Education Aacharya - एजुकेशन आचार्य
  • शिक्षा
  • दर्शन
  • वाह जिन्दगी !
  • शोध
  • काव्य
  • बाल संसार
  • विविध
  • समाज और संस्कृति
  • About
    • About the Author
    • About Education Aacharya
  • Contact

शिक्षा
दर्शन
वाह जिन्दगी !
शोध
काव्य
बाल संसार
विविध
समाज और संस्कृति
About
    About the Author
    About Education Aacharya
Contact
Education Aacharya - एजुकेशन आचार्य
  • शिक्षा
  • दर्शन
  • वाह जिन्दगी !
  • शोध
  • काव्य
  • बाल संसार
  • विविध
  • समाज और संस्कृति
  • About
    • About the Author
    • About Education Aacharya
  • Contact
वाह जिन्दगी !

हमें क्रोध क्यों आ जाता है।(Hamen krodh kyon aa jata h.

March 5, 2020 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

मानव है सामाजिक प्राणी,

बोध तिरोहित हो जाता है।

बुद्धि ही काम नहीं करती,

सौन्दर्यबोध भी खो जाता है।

हमें क्रोध क्यों आ जाता है।।

दुर्गुणता प्रश्रय को पाती,

सौम्यव्यवहार न रहपाता है।

सद्भाव भावना भी न रहती,

प्रेम भाव सब खो जाता है।

हमें क्रोध क्यों आ जाता है।

उच्च रक्त चाप की प्राप्ती,

नेत्र  लाल  भी हो जाता है।

संयम की क्षमता नहीं रहती,

दिशा बोध भी खो जाता है।

हमें क्रोध क्यों आ जाता है। 

दुर्भावना स्वर ऊँचा करती,

स्नेह पगा स्वर खो जाता है,

बुद्धि हरण सीमा न रहती,

और विवेक मारा जाता है।

 हमें क्रोध क्यों आ जाता है।।

सुरसा फिर शालीनता खाती,

क्या से क्या होता जाता है,

मर्यादा अतिक्रमणता बसती,

आत्म नियन्त्रण खो जाता है।     

हमें क्रोध क्यों आ जाता है।।

ज्वाला तेज धधकती जाती,

कालिमा भाव बस छाजाता है।

उद्वेगों की सरिता बहती,

रक्त अकारण बह जाता है।

हमें क्रोध क्यों आ जाता है।।  

Share:
Reading time: 1 min
दर्शन

तार्किक प्रत्यक्षवाद (Logical Positivism) PART-2

March 3, 2020 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

शिक्षा पर तार्किक प्रत्यक्षवाद का प्रभाव (Impact Of Logical Positivism On Education)-

तार्किक प्रत्यक्षवाद ने शिक्षा के उद्देश्यों, पाठ्य क्रम, शिक्षक एवम शिक्षार्थी, शिक्षण विधियों व अनुशासन को स्वानुसार विवेचित किया जिसे इस प्रकार अभिव्यक्त कर सकते हैं।

उद्देश्य ( Aims ) –

चूंकि ये ज्ञान का आधार अनुभव जन्य ज्ञान को मानते हैं इस लिए सार्थक निरर्थक, ज्ञान अज्ञान एवम नीर क्षीर विवेक में समर्थ ज्ञान को शिक्षा के उद्देश्यों में शामिल करना चाहते हैं और भाषा व स्वशक्ति परिमार्जन पर जोर देते हुए इस प्रकार उद्देश्य निर्धारण करते हैं –

[A ]- सृजनात्मक शक्ति का विकास [Development Of Creativity  ]

[B ]- भाषा पर अधिकार [Command on Language] [C ]- शारीरिक विकास व इन्द्रिय प्रशिक्षण [Physical Development and Sensuous Training ] [D ]- विवेक जागरण [ Intellectual Awakening ] [E ]- विश्वसनीयता एवम वैद्यता [Reliability and Validity] [F ]- व्यावसायिक दक्षता [Vocational Efficiency]

पाठ्य क्रम [Syllabus ]- 

इन्होने विचार, अध्यात्म, पूर्व निश्चित नैतिकता का खण्डन कर प्राकृतिक विज्ञानों की सत्यता को सिद्ध कर पाठ्यक्रम हेतु उपयोगी माना। प्रत्यक्ष अनुभव पर अधिक जोर देने के कारण भाषा, व्याकरण, तार्किकता के महत्त्व को स्वीकार किया। 

