दुष्कर पथ है अजब है मौसम

मगर युवा तो उठा नहीं है।

दुरूह जग में चलो तो हरदम,

यह बात उनको पता नहीं है।

कहाँ जा रहे हो मेरे हरदम,

क्या उद्देश्य ही पता नहीं है ।01।

उदास चेहरा, हो क्यों गुमसुम,

क्या जीत का फल चखा नहीं है।

गरीब हो क्या या है हिम्मत कम,

हौसलों का घर, क्या दिखा नहीं है।   

कहाँ जा रहे हो मेरे हरदम,

क्या उद्देश्य ही पता नहीं है।02।  

युवा हो गर तुम क्यों है दिशा भ्रम,

वायु वेग भी क्या पता नहीं है ?

छलबल है प्रबल डगमग हैं कदम,

सफलता का कोई शॉर्ट कट नहीं है।        

कहाँ जा रहे हो मेरे हरदम,

क्या उद्देश्य ही पता नहीं है।03।

फलित हैं जो बन. विनत रहे हरदम,

ऐंठे हो जो तुम, विनम्रता पता नहीं है।

गरूर धन का क्यों दिखता हरदम,

सगा नहीं है धन, क्यों पता नहीं है।            

कहाँ जा रहे हो मेरे हरदम,

क्या उद्देश्य ही पता नहीं है ।04।

नशे में रहते तुम, सत्सङ्ग हुआ है कम,

सही गलत का अबतक पता नहीं है।

गर तुम हारोगे, खुद से ही हरदम,

घिरेगा तब तम,  कोई सगा नहीं है।                

कहाँ जा रहे हो मेरे हरदम,

क्या उद्देश्य ही पता नहीं है ।05।

          

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