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काव्य

मानव मुस्कुराएगा।[Manav Muskurayega]

October 19, 2018 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

आज का आदमी जो जीवन जीता है,

क्यों लगता है कि वो  खोखला सा है।

वो हँसी, वो ठिठोली आज गुम सी है,

आज जिन्दगी ठहरी हुई नदी सी है।

 

नदी ठहरती है तोअस्तित्व खो देती है,

विगत  को  स्मरण  कर  रो  देती  है।

फोटो से वो आनन्द  नहीं मिलता  है ,

नहाने का झरने में जब वो झरता  है।

 

वाद्य  यंत्रों  के शोर में खुशी ढूंढते हैं,

गीत जो हैं नहीं उनमें संगीत ढूंढते हैं।

पूँजी वाले  सम्बन्धों  में मीत  ढूंढते  हैं,

दिखावटी दुनियाँ, सच्ची प्रीत ढूंढते हैं,

 

कह कर नहीं  कर  के दिखाना  होगा,

नागरिकों को खुद को  सुधारना होगा।

तब  सच्चाई  का  वह  आयाम  आएगा,

उदासी हारेगी और मानव मुस्कुराएगा।

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वाह जिन्दगी !

महत्त्वाकांक्षा का मोती निष्ठुरता की सीपी में पलता है।

October 18, 2018 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments
जिन्दगी अनवरत यात्रा है उत्साह युक्त क्रमिक प्रयास इसे ‘वाह जिन्दगी’ बनाते हैं जबकि थके हारे ,अवसाद ग्रस्त लोगों के लिए ‘आह जिन्दगी’ हो जाती है।

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काव्य

सद्ज्ञान चाहता हूँ। [Sadgyaan Chaahta hun]

October 16, 2018 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

उलझन में घिर गया हूँ, निदान चाहता हूँ।

घनघोर समस्या का, समाधान चाहता हूँ।

गन्दगी रोके वो,       पायदान चाहता हूँ।

देश को समझे,    वो कद्रदान चाहता हूँ।

 

साफ़-सुथरा छोटा सा मकान चाहता  हूँ।

बच्चे पढ़ें सचमुच, वो  मुकाम चाहता हूँ।

आवश्यक मूल-भूत ही सामान चाहता हूँ।

सादा-जीवन,  उच्च – विचार  चाहता हूँ।

 

खूब     श्रम  करके,  थकान  चाहता  हूँ।

कभी- कभी  घर में  मेहमान  चाहता हूँ।

नेक- नीयत  लगन औ  ईमान चाहता हूँ।

इन्सानों  की सूरत में  इन्सान  चाहता हूँ।

 

माता -पिता  सबका,  सम्मान चाहता  हूँ।

ऊर्जा की सकारात्मक पहचान चाहता हूँ।

सशक्त हो, समृद्ध हो, तेजस्वी हो भारत,

भारत की विश्व-भर  में पहचान चाहता हूँ।

 

जिन्दादिली से जिन्दगी के काम चाहता हूँ।

भारत में  गुणवत्ता  का सम्मान  चाहता हूँ।

युवाभारत में युवाओं को मिले जो रोजगार

आराम है हराम, यह  गुणगान  चाहता  हूँ।

 

अधिकार नहीं कर्त्तव्य निर्वाहन चाहता हूँ।

अनुशासन का  देश में  शासन चाहता हूँ।

भारतीयता का देश में आवाहनचाहता हूँ।

रावण को नही चाहता सद्ज्ञान चाहता हूँ।

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वाह जिन्दगी !

हम तो हिन्दुस्तान हैं।(Hm to Hindustaan hean.)