शिक्षक और शिक्षार्थी [Teacher And Learner]-

ये वैज्ञानिक सोच वाले यथार्थ के धरातल पर खड़े अध्यापकों को शिक्षा प्रसार हेतु आवश्यक मानते हैं शिक्षा को बालकेन्द्रित करते हुए विद्यार्थियों को उनकी रूचि मानसिक योग्यता क्षमता  को ध्यान में रखते हुए शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए।

अनुशासन [Discipline ] –

ये  प्रमाणिकता, वस्तुनिष्ठता, यथार्थता, अनुभववादिता, कट्टरता विरोध धार्मिकनैतिकता विरोध का समर्थन कर अनुशासन स्थापित करना चाहते हैं।

शिक्षण विधि [Teaching Methodology ]-

इस दर्शन के आधार पर कहा जा सकता है कि ये इन प्रमुख शिक्षण विधियों के समर्थक हैं। –

(1)-  करके सीखना (Learning By Doing)

(2)-  भाषा विश्लेषण विधि (Language Analytical Method)

(3)-  तार्किक विश्लेषण विधि (Logical Analytical Method)

(4)- विज्ञान प्रयोगात्मक विधि (Scientific Experimental Method)

(5)- प्रत्यक्षीकरण विधि (Observation Method )

(6)- आगमन विधि (Inductive Method )

विद्यालय (SCHOOL)-

ये विद्यालयों में प्रबन्धकों के साथ विद्यार्थियों एवम अध्यापकों को शामिल करना चाहते हैं। ये अधिगम के अनुकूल माहौल बनाने व अनुभव के आधार पर उत्तरोत्तर प्रगति के पक्षधर हैं।

शिक्षा सम्बन्धी  अन्य विचार

(a )-  व्यावसायिक शिक्षा

(b )- महिला शिक्षा

(c )- सर्व जनशिक्षा

(d )- नैतिक शिक्षा

(e )- धार्मिक विचार

Share:
Reading time: 1 min
दर्शन

तार्किक प्रत्यक्षवाद (Logical Positivism) Part 1

by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

ज्ञान, अनुभव का अनुगमन करता है अनुभव तर्क विश्लेषण और क्रिया का परिणाम होता है अन्तिम निष्कर्ष के रूप में प्राप्त अनुभव का विश्लेषण भी तर्क के आधार पर किया जाता है इसलिए तार्किक विश्लेषण वाद (Logical Analytic-ism ),तार्किकअनुभववाद Logical Empiricism ),भाषा विश्लेषण वाद(Language Analytic-ism) की जगह तार्किक प्रत्यक्षवाद (Logical Positivism) कहना अधिक युक्ति संगत होगा।

तार्किक प्रत्यक्षवाद से आशय (Meaning Of Logical Positivism) –

जो दर्शन आलोचनात्मक तथा विश्लेषणात्मक चिन्तन पर मुख्य बल देता है कार्यों का तार्किक विश्लेषण कर कार्य कारक सम्बन्धों को तार्किक आधार देता है,तार्किक प्रत्यक्षवाद कहलाता है। 

तार्किक प्रत्यक्षवाद के विभिन्न अवयवों के विश्लेषणोपरान्त कहा  सकता है –

‘तार्किक प्रत्यक्षवाद कोई सामान्य अमूर्त सिद्धान्त नहीं है यह व्यावहारिकता व तार्किकसकारात्मकता का वह मिश्रण है जो सत्यापनशीलता का विशेष गुण तार्किक आधार पर रखता है।’

सोलह कला सम्पूर्ण श्री कृष्णजी ने अपने मुखारबिन्दु से श्रीमद्भगवद गीता के दूसरे अध्याय के ग्यारहवें श्लोक में तार्किक प्रत्यक्षवाद का उदाहरण प्रस्तुत किया है –

