपता है तन ,

पर बाज नहीं आता फितरत से मेरा मन।

मुझसे कितना दूर .. .. .. ..

सभी विवशताओं से विवश होता है तन,

लेकिन सारी डोर काट, उड़ जाता मन।

धरातलीय ठोकर खाने को प्रस्तुत तन,

पर सब तथ्यों को हल्के में लेता है मन।   

मुझसे कितना दूर .. .. .. ..

ऐसा कब तक द्वन्द चलेगा ऐ तन मन ,

दोनों में अब संगत करवा दे अन्तर्मन।

जीवन के चलने तक चलता है ये तन,

तन के साथ ‘ नाथ ‘ हरण होता है मन।

मुझसे कितना दूर .. .. .. ..

Share:
Reading time: 1 min

Recent Posts

  • SOCIAL MOBILITY AND SOCIAL CONTROL IN REFERENCE TO EDUCATIONAL DEVELOPMENT
  • SCHOOL AND OUT OF SCHOOL
  • भद्रा/ Bhadra
  • होली आई है।
  • Maladjustment

My Facebook Page

https://www.facebook.com/EducationAacharya-2120400304839186/

Archives

  • March 2026
  • February 2026
  • January 2026
  • December 2025
  • November 2025
  • October 2025
  • September 2025
  • August 2025
  • July 2025
  • June 2025
  • May 2025
  • April 2025
  • March 2025
  • February 2025
  • January 2025
  • December 2024
  • November 2024
  • October 2024
  • September 2024
  • August 2024
  • July 2024
  • June 2024
  • May 2024
  • April 2024
  • March 2024
  • February 2024
  • September 2023
  • August 2023
  • July 2023
  • June 2023
  • May 2023
  • April 2023
  • March 2023
  • January 2023
  • December 2022
  • November 2022
  • October 2022
  • September 2022
  • August 2022
  • July 2022
  • June 2022
  • May 2022
  • April 2022
  • March 2022
  • February 2022
  • January 2022
  • December 2021
  • November 2021
  • January 2021
  • November 2020
  • October 2020
  • September 2020
  • August 2020
  • July 2020
  • June 2020
  • May 2020
  • April 2020
  • March 2020
  • February 2020
  • January 2020
  • December 2019
  • November 2019
  • October 2019
  • September 2019
  • August 2019
  • July 2019
  • June 2019
  • May 2019
  • April 2019
  • March 2019
  • February 2019
  • January 2019
  • December 2018
  • November 2018
  • October 2018
  • September 2018
  • August 2018
  • July 2018

Categories

  • Uncategorized
  • काव्य
  • दर्शन
  • बाल संसार
  • मनोविज्ञान
  • वाह जिन्दगी !
  • विविध
  • शिक्षा
  • शोध
  • समाज और संस्कृति
  • सांख्यिकी

© 2017 copyright PREMIUMCODING // All rights reserved
Lavander was made with love by Premiumcoding