प्रस्तुत पंक्तियों में ‘मेरी वो बड़ी वो है ‘आप सभी की अपनी अपनी सोच के आधार पर वो के आशय बदल सकते हैं लेकिन यहाँ प्रथम वो से आशय आत्मा और दूसरे वो से आशय शक्तिशाली से है अर्थात प्रकृति से जुड़ाव के पश्चात पुरुष (आत्म स्वरुप )को बोध का संज्ञान है (सांख्य) ।
प्रेम और स्नेह के प्रगटन में शब्दों की भाषा मूक हो शारीरिक भाषा में बदल जाती है शब्द लरज कर होठों में थरथराहट पैदा करते हैं उसी गात भाषा का प्रगटन हैं ये पंक्तियाँ :-