अशोच्यानन्व शोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे।

गतासूनगतासूंश्चम नानुशोचन्ति पण्डिताः।। 

अर्थात श्री केशव ने कहा – तुम पाण्डित्यपूर्ण वचन कहते हुए उनके लिए शोक कर रहे हो जो शोक करने योग्य नहीं हैं जो विद्वान होते हैं वे न तो जीवित के लिए न ही मृत के लिए शोक करते हैं।

उक्त कथन तर्क आधारित है और अन्ततः इसकी सत्यापनशीलता सिद्ध होती है।

तार्किक प्रत्यक्षवाद को समझने के लिए इसकी मीमांसाओं का विवेचन आवश्यक है।

तार्किक प्रत्यक्षवाद और इसकी मीमांसाऐं ( Logical Positivism and Its Meemansa)-

ज्ञान के आत्मसातीकरण हेतु उसके दर्शन को जानना और दर्शन के अधिगमन हेतु उसकी तत्व मीमांसा (Meta Physics), ज्ञान व तर्क मीमांसा(Epistemology and Logic) एवं आचार व मूल्य मीमांसा (Ethics and Axiology ) को जानना आवश्यक है।

तत्व मीमांसा (Meta Physics)-

यह मानवीय इन्द्रियों को इतना महत्तव प्रदान करते हैं कि जिसका प्रत्यक्षीकरण इन इन्द्रियों द्वारा सम्भव है उसको सत्य स्वीकारते हैं आध्यात्मिक जगत, ईश्वर आदि को स्पष्ट रूप से नकारते हैं। इनके अनुसार मानव अर्जित ज्ञान व कौशल के आधार पर विकास करता हैऔर भौतिक जगत सत्य है क्योंकि इसका प्रत्यक्ष अनुभव होता है। आध्यात्मिक जगत ,आत्मा परमात्मा को प्रत्यक्ष अनुभव से परे मान अस्वीकारते हैं।

ज्ञान व तर्क मीमांसा (Epistemology and Logic) –

ये किसी भी पूर्व ज्ञान को तब तक ज्ञान नहीं मानते जब तक अनुभव व तर्क द्वारा वह सत्य स्थापित न हो जाए। तार्किक प्रत्यक्ष वादी प्रत्येक ज्ञान को तार्किक रूप से तभी अधिगमन योग्य स्वीकारते हैं जब यह व्यावहारिकता सत्यापनीयता, इन्द्रियों द्वारा अनुभूति सत्यापनीयता व प्रत्यक्ष सत्यापनीयता की कसौटी पर खरा उतर सके।

आचार व मूल्य मीमांसा (Ethics and Axiology) –

ये आचरण हेतु सहयोग, सहिष्णुता, शान्ति, स्वतन्त्रता, सृजनात्मकता व शोषण हीनता को स्वीकार करते हैं। इनके अनुसार कोई भी मूल्य तब तक सारहीन हैं जब तक वह मानव मात्र का कल्याण नहीं करता। उपयोगी मूल्य ही मानव के आचरण में ग्रहणीय होना चाहिए। बर्ट्रेण्ड रसेल, ए ० जे ० मेयर और कार्नप के विचार इस सन्दर्भ में महत्त्व पूर्ण है।

Share:
Reading time: 1 min
वाह जिन्दगी !

