तन गाड़ी चलती जानी है, ये परम धाम तक जाएगी,

नहीं चलेगा साथ कोई निज करनी टिकट दिलाएगी,

मोक्ष धाम की टिकट प्राप्ति, सद्कर्मों से हो पाएगी ,

यदि स्तर कुछ निम्न रहा इस जग में पुनः ले आएगी।

आ जाएगा आनन्द हमें, तन मृत्यु आनन्द दिलाएगी।

अटूट श्रद्धायुक्त विश्वास रखो मृत्यु आनन्द दिलाएगी,

मृत्यु शरीर की होती है, आत्मा तो अजर कहलाएगी,

नूतन शरीर धारण होगा या हमें मुक्ति मिल जायेगी ,

तय अमरता आत्मा की सद्कर्म से गति मिल पाएगी।

आ जाएगा आनन्द हमें, तन मृत्यु आनन्द दिलाएगी।

आसक्ति रहेगी यदि बाकी, मृत्यु कठिन हो जाएगी,

अपूर्ण कार्य पूर्ण करने,नवशरीर धर आत्मा आएगी,

जग से सम्बन्ध बिसारोगे तब ही मुक्ति मिल पाएगी,

आनन्द की यात्रा ही इकदिन वांछितलक्ष्य दिलाएगी।

आ जाएगा आनन्द हमें, तन मृत्यु आनन्द दिलाएगी।

कार्यकारण का पावन निर्धारण ईश सत्ता करवाएगी,

मिथ्या आसक्ति मोक्ष तज, जन्म कारण बन जाएगी,

तनविकार व मनविकार फिर दुनियाँ में भटकाएगी,

बार बार मनन चिन्तन करने में हमें देर लग जायेगी।

आ जाएगा आनन्द हमें, तन मृत्यु आनन्द दिलाएगी।।

आसक्ति तजोगे यदि तुमसब बुद्धि निर्मल हो जाएगी,

निर्मल चिन्तन से प्राप्त शक्ति, सद्चिन्तन करवाएगी,

सुप्रारब्ध गठन की शक्तिशुभ अच्छे दर्शन से आएगी,

चिन्तन सशक्त हो जाएगा निश्चित मुक्ति मिल जाएगी।

आ जाएगा आनन्द हमें, तन मृत्यु आनन्द दिलाएगी।।

सब आवागमन क्रमशः टूटेगा, मृत्यु निद्रा सम आएगी,

परमेश्वर में हम लयहोंगे यह सोच आनन्द दिलाएगी,

परमात्मा का परमेश्वर का आलम्ब सृष्टि रख पाएगी,

सारी यात्रा सुगम सुखद होगी मृत्यु थकान मिटाएगी।

आ जाएगा आनन्द हमें,  तन मृत्यु आनन्द दिलाएगी।।

व्यवस्थित होगा ये जीवन व्यवहार में भी लयआएगी,

दुर्भावना समूल भग जाएगी छलछद्म नष्ट हो जाएगी,

जाने की जग से वजह मिले, यात्रा मङ्गल हो जाएगी,

पावन होगा सफर सारा, शवयात्रा पावन हो जाएगी। 

आ जाएगा आनन्द हमें, तन मृत्यु आनन्द दिलाएगी।।

पावन पावन कारण सुनकर मन में सिहरन आएगी,

मोक्ष हुआ निश्चित या फिर, आत्मा सम्बन्ध बनाएगी,

दोनों ही स्थिति मन सुन लो, जिज्ञासा बढ़ती जाएगी,

सद्कर्म प्रवृत्ति बढ़ेगी तब मन में शान्ति छा जाएगी।

आ जाएगा आनन्द हमें, तन मृत्यु आनन्द दिलाएगी।। 

दुनियाँ तो आनी जानी है यह भावना मन में आएगी,

इस जग में कर्म पूरे कर के, जाने की बारी आएगी,

यात्रा के आनन्द की सुन, मन में सुगन्ध छा जाएगी,

पुलकित होगा निर्भयमन अंतिम क्षण स्मृति आएगी।         

आ जाएगा आनन्द हमें, तन मृत्यु आनन्द दिलाएगी।।

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