बचपन में ग़रीबी व कालिमा के साये थे,
इसीलिए ये बच्चे, विद्यालय नहीं आए थे।
केवल कागज़ी योजना बना के क्या लोगे,
मुफ़लिस, जहाँ में हर मौसम ने सताये थे ।
जिन्दगी भर जिन्होंने काँटे ही चुभाए थे,
बाद मरने के वे ही फूल लेकर आए थे ।01।
वोट खातिर, जो वादे आपने गिनाये थे,
उसी आशा में इन्होने सपने सजाए थे।
सपनों में आग लगाकर कैसे जी लोगे,
झुलसे दग्ध चेहरे, हाँ तुमने जलाये थे।
जिन्दगी भर जिन्होंने काँटे ही चुभाए थे,
बाद मरने के वे ही फूल लेकर आए थे ।02।
‘का वर्षा जब कृषि सुखानी‘ समझाए थे,
भौतिक चकाचौंध में आप क्यों समाए थे।
मरने पर सहायता दे कर क्या कर लोगे ?
जीवन रक्षा सूत्र, तब क्यों नहीं लगाए थे।
जिन्दगी भर जिन्होंने काँटे ही चुभाए थे,
बाद मरने के वे ही फूल लेकर आए थे ।03।
बहुत सारे वर्ग भेद उस समय बताए थे,
बाद में जान पाए, सब तुमने ही बनाए थे।
मानवता को दानवता बना क्या कर लोगे ?
काल निश्चित है, ये क्यों न समझ पाए थे।
जिन्दगी भर जिन्होंने काँटे ही चुभाए थे,
बाद मरने के वे ही फूल लेकर आए थे ।04।
आन्दोलनों में सब सर्वहारा ही आये थे,
आपने अपने बच्चे तब कहाँ छिपाए थे।
आमजन की बरबादी से क्या ले लोगे,
‘नाथ‘ ज्ञान चक्षु सब इन्होने फुड़वाए थे।
जिन्दगी भर जिन्होंने काँटे ही चुभाए थे,
बाद मरने के वे ही फूल लेकर आए थे । 05।
जिन्दगी भर जिन्होंने काँटे ही चुभाए थे,
बाद मरने के वे ही फूल लेकर आए थे ।