प्रगति अवरोध नहीं बनते।

March 2, 2020 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

ऐ मित्र मित्रता करके हम घाती व्यवहार नहीं करते,

विश्वास में ले पीठ पीछे, खञ्जर का वार नहीं करते।

हम बच्चे भारत माता के, मरयादा हनन नहीं करते,

टुकड़े वाली धारा का हम, चिन्तन मनन नहीं करते।

स्वराष्ट्रधर्म के संवाहक हम प्रगति अवरोध नहीं बनते।।

यलगारों वाली धारणा के, बिलकुल साथ नहीं रहते,

राष्ट्रवाद के संवाहक हम, द्रोही व्यवहार नहीं करते।

हम बेटे हिन्दुस्तान के लुकछिप कर वार नहीं करते,

सिद्धान्त नहीं अपने छलके,  हल्की बात नहीं करते।

स्वराष्ट्रधर्म के संवाहक हम प्रगति अवरोध नहीं बनते।।

देश में देश द्रोही फिरके हम उनको माफ़ नहीं करते,

मातृशक्ति का वन्दन करके ढोंगी व्यवहार नहीं करते।

मरने मिटने वाले तबके स्वप्निल व्यापार नहीं करते,

देशद्रोही विषबेलों के जड़ बीज संरक्षित नहीं करते।

स्वराष्ट्रधर्म के संवाहक हम प्रगति अवरोध नहीं बनते।।

करनी भरनी निर्णय करके हम पुनर्विचार नहीं करते,

मृत्यु दण्ड वाले हक़ के विरुद्ध व्यवहार नहीं करते,

हम सब छल छन्द फरेबों के पक्ष में बात नहीं करते,

दुष्टों की गलत धारणा के, राष्ट्र वादी साथ नहीं रहते।

स्वराष्ट्रधर्म के संवाहक हम प्रगति अवरोध नहीं बनते।।

राष्ट्र का ध्वजवन्दन करके हम गन्दे भाव नहीं रखते,

जो भी देश द्रोही भाव रखे हम उसको माफ़ करते।

भोलेभाले सद्भावों के खिलाफ विषवमन नहीं करते,

रखवाले हम सिद्धान्तों के हम झूठी बात नहीं करते।

स्वराष्ट्रधर्म के संवाहक हम प्रगति अवरोध नहीं बनते।।

हम लय बद्ध प्रगति करके भद्दे जज्बात नहीं करते,

शुभकामनायें अर्पित करके वैरी सा भाव नहीं रखते,

मतवाले हम देश प्रेम के दुश्मन सा भाव नहीं रखते,

देश का खाके पलबढ़ के हम किसी से रार नहीं रखते।

स्वराष्ट्रधर्म के संवाहक हम प्रगति अवरोध नहीं बनते।।

पूजक हैं हम मातृ भूमि के द्रोही को प्यार नहीं करते।

संहारक हैं हम दुश्मन के किसी का उधार नहीं रखते,

कृतज्ञ भाव के प्रतिपादक हैं, कृतघ्नता भाव नहीं रखते,

समृद्धि राष्ट्र कारक बन कर, ऊर्जस्वी भाव नहीं तजते ।

स्वराष्ट्रधर्म के संवाहक हम प्रगति अवरोध नहीं बनते।।

मनस्विता आलम्बन बनकर, कोई दुरभाव नहीं रखते,

आराधक महाकाल बनकर कामी सा भाव नहीं रखते।

ज्ञान सागर का मन्थन कर, रत्नों को पास नहीं रखते,

प्रकृति से सब कुछ पाकर, सब अपने पास नहीं रखते।

स्वराष्ट्रधर्म के संवाहक हम प्रगति अवरोध नहीं बनते।।

Share:
Reading time: 1 min
वाह जिन्दगी !

हम देंगे तुमको आजादी।/Ham Denge Tumko Azadi.

February 28, 2020 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

हम देंगे तुमको आजादी।

हम देंगे तुमको आजादी।

हम देंगे तुमको आजादी। 

हर कट्टरपन से आज़ादी,

हाँ जाहिलपन से आज़ादी,

इस देश द्रोह से आज़ादी,

हाँ मिल जाएगी आज़ादी।

हम देंगे तुमको आजादी।

हम देंगे तुमको आजादी। 

इस फूहड़पन से आज़ादी,

नालायकपन से आज़ादी,

सारे ढोंगों से आज़ादी,

औ गलत सोच से आज़ादी।

हम देंगे तुमको आजादी।

हम देंगे तुमको आजादी।

इस अक्खड़पन से आजादी,

गद्दारीपन से आजादी,

इन भडकावों से आजादी,

गन्दी फितरत से आजादी।

हम देंगे तुमको आजादी।

हम देंगे तुमको आजादी।

काली सोचों से आजादी,

नाली गड्ढों से आजादी,

लाठी डण्डों से आजादी,

सब बदरंगों से आजादी।

हम देंगे तुमको आजादी।

हम देंगे तुमको आजादी।

हर खूँरेजी से आजादी

टेढ़ी चालों से आजादी

नकली सोचों से आजादी

गन्दे खूनों से आजादी।

हम देंगे तुमको आजादी।

हम देंगे तुमको आजादी।

नकली धर्मों से आजादी,

हर भेद भाव से आजादी,

आतंक धरम से आजादी,

सारे भरमों से आजादी।

हम देंगे तुमको आजादी।

हम देंगे तुमको आजादी।   

Share:
Reading time: 1 min
वाह जिन्दगी !