October 15, 2018 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

वो सियासत के बाज हैं और हम तो बस शिकार हैं,

वो खून से  हैं रंगे हुए और  हम तो  बहती  धार  हैं,

मौत का कारण हैं वो, हम जिन्दगी की किताब  हैं,

वो जीत का  प्रतीक हैं और  हम तो इन्कलाब   हैं।

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शोध

परिकल्पना: कार्य, महत्त्व, विशेषता( Hypothesis: Functions, Importance, Characteristics)

by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

                               परिकल्पना के कार्य( Functions of  hypothesis) –

शोधकर्त्ता के हाथ में परिकल्पना एक ऐसा साधन है जो शोध का दिशा निर्धारक व प्रणेता है। वास्तव में परिकल्पना निम्न कार्यों को स्वयं में समाहित कराती है –

(1 )-औचित्य पूर्ण मार्गदर्शन (Proper Guidance )-

परिकल्पना का महत्वपूर्ण कार्य शोधकर्त्ता को उचित दिशा निर्देश उपलब्ध कराना है इससे संदिग्धता व भ्रम की स्तिथि समाप्त हो जाती है एवं सम्यक तथ्यों व आंकड़ों के संकलन को सही दिशा मिल जाती है जिसकी तत्सम्बन्धी शोध हेतु आवश्यकता होती है।

(2)-प्रक्रिया निर्धारक( Determiner of procedure)-

परिकल्पना द्वारा यह स्पष्ट हो जाता है कि कार्य हेतु उपयुक्त तरीका व उत्तम क्रियाविधि क्या होनी चाहिए इससे अनावश्यक भटकाव नहीं होता।

(3)-तथ्यात्मक चयन में महत्वपूर्ण भूमिकाI (Important role in selection of facts)-

इससे समस्या सम्बन्धी तथ्यों का चयन सरल हो जाता है क्योंकि समस्या का दायरा तय हो जाने से तत्सम्बन्धी आंकड़ों का संग्रहण  निश्चित हो जाता है चरों का निर्धारण हो जाने से शोध को सम्यक दिशा प्राप्त हो जाती है।

(4)-पुनरावृत्ति सम्भव (Replication possible)-

शोध निष्कर्षों का मूल्यांकन विश्वसनीयता व वैद्यता की कसौटी पर कसा  जाता है यह विश्वसनीयता व वैद्यता बार बार मुल्यांकनोपरांत सुनिश्चित होता है अतः शोध कार्य में पुनरावृत्ति  सम्भव है जोकि परिकल्पना के अभाव में सम्भव  नहीं है।

(5)- सार निकालने में सहायक (Helps in recapitulation )-

परिकल्पनाओं की स्थिति के विश्लेषणोपरान्त उसकी स्वीकृति या अस्वीकृति तय होती है जो समस्या के चयन,परिकल्पना उद्देश्य निर्धारण ,उपकरण चयन समंक संग्रहण व विश्लेषण की वैज्ञानिक प्रक्रिया से गुजरती है इस प्रकार प्राप्त तथ्यात्मक परिणाम के विवेचन से शोध सार प्राप्त करते हैं जो परिकल्पना अभाव में संभव नहीं।

                             परिकल्पना  का  महत्त्व ( Importance of Hypothesis)

(1)ज्ञान को अद्यतन करने का महत्वपूर्ण उपकरण (Powerful tool for the advancement  of knowledge)-

चूंकि इससे ज्ञान को दिशा मिलाती है इसलिए नवीन ज्ञान तक पहुँचना व उससे जुड़ना सरल हो जाता है जिसे स्वीकारते हुए फ्रेड एन करलिंगर कहते हैं –

परिकल्पनाएँ ज्ञान की समृद्धि हेतु शक्तिशाली उपकरण हैं क्योंकि वे मनुष्य को अपने से बाहर  आने के योग्य बनाती हैं।
“Hypothesis are powerful tools for the advancement  of knowledge because they enable men to get out side himself.”                       – Fred N Karlingar

 (2)- अन्तरिम स्पष्टीकरण में सहायक (Helps in tentative Explanation)-

अनुसंधान कार्यों की संरचना समझना और समझाने योग्य बनाना व सम्यक व्याख्या में परिकल्पना  महत्वपूर्ण योग है जैसा कि चैपलिन महोदय ने कहा –

“परिकल्पना एक अवधारणा है जो अन्तरिम स्पष्टीकरण करती है। “
 “Hypothesis is an assumption which serves as a tentative explanation.”            -Chaplin