बोलो बम बम बम भोले।Bolo bolo bam Bhole.

February 21, 2020 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

देखो चले शिव भोले,

दिल पृथ्वी का डोले,

चले गौरी को लेने ।

हौले हौले हौले हौले।

बोलो बम बम बम भोले।।      

शैव और अघोरी बोले,

डमरू औ त्रिशूल बोले,

चलो मैय्या को लेने।

कापालिक मृगछाला बोले।

बोलो बम बम बम भोले।।      

गंगा और चन्दा बोले,

भस्मी औ भभूत बोले,

चलो दक्ष सुता लेने।

लक्ष्मी बोलें कश्यप बोले। 

बोलो बम बम बम भोले।।      

सावन बोले शनि बोले,

ब्रह्मा और विष्णु बोले,

चलो गौरी माँ लेने।

कौन बोले क्या बोले।   

बोलो बम बम बम भोले।।      

भूत बोले प्रेत बोले,

नन्दी और दिनेश बोले,

चलो माँ पार्वती लेने।     

ये ,वो,हम सब बोले।

बोलो बम बम बम भोले।।      

मुण्डों की माला बोले,

नाग औ जयमाला बोले,

चलो शैलजा को लेने।

हम बोलें तुम भी बोलो। 

बोलो बम बम बम भोले।।      

बिजली और बादल बोले,

नदिया और  सागर  बोले,

चलो कनखलसुता  लेने।

पर्वत राज हिमालय बोले।  

बोलो बम बम बम भोले।।      

कण्ठी  और माला  बोले,

गोरा  और  काला  बोले,

चलो जननी जगत लेने।

क्या, क्या, क्या बोले।  

बोलो बम बम बम भोले।।      

कजरारे नयन  बोले,

देखो जन जन  बोले,

चलो माँ अम्बा को लेने।

सब नाथों का नाथ बोले।  

बोलो बम बम बम भोले।।      

Share:
Reading time: 1 min
वाह जिन्दगी !

ॐ सत्यम, शिवम्, सुन्दरम।/Om Satyam,Shivam,Sundaram.

February 17, 2020 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

जागा मनवा में अपने धरम,

अब आएगा निश्चित शुभम।

छोड़ो दैन्यता कर्म हो सिंह का,

आ गया मुक्ति मारग सुगम।

आओ जाने हम शिव का मरम,

ॐ   सत्यम,  शिवम्,  सुन्दरम।

अब हटने लगा सब भरम,  

स्वतः होने लगे शुभ करम।

छोड़ दो भीरुता रूप लो वीर का,

अपने रुख को करो कुछ नरम।

आओ जाने हम शिव का मरम,

ॐ   सत्यम,  शिवम्,  सुन्दरम।

दृश्य सुन्दर मनोहर परम,

शिव भजोगे न होगी जलन।

ना विकराल सा रूप महाकाल का,

छाँट देगा सब मन का भरम।

आओ जाने हम शिव का मरम,

ॐ   सत्यम,  शिवम्,  सुन्दरम।

आओ शिव से लगाएं लगन,

महा शिव रात्रि मनाएंगे हम।

नाम लो नाथ का रूप हो मुक्ति का,

पथ होता चले पावनम।

आओ जाने हम शिव का मरम,

ॐ   सत्यम,  शिवम्,  सुन्दरम।

अपने करमों का हो आकलन,

सब करने लगें शुभ करम।

छोड़ दो दुष्टता रूप लो ईश का,

सारे जग में दिखे शंकरम।

आओ जाने हम शिव का मरम,

ॐ   सत्यम,  शिवम्,  सुन्दरम।

काट देगा सब भव बन्धनम,

ॐ नमः शिवाय का भजन।

छोड़ो मोह जग का नाता मात्र शिव का,

बस देगा तुम्हें शुभ फलम।

आओ जाने हम शिव का मरम,

ॐ   सत्यम,  शिवम्,  सुन्दरम।

Share:
Reading time: 1 min
वाह जिन्दगी !

आई आई शिव रात्रि आई रे।[AAI AAI SHIV RATRI AAI RE]

February 16, 2020 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

सबका कल्याण कराएं,

रूप सुन्दर सा बनाएं।

प्रकृति में खुद रम जाएँ,

देव वो सरल कहाएँ। 

उनमें रमने की तिथि आई रे,

आई आई शिव रात्रि आई रे।

सबके मन को भा जाएँ,

जल्दी वो खुश हो जाए।

अपनी किरपा बरसाएं,

रहें वो धूनी रमाएँ।

उनमें रमने की तिथि आई रे,

आई आई शिव रात्रि आई रे।

आओ बेल पत्री लाएं,

धतूरा उन पर चढ़ाएं।

बस उनमें खो जाएँ ,

महाकाल रात्रि मनाएं।

उनमें रमने की तिथि आई रे,

आई आई शिव रात्रि आई रे।

आओ शिव भजन को गाऐं,

केवल उनमें खो जाएँ।

भूतनाथ की महिमा गाएं,

शुभ घड़ी में खुशी मनाएं।

उनमें रमने की तिथि आई रे,

आई आई शिव रात्रि आई रे।

सब को सत्य बोध कराएं,

प्रकृति का सत् समझाएं।

भौतिकता से कट जाएं,

हरदम शिव शिव जप पाएं।

उनमें रमने की तिथि आई रे,

आई आई शिव रात्रि आई रे।

शिव का सत् बोध कराएं,

मिथ्या मान्यताएं हटाएँ।

बस सत्य में रमते जाएँ,

हरक्षण शिव ही शिव गाएं।

उनमें रमने की तिथि आई रे,

आई आई शिव रात्रि आई रे।

Share:
Reading time: 1 min
वाह जिन्दगी !

घर में छिप बैठे रहने से जग का कल्याण नहीं होता ।

February 15, 2020 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments


­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­ऋषि मुनि सोते रह जाते तब उनका मान नहीं होता,

बिन ‘चरैवेति’ की धारणा धारे, महाप्रयाण नहीं होता,

जीवन है, चलने का नाम ठहराव पसन्द नहीं करती,

शायद सुरक्षित रह पाते पर जगत में नाम नहीं होता।

घर में छिप बैठे रहने से जग का कल्याण नहीं होता।

संघर्षों से फिर भगजाने पर बेड़ा भव पार नहीं होता,

गर एकजगह रुकजाते तो जग में व्यापार नहीं होता,

कर्तव्यपथ से भगजाने पर धरती सम्मान नहीं करती,

यदि कूप मण्डूक बने रहते तो ज्ञान प्रसार नहीं होता।

घर में छिप बैठे रहने से जग का कल्याण नहीं होता।

जब तक न अग्नि परीक्षा हो सीता का मान नहीं होता,

श्री रामचन्द्र निज घर रहते पुरुषोत्तम नाम नहीं होता,

धातु न ताप सहन करती तो किसी काम की न रहती,

यदि पूर्वज वीर भाव खोते, तो जग में नाम नहीं होता।

घर में छिप बैठे रहने से जग का कल्याण नहीं होता।

हृदयों के दावानल का, कोई प्रगटी करण नहीं होता,

हम पंगु बनके रहजाते फिर जय श्री वरण नहीं होता,

हम क्या और जग क्या है जिज्ञासा मन में दबी रहती,

वृहताकार रहस्यों का जग के अनावरण भी ना होता।

घर में छिप बैठे रहने से जग का कल्याण नहीं होता।

न अनुसन्धान का क्रम होता दर्शन विज्ञान नहीं होता,

सब हो जाते पोंगा पन्थी ज्ञान का दिनमान नहीं होता,

तो प्राणप्रतिष्ठा की बातें कल्पना भी वरण कैसे करती,

सब वीराना होता जाता, मानवमन उन्माद नहीं होता।

घर में छिप बैठे रहने से जग का कल्याण नहीं होता।

‘तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा’ का महती मन भाव कहाँ होता,

सब कुछ बेसुरा होजाता फिर सुन्दर राग कहाँ होता,

मानवमन अभिव्यक्ति भी फिर सोई – सोई सी रहती,

तो नाथ संकल्पना न होती, नाथों का नाथ नहीं होता।

घर में छिप बैठे रहने से जग का कल्याण नहीं होता।

Share:
Reading time: 1 min
वाह जिन्दगी !