(3)-नवीन शोध कार्यों का निर्देशक (Guide  for further investigation)-

परिकल्पना जहां पूर्व कल्पित एवं विचारपूर्ण कथ्य होता है वहीं  भविष्य के शोध हेतु निर्देशन कार्य भी करता है सी0 वी 0 गुड तथा   डी 0 ई 0 स्केट्स  के शब्दों से स्पष्ट  है।

” परिकल्पना एक सुनिश्चित अनुमान या निष्कर्ष होता है जिसे अवलोकित तथ्यों तथा दिशाओं को स्पष्ट करने के लिए एवं अन्वेषण को निर्देशित करने के लिए बनाया जाता है। “
 “A hypothesis is a shrewd guess or interference that is formulated and provisionally adopted to explain observed facts a condition and to guide further investigation.”    C.V. Good, D. E. Scates

(4)-प्रायोगिक परिकल्पनाओं के सत्यापन में सहायक ( Helpful for Experimental Verification )-

परिकल्पना एक महत्वपूर्ण कारक इसलिए भी है क्योंकि इससे आनुभविक या प्रायोगिक परिकल्पना के सत्यापन में मदद मिलती है जैसा कि एम वर्मा के शब्दों से स्पष्ट है :-

“सिद्धान्त जब औपचारिक व स्पष्टता में किसी परीक्षणीय प्रतिज्ञप्ति के रूप में अभिकथित करके आनुभविक या प्रायोगिक रूप से सत्यापित किया जाता है ,परिकल्पना कहा जाता है। “
“Theory when stated as a testable proposition formally,clearly and subjected to empirical or experimental verification is known as hypothesis)”               -M.Varma

             अच्छी परिकल्पना की विशेषताएं (Characteristics of good hypothesis):-

अनुसन्धान परिमाणोन्मुख होता है परिणामों को उचित दिशा व विश्वसनीय बनाने में परिकल्पना के स्तर का विशिष्ट योगदान होता है अनुसन्धानकर्त्ता अपनी समझ विवेक आवश्यकता व उद्देश्य के आधार पर परिकल्पना बनाता है लेकिन अच्छी परिकल्पना  निर्माण शोध को निश्चित ही सम्यक दिशाबोध कराता है एक अच्छी परिकल्पना में निम्न गुणों का समावेशन देखने को मिलता है :-

 (1)- उपयुक्त हल (Adequate Solution )-

एक अच्छी परिकल्पना शोध समस्या को उपयुक्त हल सुझाती है एक समस्या के निदान हेतु विभिन्न उपकल्पनाएँ हो सकती हैंपर समस्या की विभिन्न विमाओं के अध्ययनोपरान्त उपयुक्त हल सुझाने वाली परिकल्पना का चयन करना ही उत्तम होगा।

 (2)-स्पष्टता ( Clarity)-

समस्या में प्रयुक्त चरों के बीच सम्बन्धों को स्पष्ट करने में परिकल्पना को सक्षम होना चाहिए, बोधगम्य परिकल्पना के होने पर शोध को उपयुक्त गरिमा स्तर प्राप्त होगा।

(3)-सरलता (Simplicity )-

परिकल्पना की सरलता प्रयोग को सरल बना देती है इससे उसकी वैधता सरल मापनीय बन जाती है। भ्रम का अन्देशा नहीं रहता इसलिए सुगम बोधगम्य ,स्पष्ट परिकल्पना अपने आप में विशिष्ट होती है।

(4 )-सत्यापनीय (Verifiable )-

परीक्षणीय होना परिकल्पना की महत्वपूर्ण विशेषता है परिकल्पना के रूप में मापनीय कथन का प्रयोग होने से आनुभविक परीक्षण भी सम्भव हो जाता है।

(5 )-विनिर्दिष्टता (Specificity)-

यह परिकल्पना की महत्वपूर्ण विशिष्टता  है एक अच्छी परिकल्पना विशिष्ट क्षेत्र  स्पष्ट निर्देशन व वर्णन में सक्षम होती है अत्याधिक  विस्तृत परिक्षेत्र वाली परिकल्पना का परीक्षण दुष्कर हो जाता है।