व्यक्तित्व / PERSONALITY

February 8, 2020 by Dr. Shiv Bhole Nath Srivastava No Comments

व्यक्तित्व वह है जो हैरान परेशान न हो,

छोटीछोटी बात पर कोई घमासान न हो,

चन्दा सूरज में भी लगे है इक बार ग्रहण,

सोच को बदलती चाल से नुकसान न हो।

सोच गुलजार रहे उस में शमशान न हो,

जो प्रगति शील न हो ऐसा उनवान न हो,

यूँ विभीषण ने भी ली थी इक बार शरण,

हो सब हो मगर बौद्धिक अवसान न हो।

किसी बेगैरत पर, यूँ ही मेहर बान न हो,

और याद रहे जरूरतमन्द परेशान न हो,

याद आते, ऐसे लोग जिन्दगी  में हर क्षण,

भले ही उनके पास एक भी मकान न हो।

शब्द मधुर ही रहे भाषा बदजुबान न हो,

ईमान कायम रहे व्यवहार बेईमान न हो,

यूँ आम हो चला है बद नीयती का चलन,

नर्क न बने जीवन, इस लिए गुमान न हो।

सोच बदलो, बे बात ही हलकान मत हो,

चिन्तनद्वार खोलो अगर रोशनदान न हो,

बदलती रहती है दुनियाँ तो क्षणप्रतिक्षण,

व्यक्तित्व है तब गर सोच बियाबान न हो।

पल न गुजरें ऐसे,अधरों पर मुस्कान न हो,

काम अच्छे करो, भले जान पहचान न हो,

गुजर जाने पर रात, आती सूर्य की किरण,

नाथ लगे रहना अनवरत नाम हो या न हो।

व्यक्तित्व वह है जो हैरान परेशान न हो ।

छोटीछोटी बात पर कोई घमासान न हो ।

Share:
Reading time: 1 min
Page 31 of 44« First...1020«30313233»40...Last »

Recent Posts

  • बलिदानों की अमिट कहानी। 
  • असफलता से सफलता की ओर
  • IMPACT OF INFORMATION
  • SOCIAL MOBILITY AND SOCIAL CONTROL IN REFERENCE TO EDUCATIONAL DEVELOPMENT
  • SCHOOL AND OUT OF SCHOOL

My Facebook Page

https://www.facebook.com/EducationAacharya-2120400304839186/

Archives

  • May 2026
  • April 2026
  • March 2026
  • February 2026
  • January 2026
  • December 2025
  • November 2025
  • October 2025
  • September 2025
  • August 2025
  • July 2025
  • June 2025
  • May 2025
  • April 2025
  • March 2025
  • February 2025
  • January 2025
  • December 2024
  • November 2024
  • October 2024
  • September 2024
  • August 2024
  • July 2024
  • June 2024
  • May 2024
  • April 2024
  • March 2024
  • February 2024
  • September 2023
  • August 2023
  • July 2023
  • June 2023
  • May 2023
  • April 2023
  • March 2023
  • January 2023
  • December 2022
  • November 2022
  • October 2022
  • September 2022
  • August 2022
  • July 2022
  • June 2022
  • May 2022
  • April 2022
  • March 2022
  • February 2022
  • January 2022
  • December 2021
  • November 2021
  • January 2021
  • November 2020
  • October 2020
  • September 2020
  • August 2020
  • July 2020
  • June 2020
  • May 2020
  • April 2020
  • March 2020
  • February 2020
  • January 2020
  • December 2019
  • November 2019
  • October 2019
  • September 2019
  • August 2019
  • July 2019
  • June 2019
  • May 2019
  • April 2019
  • March 2019
  • February 2019
  • January 2019
  • December 2018
  • November 2018
  • October 2018
  • September 2018
  • August 2018
  • July 2018

Categories

  • Uncategorized
  • काव्य
  • दर्शन
  • बाल संसार
  • मनोविज्ञान
  • वाह जिन्दगी !
  • विविध
  • शिक्षा
  • शोध
  • समाज और संस्कृति
  • सांख्यिकी

© 2017 copyright PREMIUMCODING // All rights reserved
Lavander was made with love by Premiumcoding