(6 )-मितव्ययता(Frugality )-

एक अच्छी परिकल्पना को अधिक व्यय साध्य न होकर मितव्ययी होना चाहिए यह अभाव में प्रभाव दिखाने वाली लघुस्पष्ट  व बोधगम्य हो।

(7 )-तार्किक बोध गम्यता (Logical Comprehensibility )-

एक अच्छी परिकल्पना तार्किक रूप से बोध गम्यताव व्यापकता का गुण स्वयं में सन्निहित रखती है इसके द्वारा सभी महत्वपूर्ण पक्षों के समावेशन का प्रतिनिधित्व तार्किक रूप से दीख पड़ता है।

(8 )-संगतता (Consistency )-

एक अच्छी परिकल्पना समय के साथ भी अच्छा सामञ्जस्य रखती है यह उस समय तक ज्ञात तथ्यों सिद्धान्तों नियमों से संगतता रखती है और निगमनात्मक चिन्तन पर आधारित होती है।

अच्छी परिकल्पना को बनाना श्रम साध्य है  उक्त विशेषता युक्त परिकल्पनाएं अच्छी परिकल्पना की श्रेणी में रखी जा सकती हैं।

 

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काव्य

जय माता दी हो जाता है। [JAY MAATA DEE HO JATA HEA .]

October 9, 2018 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

बलिदानों की मिट्टी से रज-कण चन्दन  हो जाता है,

शीश  गिरे जब सीमा पर माँ का वन्दन हो जाता है,

चढ़े जभी अरिछाती पर,अरिघर क्रन्दन हो जाता है,

वरण हमें जय करती है,माँ अभिनन्दन हो जाता है।

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शोध

शोध परिकल्पना-आशय,प्रकार व स्रोत [Research Hypothesis- Meaning, Types and Sources]

October 8, 2018 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

सर्व राक्षस सङ्घाना राक्षसा ये च पूर्वजाः। अलमेकोअपि नाशाय वीरो वालिसुतः कपिः।।

उक्त पंक्तियों में गीता प्रेस ,गोरख पुर द्वारा प्रकाशित श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण ,द्वितीय खण्ड के एकोनषष्टितमः सर्गः के   14वें श्लोक में हनुमान जी की परिकल्पना है कि :- सम्पूर्ण राक्षसों व उनके पूर्वजों को भी यमलोक पहुँचाने हेतु वाली के वीर पुत्र कपिश्रेष्ठ अङ्गद ही पर्याप्त हैं।

वास्तव में परिकल्पना अन्तिम उत्तर न होकर सुझाया गया कथन या प्रस्ताव ही है।

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काव्य

मृत्यु का अहसास कैसा लगता है ?/MRATYU KA AHSAAS KAISA LAGATA HAI?

September 29, 2018 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

मृत्यु का अहसास कैसा लगता है ?

होना  जिन्दा लाश कैसा लगता है ?

मृत्यु- पूर्व आभास कैसा लगता है ?

श्वास न बने प्रश्वांस कैसा लगता है ?

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Uncategorized•काव्य

मूँछों का सफल अहसास रहने दो/Munchon ka safal ahsaas rahne do.

September 28, 2018 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

किसी भी देश का उत्थान और पतन उस देश के चिन्तन से प्रत्यक्षतः प्रभावित होता है लेकिन चिन्तन की दिशा राष्ट्रवादी करने के लिए कुछ सिद्धान्तों ,मर्यादाओं ,परम्पराओं ,स्तिथियों को ख़ास प्रकार का रहने की आवश्यकता परिलक्षित होती है प्रस्तुत हैं सन्दर्भित भावनाएँ :-

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वाह जिन्दगी !

क्षमा /FORGIVENESS(क्षमा पर्व 26 Sept 2018 पर विशेष )

September 25, 2018 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

मानव का मानवता से मिलन  हो  रहा है।

कालिमा का निजमन से गमन हो रहा है।

सद्भाव से सरल मन का सृजन हो रहा है।

भूमण्डल पर  ‘क्षमापर्व’  वरण हो रहा है।

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